अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के दिन उद्धव ने राष्ट्रपति को नासिक राम पूजा के लिए आमंत्रण भेजा

नई दिल्ली । शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से 22 जनवरी को नासिक के कालाराम मंदिर में होने वाले एक धार्मिक समारोह में शामिल होने की अपील की और कहा कि नासिक में उनकी उपस्थिति अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की ‘गरिमा बढ़ाएगी’। बीते शुक्रवार (12 जनवरी) को लिखे अपने पत्र में ठाकरे – जिन्हें 22 जनवरी को होने वाले अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया है – ने कालाराम मंदिर में होने वाली राम महाआरती और महापूजा का उल्लेख किया।

 

उन्होंने पत्र में कहा है, ‘महोदया, अतीत में सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के हाथों हुई थी. अर्थात नासिक में आपकी उपस्थिति अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की गरिमा भी बढ़ाएगी और राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित परिपाटी को भी बरकरार रखेगी।

आदिवासी और सनातनी हिंदुओं को गौरवान्वित होने का अवसर

हिंदी में जारी पत्र में ठाकरे ने कहा, ‘हमें आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आप इस कर्म प्रधान राष्ट्र में, कर्म योगी श्री राम के कर्म क्षेत्र नासिक में पधारकर न केवल आदिवासी और सनातनी हिंदुओं को गौरवान्वित होने का अवसर देंगी, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों में भी उमंग का संचार करेंगी।

ठाकरे ने मुर्मू को अयोध्या में राम मंदिर के अभिषेक के लिए भी बधाई दी और कहा कि यह संपूर्ण भारतवर्ष के लिए हर्षोल्लास के साथ ​हिंदू राष्ट्रवादी नेता उनके दिवंगत पिता बाल ठाकरे के धर्म संकल्प पूर्ति की पूर्णाहुति है। उन्होंने कहा, ‘भगवान राम के आदर्श केवल हिंदू धर्म या हिंदुत्व तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्र की अस्मिता और आस्था के भी प्रतीक हैं।

इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने बीते 12 जनवरी को सोशल साइट एक्स पर बताया था कि राष्ट्रपति मुर्मू को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।

भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का भाग लेने से इनकार

मालूम हो कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने से इनकार कर दिया है।

सरकार-प्रायोजित राजनीतिक कार्यक्रम है

इन दलों का कहना है कि यह एक सरकार-प्रायोजित राजनीतिक कार्यक्रम है, जो लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी विचारों के लिए भाजपा और आरएसएस गठबंधन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। दलों का आरोप है कि भाजपा और आरएसएस ने मिलकर इसे अपने चुनावी लाभ के लिए एक राजनीतिक कार्यक्रम बना दिया है।
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कार्यक्रम में ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी ने प्रस्तावित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को लेकर वरिष्ठ संतों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं। अयोध्या में राम मंदिर उसी स्थान पर बन रहा है, जहां स्थित बाबरी मस्जिद दिसंबर 1992 में हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थी।

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद का निपटारा करते हुए संबंधित जगह को विश्व हिंदू परिषद से जुड़े वादी को सौंप दिया था. अदाल ने यह भी आदेश दिया था कि नई मस्जिद के निर्माण के लिए जमीन का एक अलग टुकड़ा सुन्नी वक्फ बोर्ड को सौंप दिया जाए।