दलबदलूओं नेताओं पर अखिलेश यादव का ज्‍यादा भरोसा, PDA फॉर्मूला से बीजेपी को चुनौती दे पाएंगी सपा

BJP misleading people by making announcements about new schemes: Akhilesh -  Hindustan Times

नई दिल्‍ली । लोकसभा चुनाव की अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान शुरू कर दिया है. सपा ने यूपी की11 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है

सपा ने गाजीपुर सीट से बसपा के मौजूदा सांसद अफजल अंसारी को उम्मीदवार बनाया है तो मुजफ्फरनगर सीट से हरेंद्र मलिक को प्रत्याशी बनाया है. अखिलेश यादव ने उम्मीदवारों के जरिए सियासी समीकरण साधने की कवायद की है, लेकिन उसके लिए दलबदूल नेताओं पर ही भरोसा जताया है. सपा ने 11 में से 8 टिकट उन्हें दिया है, जो दूसरे दल से पार्टी में आए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि दलबदलू नेताओं के सहारे क्या बीजेपी को सपा चुनौती दे पाएगी?

सपा ने सोमवार को 11 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. सपा ने गाजीपुर से अफजल अंसारी, मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक, मोहनलालगंज से आरके चौधरी, आंवला से नीरज मौर्य, शाहजहांपुर से राजेश कश्यप, हरदोई से ऊषा वर्मा, मिश्रिख से रामपाल राजवंशी, प्रतापगढ़ से एसपी सिंह पटेल, बहराइच से रमेश गौतम, गोंडा से श्रेया वर्मा और चंदौली से वीरेंद्र सिंह को कैंडिडेट घोषित किया है. सपा इससे पहले 16 सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर चुकी है. सपा ने यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से अभी तक 27 सीट पर उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया है. 27 लोकसभा सीटों में से 17 दूसरे दल से आए हुए नेता को प्रत्याशी सपा ने बनाया है।

सपा दलबदलू नेताओं पर खेला दांव

अखिलेश यादव ने दूसरे दल से आए नेताओं पर ही भरोसा जताया है. सपा ने 11 सीटों में से 8 सीट पर दलबदलू नेताओं को टिकट दिया है, जिसमें एक नेता को बिना पार्टी ज्वाइन कराए ही अखिलेश यादव ने प्रत्याशी बना दिया है. वीरेंद्र सिंह, हरेंद्र मलिक, नीरज मौर्य, आरके चौधरी रामपाल राजवंशी और रमेश गौतम ऐसे नेता हैं, जो दूसरे दल से सपा में आए हैं. गाजीपुर सीट से प्रत्याशी बनाए गए अफजल अंसारी ने तो अभी सपा की सदस्यता भी नहीं ली और बसपा से मौजूदा सांसद है, जिन्हें टिकट दे दिया गया है।

चंदौली से प्रत्याशी बने वीरेंद्र सिंह बसपा और कांग्रेस में रह चुके हैं. हरेंद्र मलिक कांग्रेस छोड़कर सपा में आए हैं और पार्टी ने उन्हें मुजफ्फरनगर सीट से टिकट दिया है. इसी तरह से आरके चौधरी बसपा से लेकर कांग्रेस तक में रह चुके हैं और 2022 से पहले सपा में आए हैं. नीरज मौर्य दो बार के विधायक रह चुके हैं और स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ 2022 में बीजेपी छोड़कर सपा में आए हैं पार्टी ने उन्हें आंवला सीट से कैंडिडेट बनाया है. पूर्व विधायक रमेश गौतम 2020 में बसपा छोड़कर सपा में आए हैं और पार्टी ने उन्हें बहराइच से टिकट दिया है।

मिश्रिख सीट से प्रत्याशी बनाए गए रामपाल राजवंशी सपा के साथ दस साल से जुड़े हैं, लेकिन उससे पहले एलजेपी में रहे हैं. 2007 में एलजेपी से ही विधायक चुने गए थे और अब पार्टी ने उन पर बड़ा दांव खेला है. गोंडा सीट से सपा ने श्रेया वर्मा को टिकट दिया है, जो दिग्गज नेता बेनी प्रसाद वर्मा की पोती और राकेश वर्मा की बेटी हैं. बेनी प्रसाद वर्मा और राकेश दोनों ही कांग्रेस में रह चुके हैं और चुनाव भी लड़े हैं।

सपा की पहली लिस्ट में दलबदलू की भरमार

सपा की पहली लिस्ट में भी ज्यादातर उन्हीं नेताओं को प्रत्याशी बनाया गया है, जो दूसरे दल से आए हैं. फर्रुखाबाद से सपा ने डॉक्टर नवल किशोर शाक्य को प्रत्याशी बना रखा है, जो बसपा में रहे हैं. अंबेडकरनगर सीट से लालजी वर्मा को प्रत्याशी बनाया है, जो 2022 के चुनाव में बसपा छोड़कर आए थे.एटा सीट से देवेश शाक्य को बनाया है, जो स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ बीजेपी छोड़कर सपा में आए हैं. उन्नाव से अन्नू टण्डन को प्रत्याशी बनाया गया है, जो कांग्रेस से सपा में आई हैं. इसी तरह अकबरपुर सीट से राजाराम पाल को बनाया गया है, जो बसपा और कांग्रेस से सांसद रह चुके हैं।

संभल से शफीकुर्रहमान बर्क एक समय बसपा से सांसद रहे हैं, लेकिन 2019 में सपा का दामन थाम लिया था. बांदा से शिवशंकर सिंह पटेल बीजेपी में रह चुके हैं और राम मंदिर आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है. बस्ती से रामप्रसाद चौधरी बसपा के दिग्गज नेता रहे हैं और उनके पिता कांशीराम के सहयोगी थे. गोरखपुर से काजल निषाद को सपा ने लोकसभा चुनाव का टिकट दिया है, जो कांग्रेस में रही हैं और चुनाव लड़ चुकी हैं।

सपा में कितना लागू हुआ पीडीए फॉर्मूला

सपा ने यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 27 सीट पर अपने कैंडिडेट घोषित किए हैं. अखिलेश यादव इस बार के चुनाव में पीडीए यानि पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक फॉर्मूला लेकर चल रही है. सपा ने जिन 27 सीट पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है, उसके जातीय समीकरण देखें तो सबसे ज्यादा भरोसा कुर्मी समुदाय पर किया गया है. सपा में अभी तक 6 कुर्मी समुदाय को टिकट दिया तो तीन पासी समुदाय और तीन मौर्य समुदाय से प्रत्याशी उतारा है. इसके अलावा तीन यादव, दो मुस्लिम, चार सामान्य जाति से हैं तो दो टिकट कश्यप समुदाय को दिए गए हैं. जाट समुदाय से एक, पाल समुदाय से एक और एक जाटव समुदाय से प्रत्याशी बनाया है. सपा के पीडीए फॉर्मूले के लिहाज से देखें तो 16 टिकट पिछड़े वर्ग के लोगों को दिया है तो दलित समुदाय को चार और अल्पसंख्यक समुदाय से दो प्रत्याशी दिए हैं. इसके अलावा बाकी चार प्रत्याशी सामान्य वर्ग से हैं।