पश्चिमी मध्‍य देशों में धीरे-धीरे एक साथ आ रहें इस्‍लामिक ताकतें, हूती भी सऊदी अरब से दोस्ती को तैयार

नई दिल्‍ली । यमन का हूती विद्रोही सऊदी अरब के साथ शांति बनाने के लिए तैयार है. सना में पत्रकारों से बात करते हुए संगठन के उप विदेश मंत्री हुसैन अल-एजी ने यमन में अमेरिका और यूनाइटेड किंग्डम (यूके) का साथ नहीं देने के लिए सऊदी अरब का विशेष आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि हम सऊदी अरब से शांति वार्ता में प्रवेश करने के लिए उत्सुक हैं. हूती विद्रोही सऊदी अरब के बीच दुश्मनी रही है. यमन का ये संगठन सऊदी के निशाने पर रहता है. हूती को ईरान का समर्थन मिलता है और वहीं ईरान सऊदी अरब को अपना दुश्मन मानता है।

यमन में अब तक 300 से ज्यादा हमले कर चुके

एक अधिकारी ने कहा, अमेरिका और यूके 12 जनवरी के बाद से यमन में अब तक 300 से ज्यादा हमले कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका हम पर हमला कर रहा है और वह जवाबी हमले से नहीं बचा पाएगा. हम अपने राष्ट्र पर कोई हमला करता है तो हम चुप नहीं बैठेंगे और इसका गाजा और फिलिस्तीन के प्रति हमारे रुख पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. पिछले साल नवंबर के बाद से हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अमेरिका समेत यूरोप के कई देशों के जहाजों को निशाना बनाया. अल-एजी ने कहा कि हूती फिलिस्तीन के समर्थन में देश की ओर जाने वाले केवल इजराइल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाता है।

हूती विद्रोही शिया मुस्लमानों वाला संगठन

बता दें कि यमन का हूती विद्रोही शिया मुस्लमानों वाला संगठन है, जो जैदी का समर्थक है. वे खुद को हमास और लेबनान के हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों के साथ-साथ इजराइल, अमेरिका और पश्चिम के देशों के खिलाफ ईरानी नेतृत्व वाली ‘प्रतिरोध की धुरी’ का हिस्सा बताते हैं. यह समूह 1990 के दशक में उभरा और इसका नाम आंदोलन के दिवंगत संस्थापक हुसैन अल-हूती के नाम पर रखा गया है. वर्तमान में इसके नेता हुसैन अल-हूती के भाई अब्दुल मलिक अल हूती हैं।

हूती और सऊदी अरब की दुश्मनी

1980 के दशक में यमन के तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के खिलाफ देश में माहौल बन रहा था. तभी वहां के आदिवासी समुदाय ने एक संगठन खड़ा किया, जो राष्ट्रपति के खिलाफ एकजुट हुआ. इसके संस्थापक थे शिया जैदी समुदाय के हुसैन अल हूती. देखते ही देखते हूती विद्रोही सरकार से टकराने लगे. सरकार से हूती विद्रोहियों ने कई युद्ध लड़े. यमन में शिया जैदी समुदाय अल्पसंख्यक है. इसके बावजूद ये 2014 में वहां राजनीतिक रूप से काफी मजबूत हो गए और 2015 में तो सादा प्रांत और राजधानी सना पर कब्जा भी कर लिया था।

साल 2017 में अली अब्दुल्लाह सालेह की हत्या कर दी

सना पर कब्जे के बाद वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति और अली अब्दुल्लाह सालेह के उत्तराधिकारी अब्दरब्बुह मंसूर हादी विदेश भाग गए. इस पर पड़ोसी देश सऊदी अरब ने अपनी सेना भेज कर विद्रोहियों को भगाया. इसमें यूएई और बहरीन ने भी सऊदी अरब का साथ दिया था. हूती संगठन के लोग इस बात से गुस्से में थे. नतीजा यह हुआ कि संगठन के लड़ाकों ने साल 2017 में अली अब्दुल्लाह सालेह की हत्या कर दी और यमन की ज्यादातर आबादी पर अपना नियंत्रण कर लिया।

सऊदी अरब का यह भी कहना रहा है कि ईरान ने हूती विद्रोहियों को क्रूज मिसाइलें और ड्रोन भी दिए हैं, जिनसे सऊदी अरब के तेल कारखानों को 2019 में निशाना बनाया गया था. हालांकि, ईरान ने ऐसे आरोपों को कभी भी स्वीकार नहीं किया।