आध्यात्मिक उन्नति संस्कृति से ही पोषित होती है:डॉ राजरानी

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मध्यभारतीय हिन्दी साहित्य सभा की ‘महिला साहित्यकार गोष्ठी’ सम्पन्न
ग्वालियर । अजयभारत न्यूज
हमारी आध्यात्मिक उन्नति भी हमारी संस्कृति से ही पोषित होती है। हम अनंत काल तक इन सांस्कृतिक संस्मरणों के बखान कर सकते हैं। यह बात डॉ राजरानी शर्मा ने अध्यक्ष की आसंदी से कही। अपने उद्बोधन में आगे उन्होंने कहा कि भारतीय स्त्री का जीवन सांस्कृतिक उत्सव की तरह होता है अतः हमारी शिराओं में रक्त नही अपितु भाव बहते हैं। उन्होंने परिवार के आपसी सामंजस्य पर महत्वपूर्ण सुझाव मंच पर साझा किए।
मध्यभारतीय हिन्दी साहित्य सभा की महिला साहित्यकार गोष्ठी गत दिवस “संस्मरण में सांस्कृतिक जीवन” विषय पर वर्चुअली सम्पन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राजरानी शर्मा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध ग़ज़लकारा रश्मि शर्मा ‘सबा’ जी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पुणे से व्यंग्यकार समीक्षा तैलंग जी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन व संयोजन डॉ करुणा सक्सेना एवं आभार डॉ मंजुलता आर्य ने किया।
कार्यक्रम में शहर की अनेक महिला साहित्यकार एकत्रित हुईं। डॉ प्रतिभा द्विवेदी ने सरस्वती वंदना कर गोष्ठी को आरम्भ किया। महिला साहित्यकारों ने सांस्कृतिक जीवन से जुड़े हुए अपने रोचक संस्मरणों व अनुभवों को मंच पर साझा किया। मुख्य अतिथि के रूप में रश्मि सबा ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत किसी धर्म, वर्ग, लिंग, आयु विशेष की न होकर यह इस देश की चिर सनातन व्यवस्था है और हमें इसे संस्मरणों के माध्यम से सम्हाल कर अविस्मरणीय रखना चाहिए। विशिष्ट अतिथि के रूप में आसीन समीक्षा तैलंग ने संयुक्त परिवार के महत्व को अपने संस्मरण में तीन पीढ़ियों के आपसी सम्बन्धों का रोचक संस्मरण सुनाकर प्रस्तुत किया।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में डॉ पद्मा शर्मा, डॉ मीना श्रीवास्तव, डॉ मन्दाकिनी शर्मा, प्रो मीना श्रीवास्तव, डॉ सुनीता पाठक, डॉ ज्योत्स्ना सिंह राजावत, वन्दना सिंह चौहान एवं पुष्पा शर्मा ने संस्मरणों का पाठ किया। गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ श्रद्धा सक्सेना, डॉ नेहा बुनकर, निशि चौहान सहित अनेक साहित्यानुरागी उपस्थित रहे।

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