सर्व विघ्नहर्ता मंगलमूर्ती भगवान श्रीगणेश पार्थिव रूप मे आज विराजेंगे

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– ज्यो.एवं वास्तुविद :रमेश चौरसिया
सभी देवों में प्रथम आराध्य भगवान गणेश की पूजा करने और उन्हें प्रसन्न करने का ये पर्व इस साल शुक्रवार, 10 सितंबर 2021 को मनाया जा रहा प्रत्येक माह के दोनों पक्षों में चतुर्थी तिथि आती है परंतु भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी तिथि के ही नाम से जाना जाता है,क्योंकि श्री गणेश जी उत्पत्ति इसी माह की चतुर्थी को हुई थी।भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर अनन्त चतुर्दशी दस दिनों तक की जाने वाली गणेश पूजा का अपना एक विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति ,सनातन परम्परा में साकार ब्रह्म और निराकार ब्रह्म दोनों को पूजने की प्रथा है । विशेष रूप से सनातन धर्म के लोग साकार ब्रह्म की पूजा अर्चना करते हैं और इनमें से प्रमुख हैं गणेश की पूजा । गणेश को प्रथम पूज्य कहा जाता है । हम आम मानव ही नहीं अपितु देवता भी गणेश को प्रथम पूज्य के रूप में पूजते हैं।
श्री गणेश स्थापना मुहूर्त(शहर के अक्षांशों के अनुसार समय में भिन्नता हो सकती है.इस वर्ष की दिनांक 10 सितंबर 2021 शुक्रवार के दिन गणेशोत्सव या गणेश चतुर्थी का आरंभ होगा और इसके बाद 19 सितंबर को गणेश भगवान का विसर्जन होगा।
रवियोग 
वहीं गणेश चतुर्थी पर इस बार रवियोग में पूजन होगा. लंबे समय बाद इस बार चतुर्थी पर चित्रा-स्वाति नक्षत्र के साथ रवि योग का संयोग बन रहा है. चित्रा नक्षत्र शाम 4.59 बजे तक रहेगा और इसके बाद स्वाति नक्षत्र लगेगा. वहीं 9 सितंबर दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से अगले दिन 10 सितंबर 12 बजकर 57 मिनट तक रवियोग रहेगा, जो कि उन्नति को दर्शा रहा है. इस शुभ योग में कोई भी नया काम और गणपति पूजा मंगलकारी होगी.।
मुहूर्त
10 सितम्बर 2021 दिन शुक्रवार चतुर्थी तिथि सूर्योदय से 21:57 बजे तक।
गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त :11:02:58 से 13:32:52 तक
(अवधि: 2 घंटे 29 मिनट)
अभिजीत मुहूर्त*11:53 से 12: 43 तक
चौघड़िया मुहूर्त
12:24 से 13:57 शुभ की चौघड़िया
21:29 से 21:57 तक लाभ की चौघड़िया।
फिर भी उदित तिथि से चतुर्थी समाप्ति पर्यन्त यानी रात्रि 21:57 तक गणेश स्थापना कर सकते है
आज चन्द्र दर्शन नहीं करना है:
मंगलमूर्ती की स्थापना
पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए श्री गणेश जी की *पार्थिव प्रतिमाही लाएं
पूजन
श्री गणेश जी को घर में लाने से पहले पूजा स्थल की अच्छे से साफ-सफाई कर लें और पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव करें। फिर एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर अक्षत यानी चावल रखें और उनके ऊपर गणपति को स्थापित कर दें।
गणपति की चौकी के पास तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर अवश्य रखें। कलश गणपति के दाईं यानी राइट साइड होना चाहिए। इस कलश के नीचे चावल या अक्षत रखें और इस पर मोली (कलावा)अवश्य बांध दें। गणपति के बाईं यानी लेफ्ट साइड की तरफ घी का दीपक जलाएं। दीपक को भी सीधे जमीन पर न रखकर और इसके नीचे भी अक्षत रख दें। पूजा का एक समय निश्चित रखें।
माला जाप हेतु संकल्प
अगर आप माला जप करने का प्रण ले रहे हैं तो हर दिन नियत समय पर उतनी ही माला का जप करें। गणपति की स्थापना के बाद दाएं (सीधे) हाथ में अक्षत और गंगाजल लेकर संकल्प करें। कहें कि हम गणपति को इतने दिनों तक अपने घर में स्थापित करके प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा करेंगे। संकल्प में उतने दिनों का जिक्र करें, जितने दिन आप गणपति को अपने घर में विराजना चाहते हों। जैसे, तीन, पांच,सात, नौ या 11 दिन। इसके बाद श्री गणेश जी को दूर्वा घास या फिर पान के पत्ते की सहायता से गंगाजल से स्नान कराएं और भगवान को पीले वस्त्र अर्पित करें। इसके साथ ही मोली को वस्त्र मानकर भी अर्पित कर सकते हैं। स्नान के बाद गणपति को रोली से तिलक लगाकर अक्षत और फूल चढ़ाएं और प्रिय मोदक का भोग लगाएं। इसके बाद गणेश आरती करें। प्रसाद में प्रतिदिन पंचमेवा जरूर रखें।
विशेष
जो भगवान गणेश की प्रतिमा नही ले सकते वे सुपारी में कलावा वांधकर सुपारी गणपति की स्थापना कर सकते है।
पूजन में तुलसी दल अर्पित न करें
इसके पीछे एक पौराणिक कथा है।तुलसी जी ने श्री गणेशजी से विवाह का प्रस्ताव रखा जिस पर
भगवान गणेश ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए तुलसी का विवाह प्रस्ताव ठुकरा दिया। तुलसी को भगवान गणेश के इस रुखे व्यवहार और अपना विवाह प्रस्ताव ठुकराए  जाने से बहुत दुख हुआ और उन्होंने आवेश में आकर भगवान गणेश को दो विवाह होने का शाप दे दिया।
इस पर श्री गणेश ने भी तुलसी को असुर से विवाह होने का शाप दे डाला।
बाद में तुलसी को अपनी भूल का अहसास हुआ और भगवान गणेश से क्षमा मांगी।
ज्योतिषीय संदर्भ
ज्योतिष की दृष्टि में गणेश चतुर्थी पर इस बार 6 ग्रहों का शुभ संयोग बन रहा है, जो व्यापारियों के लिए अतिलाभकारी होगा. चतुर्थी पर इस बार छह ग्रह अपनी श्रेष्ठ स्थिति में होंगे, जिसमें बुध कन्या राशि में, शुक्र तुला राशि में, राहु वृषभ राशि में, शनि मकर राशि में, केतु वृश्चिक राशि तथा सूर्य सिंह राशि में विद्यमान होंगे. ग्रहों की ये स्थिति कारोबार करने वाले जातकों के लिए शुभ है. व्यापारी वर्ग के मुनाफे में बढ़ोत्तरी होगा और शेयर बाजार में भी लाभ होगा. सूर्य सिंह राशि मे भ्रमण कर रहे हैं जो कालपुरूष की कुंडली के अनुसार पंचम भाव में बन रहा है । पंचम स्थान से बुद्धि और विवेक की बात की जाती है इसलिए जो भी इस वर्ष पूरी श्रद्धा से इनकी पूजा अर्चना करेंगे उनको विशेष लाभ प्राप्त होगा । धन चाहने वालों, यश संतान एवं आंखों की रोशनी की कामना रखने वालों को सूर्य देव की, कृपा प्राप्त होगी।
राशि अनुसार गणपति पूजन
सभी लोगों को अपने सामर्थ्य एवं श्रद्धा से गणेश जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए । फिर भी विशेष राशि स्वामी के अनुसार यदि पूजन करते हैं तो विशेष लाभ प्राप्त होगा ।
यदि आपकी राशिमेष एवं बृश्चिक* है तो आप अपने राशि स्वामी यानी मंगल का ध्यान करते हुए वेसन के लड्डु का विशेष भोग लगावें आपमें अदम्य साहस एवं ऊर्जा का विकास होगा ।
यदि आपकी राशि बृष एवं तुलाहो तो आप अपने राशि स्वामी शुक्रका ध्यान करते हुए भगवान गणेश को सफेद मोदक का भोग विशेष रूप से अवश्य लगावें आपको धन ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी ।*
मिथुन एवं कन्या राशिवाले को राशि स्वामी बुध को ध्यान करते हुए गणेश जी को पान अवश्य अर्पित करना चाहिए आपको विद्या एवं बुद्धि की प्राप्ति होगी ।
* धनु एवं सिंहराशि वालों को *गुरु ग्रह का ध्यान करते हुए पीले फल का भोग अवश्य लगाना चाहिए ताकि आपको जीवन में सुख, सुविधा समृद्धि सामाजिक प्रतिष्ठा एवं आनन्द की प्राप्ति हो सके।
मकर एवं कुंभ राशि वालों को शनिदेव का ध्यान करते हुए सुखे मेवे का भोग लगाना चाहिए जिससे आप अपने कर्म के क्षेत्र में उन्नति एवं सफलता की उचाइयां प्राप्त होसकें।
* सिंह राशि वालों को सूर्यदेव का स्मरण करते हुए केले का विशेष भोग लगाना चाहिए जिससे जीवन यश कीर्ति,सम्मान प्राप्त कर सकें।
*कर्क राशि वालों को चंद्रदेव का ध्यान करते हुए सफेद बताशे, खील का भोग लगना चाहिए जिससे आपका जीवन सुख-शांति से भरपूर हो।
पूजा में रोजाना दुर्बा अवश्य अर्पित करें।
विशेष
केतु ग्रह की पीड़ा से मुक्ति हेतु सर्व विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का पूजन अवश्य करें
श्री गणेश विसर्जन
अनंत चतुर्दशी को भगवान श्रीगणेश का ससम्मान विसर्जन इस कल्पना के साथ करते है कि विघ्नहरण आपने इन दस दिनों में हमारे जीवन के सभी विघ्नों को दूर कर हमारे जीवन को सुखी वनाया है।
हे विघ्नहर्ता मंगलमूर्ती अगले वर्ष फिर पधारें

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