श्रद्धा पूर्वक मनाया गया हलछट का पर्व ,वंश वृद्धि और सुरक्षा की कामना की गई

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ग्वालियर । अजयभारत न्यूज
पुत्रों के दीर्घायु होने और वंश वृद्धि की कामना को लेकर महिलाओं ने कल सारे दिन उपवास रखा और हरछठ की पूजा की। हरछठ को भगवान श्री कृष्ण के अग्रज बलराम के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
महिलाओं ने व्रत रखकर घर के आंगन में कांस के पेड़ की टहनियों को रखकर बांस से बने चुनकों में लाई, चना, महुआ, पूड़ी, केला, ककड़ी आदि का भोग हरछठ महारानी को लगाकर पूजा अर्चना की और अपने परिवार और वंश की सुरक्षा के लिये भगवान से प्रार्थना की। भगवान भोलेनाथ की आरती कर वंश वृद्धि और वंश की सुरक्षा की प्रार्थना की।
हलषष्टी का त्यौहार प्रतिवर्ष भाद्रपद की कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है। इस दिन सुबह से महिलाएं स्नान ध्यान कर उपवास रखती हैं और हलछठ की पूजा कर अपने पुत्र की दीर्घायु होने की कामना करती हैं। महुआ और पसई का चावल भैंस के दूध में पकाकर, पंचमेवा, मके की लाई को नई दुनिया (बांस की चुनकी) में भरकर पूजन में रखती हैं।शुद्ध आटे के पुआ भी बनाये जाते हैं, जिन्हे दही के साथ पूजा जाता है।
किसान हल की पूजा करते हैं
व्रतधारी महिलाएं घर में मूसल और हलछठ की बौर रखकर हलछठ महारानी की कहानी सुनती हैं। कथा वाचन के उपरांत व्रतधारी महिलाएं पूजन में अर्पित सामग्री का सेवन कर अपना व्रत खोलती हैं। गौरतलब है कि कृषि प्रधान भारत देश में हलषष्ठी का पर्व मनाया जाता है, इस दिन किसान अपने खेतों में हल की पूजा करते हैं और बलराम की जयंती को धूमधाम से मनाते हैं। भादों के महीने में खेतों में हरियाली रहती है। किसान बलदाऊ भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हमेशा उनके खेतों में हरियाली बनी रहे और वे धन धान्य से परिपूर्ण रहे।

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