प्रधानमंत्री मोदी का विपक्ष और आंदोलनजीवियों पर निशाना, कहा- ना खेलब ना खेले देइब… खेल बिगाड़ब, इनका यही मंत्र

0
4

नई दिल्‍ली। नए कृषि कानूनों के विरोध में सड़क से संसद तक जारी संग्राम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष खास तौर पर कांग्रेस पर करारा हमला बोला। साथी ही देशवासियों से आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों में फर्क करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने नए कृषि कानूनों के लाभ भी गिनाए। उन्‍होंने कहा कि 21वीं सदी में 18वीं सदी की सोच नहीं चल सकती। मौजूदा वक्‍त में कृषि को आधुनिक बनाना जरूरी है। बाजार के मुताबिक कृषि क्षेत्र में उत्‍पादन हो इसके लिए प्रयास करने ही होंगे।
किसानों का आंदोलन को मैं पवित्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं किसान भाइयों के आंदोलन को मैं पवित्र मानता हूं। भारत के लोकतंत्र में आंदोलन का महत्व है लेकिन जब आंदोलनजीवी पवित्र आंदोलन को अपने लाभ के लिए अपवित्र करने निकल पड़ते हैं तो देश ने देखा कि क्या होता है? मैं पूछना चाहता हूं कि आंदोलन में आतंकियों और नक्सलियों के रिहाई की मांग क्यों की जा रही है।
आंदोलनकारियों ने अपवित्र किया आंदोलन
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसानों के पवित्र आंदोलन को बर्बाद करने का काम आंदोलनकारियों ने नहीं, आंदोलनजीवियों ने किया है। दंगा करने वालों, सम्प्रदायवादी, आतंकवादियों जो जेल में हैं, उनकी फोटो लेकर उनकी मुक्ति की मांग करना, ये किसानों के आंदोलन को अपवित्र करना है।
सही बात कहने वालों से नफरत क्‍यों
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सही बात कहने में कोई बुराई भी नहीं हैं। लेकिन देश में एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके लोग सही बात कहने वालों से नफरत करते हैं। ये चीजों को सिर्फ बोलने में विश्वास रखते हैं। अच्छा करने मे उनको भरोसा ही नहीं है।
आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों में फर्क समझें
प्रधानमंत्री ने कहा कि तोड़फोड़ करने से आंदोलन कलंकित होता है। पंजाब में टेलिकॉम के टावरों को तोड़ा जा रहा है। आखिर इन टावरों को तोड़ने का किसान आंदोलन से क्या संबंध है। देश को आंदोलनकारियों और आंदोलनजीवियों में फर्क को समझना होगा।
खेलब ना खेले देइब, खेलिए बिगाड़ब
पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, एक पुरानी कहावत है खेलब ना खेले देइब, खेलिए बिगाड़ब। आज प्रगति के चक्‍के को रोकने के लिए यही चल रहा है। विपक्ष इसी मंत्र पर काम कर रहा है।
तरक्‍की के लिए प्राइवेट सेक्टर भी जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि देश का सामर्थ्य बढ़ाने में सभी का सामूहिक योगदान है। जब सभी देशवासियों का पसीना लगता है, तभी देश आगे बढ़ता है। देश के लिए पब्लिक सेक्टर जरूरी है तो प्राइवेट सेक्टर का योगदान भी जरूरी है। आज देश मानवता के काम आ रहा है तो इसमें प्राइवेट सेक्टर का भी बहुत बड़ा योगदान है।
कोरोना काल में भी नहीं थमने दिया विकास का पहिया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोरोना काल में भी सरकार ने विकास का पहिया नहीं थमने दिया। हम कृषि क्षेत्र के लिए नए कानून लेकर आए। नए कृषि कानूनों के तौर पर किसानों को एक वैकल्पिक व्‍यवस्‍था मिली है। इरादा नेक हो तो परिणाम अच्‍छे मिलते हैं। नए कृषि कानून किसानों के लिए बंधनकारी नहीं हैं। कृषि क्षेत्र में जितना निवेश बढ़ेगा, उतना ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। नए कानूनों से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव होंगे।
किसान रेल चलती-फिरती एक कोल्ड स्टोरेज
हमने कोरोना काल में किसान रेल का प्रयोग किया है। यह ट्रेन चलती-फिरती एक कोल्ड स्टोरेज है। दूसरा महत्वपूर्ण काम जो हमने किया है वो यही 10,000 FPOs बनाने का। ये छोटे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी ताकत के रूप में उभरने वाले हैं। महाराष्ट्र में FPOs बनाने का विशेष प्रयोग हुआ है। केरल में भी कम्युनिस्ट पार्टी के लोग काफी मात्रा में FPO बनाने के काम में लगे हुए हैं। ये 10,000 FPOs बनने के बाद छोटे किसान ताकतवर बनेंगे, ये मेरा विश्वास है।
परतंत्रता की दुर्गंध आती रहे यह ठीक नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि सरदार पटेल करते थे कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी यदि परतंत्रता की दुर्गंध आती रहे, तो स्वतंत्रता की सुगंध नहीं फैल सकती। जब तक हमारे छोटे किसानों को नए अधिकार नहीं मिलते तब तक पूर्ण आजादी की उनकी बात अधूरी रहेगी। मौजूदा वक्‍त में कृषि को आधुनिक बनाना जरूरी है। बाजार के मुताबिक कृषि क्षेत्र में उत्‍पादन हो इसके लिए प्रयास किए जाने चाहिए। छोटे किसानों को अधिकार मिलने चाहिए। कोई नहीं चाहता कि किसान गरीबी के दुष्‍चक्र में फंसा रहे।
21वीं सदी में 18वीं सदी की सोच सही नहीं
पीएम मोदी ने कहा कि नए कृषि कानून राजनीति का विषय नहीं… यह देश की भलाई के लिए। 21वीं सदी में 18वीं सदी की सोच नहीं चल सकती। किसानों को एक लंबी यात्रा के लिए तैयार होना होगा। हमने बीज से लेकर बाजार तक की व्‍यवस्‍था बदली है। सरकार की मंशा लोक कल्‍याण की है। हमारे यहां खेती समाज की संस्‍कृति का हिस्सा रहा है। हमारे पर्व, त्योहार सब चीजें फसल बोने और काटने के साथ जुड़ी रही हैं। हमारा किसान आत्मनिर्भर बने, उसे अपनी उपज बेचने की आजादी मिले, उस दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
अजीब तर्क दिया जा रहा- हमने मांगा नहीं तो आपने दिया क्यों
पीएम मोदी ने कहा कि मैं हैरान हूं पहली बार एक नया तर्क आया है कि हमने मांगा नहीं तो आपने दिया क्यों। दहेज हो या तीन तलाक, किसी ने इसके लिए कानून बनाने की मांग नहीं की थी, लेकिन प्रगतिशील समाज के लिए आवश्यक होने के कारण कानून बनाया गया। मांगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती है। देश की जरूरत के मुताबिक फैसले लिए जाने चाहिए। नए कृषि कानूनों के तौर पर किसानों को एक वैकल्पिक व्‍यवस्‍था मिली है।
पूछता हूं कि नए कानून ने क्‍या छीना तो जवाब नहीं मिलता
पीएम मोदी ने कहा कि कानून बनने के बाद किसी भी किसान से मैं पूछना चाहता हूं कि पहले जो हक और व्यवस्थाएं उनके पास थी, उनमें से कुछ भी इस नए कानून ने छीन लिया है क्या? इसका जवाब कोई देता नहीं है, क्योंकि सबकुछ वैसा का वैसा ही है। कानून लागू होने के बाद न देश में कोई मंडी बंद हुई, न एमएसपी बंद हुआ। ये सच्चाई है। इतना ही नहीं ये कानून बनने के बाद एमएसपी की खरीद भी बढ़ी है।
कानूनों में सुधार के लिए हरदम तैयार
प्रधानमंत्री मोदी ने नए कृषि कानूनों पर कहा कि यदि नए कृषि कानूनों में कोई कमी हो, यदि किसानों का कोई नुकसान हो, तो बदलाव करने में क्या जाता है। यदि कोई सुधार आता है तो हमें कोई संकोच नहीं है। कृषि सुधार का सिलसिला बहुत ही आवश्यक और महत्वपूर्ण है और बरसों से जो हमारा कृषि क्षेत्र चुनौतियां महसूस कर रहा है, उसको बाहर लाने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना ही होगा और हमने एक ईमानदारी से प्रयास किया भी है।
कांग्रेस सांसदों का हंगामा, पीएम बोले- अच्‍छा होता कंटेंट पर चर्चा करते
इस बीच कांग्रेस सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। खास तौर पर अधीर रंजन चौधरी तेज तेज आवाज में बोलने लगे तो पीएम मोदी ने कहा कि मैंने देखा कि यहां कांग्रेस के साथियों ने कृषि क़ानूनों पर चर्चा की, वो रंग पर तो बहुत चर्चा कर रहे थे कि काला है या सफेद है, परन्तु अच्छा होता अगर वो इनके इंटेंट पर और इसके कंटेंट पर चर्चा करते।
कांग्रेस के वॉकआउट पर तंज
बाद में लोकसभा से कांग्रेस सदस्‍यों ने वॉक आउट किया। इस पर प्रधानमंत्री मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी की आज हालत यह हो गई है कि राज्‍य सभा में उसका एक चक्‍का एक ओर चलता है तो लोकसभा में उसका दूसरा चक्‍का दूसरी ओर…
ये हंगामा एक सोची समझी साजिश का नतीजा
संसद में ये हो-हल्ला, ये आवाज, ये रुकावटें डालने का प्रयास, एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है। रणनीति ये है कि जो झूठ, अफवाहें फैलाई गई हैं, हंगामा करके उसे मजबूत करें ताकि कहीं उसका पर्दाफाश ना हो जाए। इसलिए हो-हल्ला मचाने का खेल चल रहा है। यह सच्‍चाई को रोकने के लिए हो रहा है। यह जो झूठ फैलाया गया है उसके लिए किया जा रहा है। कृषि कानूनों पर अफवाह फैलाई गई जिसका शिकार हमारे किसान भाई हुए।
अधीर रंजन चौधरी की टोकाटोकी पर तंज, आपकी मौजूदगी दर्ज हो गई
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी समेत कुछ कुछ विपक्षी संसद सदस्‍यों ने हंगामा किया तो पीएम मोदी ने मजाकिया लहजे में कहा कि मुझे एक मिनट का ब्रेक देने के लिए मैं आपका आभारी हूं। आपको जहां अपनी मौजूदगी दर्ज करानी थी वहां दर्ज हो गई होगी… प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि ये कृषि सुधार का सिलसिला बहुत ही आवश्यक और महत्वपूर्ण है और बरसों से जो हमारा कृषि क्षेत्र चुनौतियां महसूस कर रहा है, उसको बाहर लाने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना ही होगा और हमने एक ईमानदारी से प्रयास किया भी है।
कोरोना काल में भी देश ने हिम्‍मत नहीं हारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के बहुत सारे देश कोरोना, लॉकडाउन, कर्फ्यू के कारण चाहते हुए भी अपने खजाने में पाउंड और डॉलर होने के बाद भी अपने लोगों तक नहीं पहुंचा पाए। लेकिन ये हिंदुस्तान है जो इस कोरोना कालखंड में भी करीब 75 करोड़ से अधिक भारतीयों को 8 महीने तक राशन पहुंचा सकता है। कोरोना से दुनिया हिली लेकिन भारत बचा रहा। कोरोना काल में डॉक्टर और नर्स भगवान बनकर आए। कोरोना काल में ऐम्बुलेंस का ड्राइवर भी ईश्‍वर के रूप में आया। हम उनकी जितनी प्रशंसा करें, जितना गौरवगान करेंगे, उससे हमारे भीतर भी नई आशा पैदा होगी।
सर्वे भवन्तु सुखिन: के हैं हमारे संस्‍कार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे लिए संतोष और गर्व का विषय है कि कोरोना के कारण कितनी बड़ी मुसीबत आएगी इसके जो अनुमान लगाए गए थे कि भारत कैसे इस स्थिति से निपटेगा। ऐसे मैं ये 130 करोड़ देशवासियों के अनुशासन और समर्पण ने हमें आज बचा कर रखा है। इसका गौरवगान हमें करना चाहिए। भारत की पहचान बनाने के लिए ये भी एक अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिन संस्कारों को लेकर हम पले-बढ़े हैं, वो हैं- सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया। कोरोना कालखंड में भारत ने ये करके दिखाया है। भारत ने इस आपदा में दुनिया के कई मुल्‍कों की मदद की है।
– पीएम मोदी ने कहा कि हमारे लिए जरूरी है कि हम आत्मनिर्भर भारत के विचार को बल दें। ये किसी शासन व्यवस्था या किसी राजनेता का विचार नहीं है। आज हिंदुस्तान के हर कोने में वोकल फ़ॉर लोकल सुनाई दे रहा है। ये आत्मगौरव का भाव आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत काम आ रहा है।
– पीएम मोदी ने कहा कि आज जब हम भारत की बात करते हैं तो मैं स्वामी विवेकानंद जी की बात का स्मरण करना चाहूंगा। हर राष्ट्र के पास एक संदेश होता है, जो उसे पहुंचाना होता है, हर राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे हासिल करना होता है, हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे वो प्राप्त करता है।
– प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोग ये कहते थे कि भारत एक चमत्कारिक लोकतंत्र है। हमने इस भ्रम को हमने तोड़ा है। लोकतंत्र हमारी रगों और सांस में बुना हुआ है, हमारी हर सोच, हर पहल, हर प्रयास लोकतंत्र की भावना से भरा हुआ रहता है।
– पीएम मोदी ने कहा कि देश जब आजाद हुआ, जो आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे, वो आखिरी तक यही कहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा। लेकिन भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा। विश्व के लिए आज हम आशा की किरण बनकर खड़े हुए हैं।
– प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट काल में देश ने अपना रास्ता चुना और आज हम दुनिया के सामने मजबूती से खड़े हैं। इस दौरान भारत सभी भ्रमों को तोड़कर आगे बढ़ा है। आत्‍मनिर्भर भारत ने एक के बाद एक कदम उठाए हैं। यही नहीं भारत ने दुनिया के बाकी देशों की भी मदद की है।
– प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्‍मनिर्भर भारत ने एक के बाद एक कदम उठाए हैं। यही नहीं भारत ने दुनिया के बाकी देशों की भी मदद की है। देश जब आजाद हुआ, जो आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे, वो आखिरी तक यही कहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा। लेकिन भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा। विश्व के लिए आज हम आशा की किरण बनकर खड़े हुए हैं।
– प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति जी का भाषण भारत के 130 करोड़ भारतीयों की संकल्प शक्ति को प्रदर्शित करता है। विकट और विपरीत काल में भी ये देश किस प्रकार से अपना रास्ता चुनता है, रास्ता तय करता है और रास्ते पर चलते हुए सफलता प्राप्त करता है, ये सब राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कही।
– प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने संकट काल में अपना रास्‍ता चुना। हम जल्द आजादी के 75 साल पूरे करने वाले हैं। 75 वर्ष का पड़ाव गर्व करने और आगे बढ़ने का मौका होगा। आजादी के 75वें साल में हमें नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ना है।
आंदोलनजीवियों से बचें
बीते दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने राज्‍यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपने संबोधन में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के पीछे हित साध रहे कुछ कथित आंदोलनकारियों और अपनी सियायत चमकाने में लगे राजनीतिक दलों पर करारा हमला बोला था। प्रधानमंत्री मोदी ने निहित स्वार्थ के कारण आंदोलन में शामिल नेताओं को ‘आंदोलनजीवी’ करार देते हुए इनसे बचने की सलाह दी। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयानों का उल्लेख करते हुए कृषि कानूनों को लेकर कांग्रेस पर यूटर्न का आरोप भी लगाया था।
एमएसपी थी, है और रहेगी
प्रधानमंत्री ने सोमवार को किसान आंदोलन के जरिये देश के अंदर और बाहर सरकार विरोधी हवा बनाने वाले लोगों की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया। साथ ही किसानों को भरोसा दिया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) था, है और रहेगा। लिहाजा किसान भाइयों को आंदोलन खत्म कर उन सभी मुद्दों के साथ आना चाहिए, जिन्हें लेकर आशंका है। सरकार उन्हें दुरुस्त करेगी। प्रधानमंत्री की बातों का एक संकेत यह भी है कि कानूनों को लेकर सरकार कदम पीछे नहीं खींचेगी।
‘मोदी है तो मौका लीजिए’
राज्‍यसभा में अपने संबोधन के अंत में विपक्ष के हमलों पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने चुटकी ली। उन्होंने कहा, ‘कोरोना के कारण ज्यादा आना-जाना होता नहीं होगा। घर में भी खींचतान चलती होगी। इतना गुस्सा यहां निकाल दिया तो आपका मन कितना हल्का हो गया। ये आनंद आपको जो मिला है, इसके लिए मैं काम आया, ये भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। मैं चाहता हूं कि आप ये आनंद लेते रहिए। चर्चा करते रहिए। सदन को जीवंत बनाकर रखिए। मोदी है तो मौका लीजिए।’
गुलाम नबी की तारीफ, कांग्रेस पर निशाना
अपने संबोधन के दौरान जम्मू-कश्मीर में चुनाव की सराहना करने पर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की प्रशंसा भी की। मोदी ने कहा, ‘गुलाम नबी ने पंचायत और ब्लॉक चुनावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर उन्हें बहुत प्रिय है, जैसे हर भारतीय को है। हमारा प्रयास है कि जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बनाया जाए।’ मोदी यहीं नहीं रुके। गुलाम नबी की तारीफ के बहाने उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा था।
हरित क्रांति को लेकर भी फैलाई गई थीं भ्रांतियां
पीएम ने कहा कि हरित क्रांति के समय भी ऐसी ही आशंकाएं व भ्रांतियां फैलाई गई थीं। पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के समय कोई कृषि मंत्री बनने को तैयार नहीं था। वामपंथी दल उस समय भी इसी तरह विरोध कर रहे थे। कांग्रेस को अमेरिका का एजेंट कहा जा रहा था। लेकिन उसी हरित क्रांति का फल है कि पीएल-480 योजना के विलायती अनाज से पेट भरने वाला भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो गया।

LEAVE A REPLY