माता रानी के स्वागत को तैयार घर-मंदिर

0
9

-चैत्र नवरात्र आज से ,शक्तिपीठों में तैयारी पूरी
ग्वालियर : चैती माह के वासंतिक नवरात्र का अनुष्ठान शुक्रवार को कलश स्थापन से आरंभ होगा। भक्त इस दिन भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की उपासना करेंगे। कलश स्थापन को लेकर शक्तिपीठ व देवी मंदिरों में तैयारी आरंभ हो गयी है। भागवताचार्य पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त में कलश स्थापन का अनुष्ठान आरंभ होगा।
इसके साथ ही मांडरे वाली माता ,सनातन धर्म माता मंदिर , गोविन्द पुरी माता मंदिर ,श्री बालाजी धाम मंदिर ,गरगज हनुमान मंदिर वाली माता मंदिर के साथ अन्य देवी मंदिरों में भी कलश स्थापन की तैयारी पूरी हो गयी है। इतना ही नहीं नवरात्रि के दौरान होने वाले नवाह परायण व दुर्गा सप्तशती पाठ की तैयारियां भी अधिकतर मंदिरों में की गयी है। चैत्र नवरात्र को लेकर वातावरण भक्तिमय हो गया है़।

बाजार में फलाहार की बहार
नवरात्र की शुरुआत के लिए बाजार में फलाहार की बहार है। व्रत की नमकीन, चौलाई के लड्डू, साबूदाने के व्यंजन और फलों की खूब बिक्री हो रही है। श्रद्धालुओं ने पूजा से संबंधित सामान, नारियल, माता की चुनरी, धूप दीप, फल, फूल खरीद लिए हैं।

घट स्थापना का समय
इस साल चैत्र नवरात्र रविवार 18 मार्च से शुरू हो रहे हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्र से ही नए साल की शुरुआत होती है। साल में चार नवरात्रि होते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्र होते हैं। चैत्र और आश्विन नवरात्र का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस बार अष्टमी और नवमी एक ही दिन 25 मार्च को होगी।

घट स्थापना मुहूर्त:
प्रातः 06:45 से प्रातः 07:45 तक। (प्रातः कालीन)
दिन 11:17 से दिन 12:17 तक। (मध्यान कालीन)

ऐसे करें कलश स्थापना
कलश स्थापना करने से पहले पूजा स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाना चाहिए, पूजा में सभी देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। कलश में सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी एवं मुद्रा रखी जाती है और आम के पांच या सात पत्तों से कलश को सजाया जाता है, मध्य में नारियल को लाल चुनरी से लपेट कर रखा जाता है। इस कलश के नीचे जौ बोए जाते हैं, जिनकी दशमी तिथि पर कटाई की जाती है। मां दुर्गा की प्रतिमा पूजा स्थल के मध्य में स्थापित की जाती है।
व्रत का संकल्प लेने के बाद, मिट्टी की वेदी बना कर जौ बोया जाता है। इसी वेदी पर घट यानी कलश स्थापित किया जाता है। इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। पाठ पूजन के समय अखंड दीप जलाया जाता है, जो व्रत के पूर्ण होने तक जलता रहना चाहिए।कलश स्थापना के बाद श्री गणेश और मां दुर्गा जी की आरती से नौ दिनों का व्रत प्रारंभ किया जाता है। कुछ लोग पूरे नौ दिन तो यह व्रत नहीं रख पाते हैं, परंतु आरंभ में ही यह संकल्प लिया जाता है कि व्रत सभी नौ दिन रखने हैं अथवा नौ में से कुछ ही दिन व्रत रखना है।
—————————-और इधर ————————————————————
शनि के प्रकोप से बचने लोगों ने की प्रार्थना
ग्वालियर। शनी अमावस्या पर मुरैना के ऐंती गांव (पर्वत)पर स्थित शनि पर्वत पर बने शनि मंदिर पर लाखों की सं या में भक्त दर्शन पूजा कर शनि के प्रकोप से बचने के लिए प्रार्थना करते हैं। आज शनीचरी अमावस्या पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु बसों चार पहिया दुपहिया वाहनों रेल से ऐंती पर्वत पहुंचे। यहां पहुंच कर श्रद्धालुओं ने जहां सरसों के तेल से भगवान शनि का अभिषेक किया वहीं पूजा अर्चना कर शनि के प्रकोप की शांति के लिए प्रार्थना की।
शनिचरी अमावस्या पर प्रत्येक श्रद्धालु शनि पर्वत पर स्थापित प्रतिमा के दर्शन करने के साथ ही उस पर तेल चढाने का प्रयास करता है। इसके लिए व्यवस्था बनाए रखने शनि मंदिर पर मूर्ति पर बाहर की तरफ चार रेप्लिका बनाई गई हैं। इसी रेप्लिका में भक्त तेल चढ़ाते हैं। यही तेल अपने आप फिल्टर होकर शनि महाराज की मुख्य प्रतिमा में पहुंचता है और फिर सीधे अंडर ग्राउंड बने टैंक में एकत्र हो जाता है। बताया जाता है कि शनि अमावस्या पर करीब 4500 लीटर तेल यहां मंदिर के नीचे बने टेंक में एकत्र होता है।उधर देर रात में ही बाहर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर डेरा जमा लिया था। इन लोगों ने रात स्टेशन पर गुजारी और सुबह रेल से भगवान शनि के मंदिर रेल से पहुंच कर पूजा अर्चना की। उधर शनि मंदिर पर इस बार नाई के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी। कई लोग अपने बाल मुंडवाने मंदिर पहुंचते हैं। वहीं महिलाओं और पुरूषों को नहाने के लिए अलग अलग व्यवस्था की गई थी। शनि मंदिर पर जहां संभागायुक्त चंबल डॉ. एमके अग्रवाल , कलेक्टर भास्कर लक्ष्कार ने भी पहुंच कर पूजा अर्चना की। वहीं पुलिस ने भी सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की थी। उधर ग्वालियर में अनेक शनि मंदिरों एवं अन्य मंदिरों पर जहां भंडारे आयोजित किये गये। वहीं अनेकों पर देर रात तक श्रद्धालू पूजा अर्चना करने पहुंचते रहे। लोगों ने कुछ मंदिरों पर शर्बत की व्यवस्था भी की।

LEAVE A REPLY