शिवराज और सिंधिया के लिए 2018 का सेमीफाइनल है MP का ये उपचुनाव

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भोपाल : मध्य प्रदेश के कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग हो रही है. 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के लिए उपचुनाव के नतीजे बहुत अहम हैं, क्योंकि उपचुनाव से यह साफ हो जाएगा कि जनता का साथ किसे मिलेगा. दोनों विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे 28 फरवरी को आएंगे.
मध्य प्रदेश के मौजूदा सीएम शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए उपचुनाव 2018 के विधानसभा चुनाव के सेमीफाइल से कम नहीं है. यही वजह है कि चुनाव आयोग ने जब उपचुनाव की तारीख का ऐलान भी नहीं किया था, उसके पहले से ही शिवराज सिंह चौहान और सिंधिया चुनाव की तैयारियों में जुट गए थे.
सूत्रों का कहना है कि सिंधिया के लिए ये उपचुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये दोनों सीटें उनके संसदीय क्षेत्र गुना में पड़ती हैं. इसलिए यहां कांग्रेस की जीत उनके लिए प्रतिष्ठा का विषय है. इसके अलावा, अगले चुनाव को लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के सामने खुद को सीएम कैंडिडेट के रूप में मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं. ऐसे में दोनों सीटों के उपचुनाव में जीत हासिल करना उनके लिए बेहद जरूरी है.
उपचुनाव में हार से सीएम कैंडिडेट की दावेदारी पर पड़ेगा असर
दोनों में से एक भी सीट पर हार का असर उनकी सीएम कैंडिडेट की दावेदारी पर पड़ सकता है. अगर ऐसा हुआ, तो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इसका फायदा ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के महासचिव दिग्विजय सिंह, विपक्ष नेता अजय सिंह और राज्य के प्रभारी अरुण यादव को होगा. 2018 के विधानसभा चुनाव में इन तीनों नेताओं की दावेदारी मजबूत होगी.
शिवराज के लिए भी जरूरी है उपचुनाव में जीत
अगर बात करें शिवराज सिंह चौहान की, तो सूत्रों के मुताबिक, चौहान के लिए विधानसभा चुनाव के मुकाबले उपचुनाव भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं. इसलिए उनके नेतृत्व में बीजेपी सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में हाई वोल्टेज कैंपेन कर रही है. चौहान वो सब कुछ कर रहे हैं, जो उपचुनाव में बीजेपी की जीत को मजबूत बनाती हो.
इसी रणनीति के तहत शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर के नारायण सिंह कुशवाहा को कैबिनेट में शामिल किया. कई बार अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा किया. गांवों में रातें भी गुजारी और गांवों में अगले पांच महीने के दौरान कई विकासात्मक कार्य कराने का वादा किया. कोलारस के किरार समुदाय को लुभाने के लिए भी शिवराज ने कई ऐलान किए हैं.
कहीं पासा उल्टा न पड़ जाए
बीजेपी राज्य यूनिट का मानना है कि अगर दोनों सीटों पर हो रहे उपचुनाव में पार्टी को जीत नहीं मिलती है, तो चित्रकूट और अटर उपचुनाव के बाद ये उनकी लागातार चौथी हार होगी. इसके बाद पार्टी हाईकमान कुछ कठोर फैसले भी ले सकती है. लिहाजा चौहान कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. यही वजह है कि जनवरी में शिवराज सिंह चौहान ने में कोलारस में अपने बड़े बेटे कार्तिकेय को भी चुनाव प्रचार अभियान में उतारा था.
सूत्रों का कहना है कि उपचुनाव में जीत शिवराज सिंह और उनकी टीम के लिए नई ऊर्जा का संचार करेगी. उपचुनाव की जीत से अगले विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी का मनोबल भी बढ़ेगा.
चुनाव प्रचार थमने के बाद भिड़ गए थे बीजेपी-कांग्रेस समर्थक
बता दें कि कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने जोर-शोर से प्रचार किया. लेकिन, गुरुवार रात चुनाव प्रचार थमने के बाद रुपये बांटने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए. बीजेपी ने मुंगावली के कांग्रेस कैंडिडेट बृजेंद्र सिंह यादव की पैसे बांटते हुए फोटो जारी कर शिकायत की. वहीं, कोलारस में कांग्रेसियों ने भिंड के बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा पर पैसे बांटने का आरोप लगाया है. कांग्रेस ने भोपाल और नई दिल्ली में चुनाव आयोग से इसकी शिकायत भी की है.बहरहाल, बीजेपी और कांग्रेस को उपचुनाव के नतीजों का इंतजार है. देखना दिलचस्प होगा कि दोनों पार्टियों में से जनता किसके पक्ष में फैसला देती है.

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