रिटर्न में झोल: कारोबार और कमाई का मिलान करेगी सरकार

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नई दिल्ली।जीएसटी रिटर्न में बेहद कम कारोबार दिखाकर कर बचाने वालों पर सरकार ने नजरें गड़ा दी हैं। वित्त मंत्रालय जल्द ही जीएसटी रिटर्न में दिखाए गए टर्नओवर और आयकर विभाग के पास मौजूद कमाई के आंकड़ों का मिलान शुरू करने वाला है, ताकि कर चोरी रोककर वसूली बढ़ाई जा सके। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि यह कवायद वित्तीय वर्ष 2018-19 की दूसरी छमाही से शुरू हो जाएगी।

इसका उद्देश्य जीएसटी के तहत कर वसूली को प्रति माह एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। अधिकारी ने संकेत दिया है कि सरकार की प्राथमिकता अब कमाई और कारोबार के डाटा मिलान पर और ईवे बिल को जल्द से जल्द लागू करने की है। उन्होंने कहा कि जीएसटी रिटर्न भरने की व्यवस्था स्थिर होने के बाद नए वित्तीय वर्ष से डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एनालिटिक्स एंड रिस्क मैनेजमेंट (डीजीएआरएम) निगरानी काम शुरू हो जाएगा। जीएसटी रिटर्न का आयकर रिटर्न के डाटाबेस से मिलान किया जाएगा।
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अधिकारी का कहना है कि अगर वित्त मंत्रालय की एजेंसियां सही तरीके से निगरानी करती हैं तो कर वसूली बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान की आवाजाही की पर्याप्त निगरानी नहीं हो पाती है और ईवे बिल स्टॉक और उपभोग की निगरानी कर इसकी खामियों को दूर कर पाएगा। ईवे बिल दस किलोमीटर से ज्यादा दूरी और 50 हजार रुपये से ज्यादा कीमत के सामान की आवाजाही के लिए जरूरी होगा।
सोने के बढ़ते आयात पर गंभीर सरकार
सरकार सोने के लगातार बढ़ते आयात पर भी गंभीर है। एक अधिकारी ने कहा कि आयात शुल्क दस फीसदी बढ़ने के बावजूद प्रति माह सोने का आयात बढ़ता जा रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद राजस्व विभाग की खुफिया एजेंसियां इसकी मांग और आपूर्ति से जुड़ा रिकॉर्ड तलब कर सकती हैं। इस पर 12.5 फीसदी प्रतिकारी शुल्क पहले था, जो जीएसटी में समाहित हो गया है। अभी इस पर तीन फीसदी जीएसटी है।

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