165 कुण्डीय यज्ञ …ददरौआ धाम पर उमड़ी भक्तों की भीड़,शामिल हुए उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री

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ग्वालियर। शनिवार को उद्वव और गोपियों के बीच हो रहे संवाद के संस्मरण को सुनाते हुए व्यास गद्दी पर विराजमान ब्रहम्चारी परमानंद महाराज ने बताया कि लोग संसार में अपनी जरूरतों के लिये,अपने परिवार पुत्र-पुत्रियों व लालसाओं की पूर्ति के लिये सदैव रोते रहते हैं, वे सिर्फ भौतिक और संसारिक गतिविधियों की प्रति पूर्ति में लगे रहते हैं। लेकिन फिर भी उनके रोने का अंत नहीं होता है। उनका सारा जीवन रोते रोते ही बीत जाता है। लेकिन उनका रोना यदी उन्नत होकर प्रभु की भक्ति में लीन हो जाता है।
वे सब कुछ प्रभु के भरोसे छोड़कर केवल उन्हीं के प्रति समर्पित होकर रहते हैं तो उनकी सभी परेशानियों का अंत प्रभु स्वयं कर देते हैं। जिस प्रकार गोपियां सब कुछ भूलकर प्रभु की याद में आंसू बहा रही हैं और यह अवधि सात माह से भी अधिक हो गयी है लेकिन फिर भी प्रभु से भेंट नहीं हुई है तब भी गोपियों ने प्रभु के प्रति अपनी आस्था व समर्पण नहीं छोड़ी है इसका आभास उद्वव को भी है। इसलिये वे गोपियों की व्यथा प्रभु को बड़े ही भावपूर्ण तरीके से बताते हैं। कि प्रभु आपकी याद में गोपियों की आंखों में जो आंसू है उन आंसुओं के कारण उनका जीवन सार्थक हो गया है। इसी कथा के प्रसंग को आगे बड़ाते हुए प्रेमानंद महाराज ने बताया कि इसी प्रकार जब रूकमणी जी का विवाह उनके भाई ने शिशुपाल से करना चाह तो रूकमणी जी ने दुखी होकर प्रभु का सिमरण किया तो प्रभु ने उनकी पुकार सुनते हुए स्वयं राक्षसों के बीच जाकर उनका हरण कर उन्हें संकट से बाहर निकाला और उन्हें अपना बना लिया।
इसी प्रकार भौमासुर कथा का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भौमासुर वह शरीर है जिसे व्यक्ति अपना मान लेता है और फिर इस शरीर से अधर्म,दुराचार और पापाचार आदि करता है तो फिर उसका संकटों में घिरना तय है। लेकिन इसी शरीर के माध्यम से जब शुभ कार्य किये जाते हैं लोगों की भलाई में इस जीवन को लगाया जाता है तो फिर इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं है।

गुरूजी से आशीर्वाद लिया
शनिवार को ददरौआ धाम में चल रहे 165 कुण्डीय रूद्र महायज्ञ में गुरूजी से आशीर्वाद लेने के लिये उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोसियारी विशेष रूप से ग्वालियर आये और यहां आकर गुरूजी से आशीर्वाद व ज्ञान प्राप्त कर यज्ञशाला की परिक्रमा की। इसके साथ ही लाल टिपारा स्थित गौशाला का भी भ्रमण किया। गौशाला भ्रमण के दौरान गौशाला का प्रबंधन संभाल रहे गौ-सेवकों व प्रबंधन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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