चंद्रग्रहण 31 को : साल का पहला ग्रहण शाम को 5.18 से शुरू होगा

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-सुबह होते ही कर लें भगवान के दर्शन ,सुबह 8.18 बजे बंद होंगे मंदिरों के पट
ग्वालियर : 31 जनवरी माघ पूर्णिमा के दिन साल 2018 का पहला ग्रहण लगने जा रहा है। ग्रहण का सूतक सूर्योदय के साथ ही लग जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह ग्रहण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहण के समय चन्द्रमा के पृथ्वी से बेहद नजदीक आने के कारण उसका आकार सामान्य से कुछ बड़ा दिखाई देगा तथा ग्रहण के पूर्णग्रास के समय वह कुछ लाल रंग का भी दृष्टिगोचर होगा।
भागवताचार्य व ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि यह चंद्र ग्रहण समस्त भारत के साथ आस्ट्रेलिया, एशिया, उत्तर पूर्वी यूरोप, पूवरेत्तर अफ्रीकी देशों, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के उत्तर पूर्वी भाग, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका एवं आर्कटिक में दिखाई देगा। यह खग्रास चंद्र ग्रहण पूरे भारत में दिखेगा।उन्होंने बताया कि धर्मशास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक स्पर्श काल से नौ घंटे पूर्व ही लग जाता है। ग्रहण के सूतक काल में मूर्ति पूजन वर्जित है। ग्रहण काल में भोजन, शयन, यात्ररंभ, नव कार्यारंभ एवं मल मूत्र उत्सर्जन भी शास्त्र के अनुसार नहीं करना चाहिए ।

ग्रहण की समाप्ति पर करें स्नान
ग्रहण की समाप्ति के उपरांत स्नान दान आदि धर्मकार्य करना चाहिए। यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो पवित्र नदियों के स्मरण के साथ स्नान करने से भी विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पुष्य, आश्लेषा नक्षत्र व कर्क राशि के जातकों पर विशेष प्रभाव-
पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि इस चंद्र ग्रहण का स्पर्श पुष्य नक्षत्र में तथा मोक्ष आश्लेषा नक्षत्र में होगा। अत: पुष्य नक्षत्र, आश्लेषा नक्षत्र व कर्क राशि के जातकों पर ग्रहण का विशेष प्रभाव मिलेगा। उपरोक्त नक्षत्र व राशि वालों को ग्रहण दर्शन से परहेज करना श्रेयस्कर रहेगा।

ग्रहण कुल 3 घंटा 23 मिनट रहेगा
साल का पहला चंद्रग्रहण 31 जनवरी को लगने वाला है। माघी पूर्णिमा के दिन लगने जा रहे इस ग्रहण का प्रारंभ शाम 5 बजकर 18 मिनट से होगा। ग्रहण का मध्य 7 बजे और मोक्ष रात 8 बजकर 14 मिनट पर होगा।

ग्रहण का प्रभाव
-ग्रहण काल में चंद्र दर्शन से परहेज करें।
-यथासंभव घर के अंदर ही रहें।
-ग्रहण काल में शयन न करें।
-भगवान का ध्यान भजन व मंत्र जप करें।
-चाकू या हंसिया के प्रयोग से परहेज करें।
-क्रोध व व्यर्थ की चिंता से बचें। प्रसन्न रहें।

जानें, क्या प्रभाव पड़ेगा आपकी राशि पर
मेष : सामान्यत: प्रतिकूल, असंतोषप्रद।
वृष : लाभकारी व सफलताप्रद।
मिथुन : सम्मान को ठेस, अशांतिप्रद।
कर्क : कष्टप्रद, धन हानि, क्षतिप्रद।
सिंह : सामान्यत: कष्टकारक, व्ययप्रद रहेगा।
कन्या : धनलाभ, सुख साधनों का विकास होगा।
तुला : सुखोन्नति, लाभकारी।
वृश्चिक : असंतोषप्रद, सम्मान में कमी महासूस होगी।
धनु : प्रतिकूलताप्रद, कष्टप्रद, अशांतिप्रद रहेगा।
मकर : परिजन को कष्ट, सुख में बाधा महसूस होगी।
कुम्भ : उत्तम फलप्रद, प्रिय से खुशी।
मीन : बाधाकारक, चिंताप्रद।

ग्रहण काल में हवन का विशेष महत्व
ग्वालियर : हिन्दू धर्म में ग्रहण को प्रमुख खगोलीयए ज्योतिषीय घटना माना जाता है और ग्रहण का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। ग्रहण काल में किये गए जपए तपए ध्यानए दान आदि का अनंत पुण्य मिलता है ए पापो का नाश होता है।
हमारे ऋषि मुनियोंए ज्योतिषियों ने कई ऐसे उपाय बताये है जिन्हे करने से ग्रहण का कोई भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है,सर्व कार्य सिद्ध होते है।
ज्योतिषियों के अनुसार चन्द्र ग्रहण का प्रभाव १०८ दिनों तक रहता है अतरू जिन राशियों पर इसका प्रभाव हो उन्हें विशेष रूप से चन्द्र ग्रहण के समय जप और दान करना चाहिए ।हमारे धर्म और ज्योतिष के अनुसार ग्रहण का प्रभाव शुभ नहीं माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पूर्णिमा के दिन समुद्र ज्वार आता ही है। समुद्री हलचल होती ही है जिसके परिणाम स्वरूप प्राकृतिक आपदाएँ आने की प्रबल संभावनाएँ भी होती हैं।
काल के दौरान व्यक्तियों को यथा संभव घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण के दर्शन करने चाहिए। गर्भवती महिलाओं के तो ग्रहण का दर्शन बिलकुल ही त्याज्य है।
चन्द्र ग्रहण को ज्योतिष के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। चन्द्र ग्रहण के समय चन्द्र देव की पूजा करने का विधान है। मत्स्य पुराण में कहा गया है कि ग्रहण काल के दौरान सभी व्यक्तियों को श्वेत पुष्पों और चन्दन आदि से भगवान चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए।

समय परिवर्तन
ग्वालियर : दंदरौआ धाम शताब्दीपुरम में आयोजित 165 कुंडीय रूद्र महायज्ञ में 31 जनवरी चंद्र ग्रहण वाले दिन सुबह में 5:00 बजे से पूजन और दोपहर 12 बजे से हवन का कार्यक्रम होगा। इस दिन किया गया अनुष्ठान का फल 1 लाख गुना अधिक होता है।

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