165 कुण्डीय रूद्र महायज्ञ …दान,सत्संग से मिट जाती हैं परेशानियां

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ग्वालियर। 165 कुण्डीय रूद्र महायज्ञ और श्रीमद् कथा दद्रौआ धाम में बह रही है भक्ति की गंगा का पुण्य लाभ उठाने के लिये कथा स्थल पर लोगों की संख्या लगातार बड़ रही है। 84 कोस की परिक्रमा का लाभ धर्मप्रेमी जन यज्ञ क्षेत्र की परिक्रमा करके उठा रहे हैं।
कथा के तीसरे दिन कथा व्यास की गद्दी पर विराजमान ब्रहम्चारी प्रेमानंद महाराज ने कथा के प्रेम मयी प्रंसगों से उपस्थित कथा रसिकों को भाव-विभोर कर दिया। कथा व्यास जी ने श्रीमद् भागवत कथा के महत्व को समझाते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का श्रृवण करने से समस्त प्रकार के कष्टों का निवारण हो जाता है, और जो व्यक्ति कथा के साथ साथ दान,सत्संग आदि में नियमित रूप से सहभागिता करता है, ऐसे व्यक्ति को जीवन में कभी किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर यज्ञशाला में चले रहे यज्ञ में गाय के शुद्ध देशी घी के साथ यज्ञ सामग्री से दी जा रही आहुतियां, शहर के वातावरण को शुद्ध तो करेंगी ही, वहीं इस यज्ञ से क्षेत्र में सुख समृद्धि आयेगी। इस यज्ञ से लोगों में गौ रक्षा, गौ सेवा और मानव रक्षा की भी भावना जाग्रत होगी।

यज्ञ में ख़ास
यज्ञ में प्रतिदिन पांच लाख महामृत्युंजय मंत्र, 11हजार गायत्री मंत्र, 108 आवृत्ति श्रीसूक्त,108 पुरूष शूक्त तथा लिंग पुराण का अनुष्ठान हो रहा है। इस यज्ञ में उपयोग होने वाली सामग्रियों की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा गया है- जिसमें भारतीय मूल की देशी गौ माता का शुद्ध घी, आॅर्गेनिक तिल आदि का उपयोग किया जा रहा है। यज्ञ में ब्राह्मणों की मंत्र शुद्धि का विशेष ध्यान रखा गया है। यजमान व ब्राहम्ण भारतीय परिधान धोती, अंगवस्त्र व साड़ी आदि का ही उपयोग किया जा रहा है। यज्ञ में ग्वालियर के बाहर से आये हुए लोगों के आवास-भोजन आदि का प्रबंध किया गया।
यह संपूर्ण आयोजन महामण्डलेश्वर संतश्री रामदास महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी ईश्वरदास महाराज, स्वामी अच्युतानंद महाराज, स्वामी पुष्करानंद महाराज, मंशापूर्ण हनुमान मंदिर के पुजारी पं. गोपाल दूबे, गौरव महाराज की उपस्थिति में हो रहा है।

तुषमुल ने लिया आशीर्वाद
यज्ञ में राज्यसभा सांसद प्रभात झा के सुपुत्र तुषमुल झा ने दद्रौआ धाम पंहुचकर यज्ञवेदी पर मत्था टेका और महाराज से आशीर्वाद लिया। यह संपूर्ण आयोजन श्रीकृष्णायन देशी गौ रक्षा एवं गौ लोक धाम सेवा समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसके संस्थापक एवं अध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी ईश्वरदास महाराज हैं जो कि यज्ञ के मुख्य यजमान भी हैं।

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