श्रीराम कथा :जनु सरि तीर तीर बन बागा…

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माँ कनकेश्वरी देवी ने कहा –
-सभी धर्म ग्रंथों को गुरु मानना चाहिए
-जीवन में रामकथा अनिवार्य.
-कथा में आदरपूर्वक स्नान से हृदय में विद्यमान पाप मिटते हैं
-कथा काम, क्रोध, मद, मोह का नाश व निर्मल ज्ञान, वैराग्य बढ़ता है
-रामकथा विद्वानों को विश्राम देती है
ग्वालियर : मुरार के श्रीराम लीला मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन आरंभ में मुख्ययजमान केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की धर्मपत्नि किरण सिंह, पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह ‘रामू’, बहिन मंजू सिंह, पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह, सुनील खंडूजा आदि ने पोथी पूजन किया ।
तदुपरांत राष्ट्रसंत कनकेश्वरी देवी ने श्रीरामचरितमानस की महत्ता बताते हुये कहा कि-
“मानस मूल मिली सुरसरिहि ।
सुनत सुजन मन पावन करिहि ।।
बिच बिच कथा विचित्र विभागा ।
जनु सरि तीर तीर बन बागा”।।
उन्होंने कहि कि तुलसीदासइस कहते हैं कि-कीर्तिरुपी सरयू का मूल मानस श्रीरामचरितमानस है, जो रामभक्ति रुपी गंगाजी में जाकर मिलती है, इसलिए यह इस पंडाल में सुननेवाले श्रोताओं के मन को पवित्र कर देगी ।
श्रीराम कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा-
‘काम कोह मद मोह नसावन ।
बिमल विवेक बिराग बढ़ा्न ।।
सादर मज्जन पान किए तें ।
मिटहिं पाप परिताप हिए तें ।।
यह कथा जल काम, क्रोध, मद और मोह का नाश करनेवाली और निर्मल ज्ञान व वैराग्य को बढ़ाने वाली है. इसमें आदरपूर्वक स्नान करने और रामरस पीने से हृदय में विद्यमान सब पाप मिट जाते हैं ।
उन्होंने कहा- जीवन में रामकथा अनिवार्य है ।रामकथा राम को प्रतिपादित करने के लिए है, खुद को प्रतिपादित करने के लिए नहीं है ।राम से विमुख होना ही दुख का कारण है ।
रामकथा से मनोकामना पूरी होती है । कामनायें नष्ट होती हैं । रामथा विद्वानों को विश्राम देती है ।
उन्होंने तुलसीदास जी की एक चौपाई सुनाई-
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई ।
गोपद सिंधु अनल शितलायी ।
माँ कनकेश्वरी ने कहा- आजकल के वातावरण में लोग भ्रमित हैं । ग्रंथ में जो है, वह गुरुवचन है । हमें कलयुग में श्रीमदभागवत, श्रीरामायण, वेद, कुरान, गुरुग्रंथ साहिब आदि ग्रंथों को गुरु मानना चाहिए ।

इन्होंने की आरती
केन्द्रीय मंत्री श्रीनरेन्द्र सिंह तोमर की धर्मपत्नि किरण सिंह, बहिन मंजू सिंह, दोनों पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह ‘रामू’, प्रबल प्रताप सिंह ‘रघु’, पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह, जय सिंह कुशवाह, वीरेन्द्र जैन, बाबूलाल जोशी,सुरेश गौड़, आशीस अग्रवाल आदि ने आज कथा प्रारंभ होने के पूर्व, तथा कथा समापन पर श्रीरामायण की आरती की तथा कथा श्रवण की. संचालन महेश मुदगल ने किया ।

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