श्रीरामकथा :श्रीराम चरित मानस एक आशीर्वादात्मक ग्रन्थ :माँ कनकेश्वरी

0
4

यह भी कहा –
-गुरुकृपा से ज्ञान होता है
-गुरुकृपा से अहंकार टूट जाता है, शेष रह जाता है ज्ञान
-गुरुत्व का स्तर भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता है

ग्वालियर: मुरार के श्रीराम लीला मैदान में आयोजित *श्रीराम कथा* के दूसरे दिन राष्ट्रसंत कनकेश्वरी देवी ने कहा कि अध्यात्मिक ज्ञान और ग्रंथ एक दूसरे के पूरक हैं ।यदि ग्रंथों का ज्ञान नहीं है तो वह ज्ञान अपूर्ण है।उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के द्धारा रचित *रामचरित मानस* की महत्ता बताते हुए कहा कि-श्रीराम चरित मानस एक आशीर्वादात्मक ग्रन्थ है।इसके पठन-पाठन से लौकिक एवं पारमार्थिक अनेक कार्य सिद्ध होते हैं।श्रीराम चरित मानस के 7 सोपान-बालकाण्ड ,अयोध्या अयोध्या कांण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड, उत्तरकाण्ड, हैं. कल मैंने बालकाण्ड के बारे में बताया था।
उन्होंने गुरु की महत्ता बताते हुए कहा कि-
गुरुकृपा से ज्ञान होता है, गुरु अंहकार को तोड़ देते हैं और जब अहंकार टूट जाता है तो शेष रह जाता है ज्ञान। गुरु व्यक्ति की बुद्धि का संबंध आत्मा से कर देते हैं और फिर आत्मा का संबंध भगवान से हो जाता है। गुरुत्व नियंत्रण है, उम्र बढ़ने के बाद भी गुरुत्व जिंदा बना रहता है।
उन्होनें उदाहारण देकर समझाया कि जिस प्रकार एक हजार वर्ष पुराने सोने और आज के सोने के *’मूल गुणवत्ता(तत्व)’* में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं होता है,उसी प्रकार गुरुत्व का स्तर भी दिन-प्रतिदिन बढ़ता जाता है। उन्होंने और स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान की दी हुयी आंख से हम संसार देखते हैं और गुरु की कृपा से हम भगवान को देख सकते हैं।
उन्होंने दोहा सुनाया-
‘राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार* ।
सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल विचार ।।
इस दोहे की व्याख्या और भावना को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि श्रीराम चन्द्र जी अनंत हैं और उनकी कथाओं का विस्तार भी असीम है. इसलिए जिनके विचार निर्मल हैं, वे इस कथा को सुनकर आश्चर्य नहीं मानेंगे।
———————————–
इन्होंने श्रवण की कथा
महामंडलेश्वर ददरौआ सरकार श्री रामदास जी,केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर,वेदप्रकाश शर्मा, लोकेन्द्र पाराशर, पारस जैन,जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता एन पी कोरी कोरी आदि।
———————————
इन्होंने की आरती
मुख्य यजमान तथा केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की धर्मपत्नी किरण सिंह, पुत्र देवेन्द्र प्रताप सिंह ‘रामू’, बहिन मंजू सिंह सिकरवार, पूर्व विधायक मुन्ना सिंह भदौरिया(अटेर), सुरेन्द्र सिंह राठौर (ओरछा), धीरसिंह तोमर, महाराज सिंह पटेल, भूपेन्द्र जैन, उपेन्द्र बैंस आदि ने श्री रामायण की आरती की. कथा का संचालन महेश मुदगल ने किया।

LEAVE A REPLY