‘अवॉर्ड वापसी’ पर साहित्यकारों के दो गुट आए आमने-सामने

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नई दिल्ली : साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस करने के मुद्दे पर साहित्यकारों के दो धड़े अलग अलग प्रदर्शन कर रहे हैं। एक गुट मांग कर रहा है कि साहित्य कला अकादमी किसी के दवाब में ना आए और कोई प्रस्ताव पास करने की जरूरत नहीं है। जो लोग अपना अवॉर्ड वापस कर रहे हैं, वो करते रहे हैं। ये लोग रवींद्र भवन में प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरा गुट मांग कर रहा है कि कलबुर्गी की हत्या को लेकर साहित्य अकादमी प्रस्ताव पास करे कि गलत हुआ है। जो लोग अवार्ड वापस कर रहे हैं उनकी बात सुनी जाए।
वहीं दूसरा गुट श्रीराम सेंटर से साहित्य कला अकादमी तक मार्च निकाल रहा है। श्रीराम सेंट्र में साहित्यकार विरोध प्रदर्शन करते हुए इकट्ठा हुए हैं। इन्होंने अपने मुंह पर काली पट्टी बांधी हुई है।
बता दें कि साहित्य अकादमी पुरस्कार मिले लेखकों के पुरस्कार वापसी के बाद विवादों में आई अकादमी की कार्यकारिणी की आज दिल्ली के रवीन्द्र भवन में बैठक हुई। गौरतलब है कि अबतक करीब 31 लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया है। इन लेखकों का आरोप है कि साहित्य अकादमी लेखकों के साथ खड़ी नहीं है।
कर्नाटक के साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजे गए लेखक प्रोफेसर एमएम कालबुर्गी की हत्या के बाद अकादमी खामोश रही थी। लेखकों ने आरोप लगाया है कि पानसरे, दाभोलकर की हत्या के बाद भी अकादमी की तरफ से कोई प्रतिरोध नहीं जताया गया। हिंदी के लेखक उदय प्रकाश ने सबसे पहले अकादमी पुरस्कार लौटाकर अपना प्रतिरोध जeताया था उसके बाद नयनतारा सहगल, अशोक वाजपेयी मुनव्वर राणा समेत कई लेखकों ने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की थी।
इसके अलावा अंग्रेजी की मशहूर लेखिका निता देसाई ने भी कहा कि कल की अकादमी की कार्यकारिणी की बैठक में अकादमी के रुख के बाद वो ये तय करेंगी कि पुरस्कार लौटाना है या नहीं। साहित्य अकादमी की कार्यकारिणी में सभी भाषा के प्रतिनिधि होते हैं। अकादमी के अध्यक्ष ने पिछले दिनों एक बयान जारी किया था और कहा था कि कार्यकारिणी की बैठक के बाद अकादमी अपना रुख साफ करेगी।

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