जल संकट :निगम के पास नहीं कोई समाधान ,फिर मचेगा हाहाकार

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-730 करोड़ का अमृत पी गए, फिर भी बनी रही पानी की समस्या-अब टैंकर पर खर्च होंगे 1 करोड़
-नगर निगम में पेयजल व सीवर समस्या के समाधान पर पहले भी होते रहे हैं घोटाले, परिषद में हुए हैं हंगामे
ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
गर्मी शुरू होते ही शहर की जनता ने पानी के लिए कोहराम शुरू कर दिया है। कहीं पानी नहीं मिल रहा तो कहीं गंदे पानी की समस्या है। पानी की समस्या के समाधान के लिए नगर निगम अब इस साल भी टैंकरों को किराये पर लेगा। इसके टेंडर जारी किये जा रहे हैं। टैंकरों के किराए पर करीब 1 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह मामला गंभीर इसलिए है क्योंकि नगर निगम ने हाल ही में सीवर व पेयजल समस्या के समाधान के लिए 730 करोड़ रुपए खर्च किये हैं। एग्रीमेंट के तहत 730 करोड़ का अमृत प्रोजेक्ट 31 मार्च को बाउंडअप(खत्म) हो चुका है। इसलिए अब 1 करोड़ रुपए ठेकेदारों से या अमृत योजना से जुड़े अधिकारियों की जेब से काटे जाएंगे, इस पर अधिकारी विवाद छिड़ गया है।
103 टैंकर 3 माह के लिए किराये पर लिये जाएंगे
शहर के कई क्षेत्रों में पानी की समस्या गहराती जा रही है। इसके समाधान के लिए नगर निगम प्रशासन 103 टैंकरों को किराये पर ले रहा है। तीन माह के लिए अप्रैल से जून तक के लिए टैंकर लिये जाएंगे। इस पर 88 लाख रुपए खर्च होंगे। यह राशि बढ़कर 1 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी। नगर निगम पर अपने स्वयं के 35 टैंकर हैं। इनके डील पर ही 30 लाख रुपए से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है।
टंकियां शुरू होती तो बच जाते 1 करोड़
सीवर व पानी की समस्या के समाधान के लिए केन्द्र सरकार ने निगम को 730 करोड़ रुपए दिये थे। यह प्रोजेक्ट सितंबर 2019 में पूरा होना था, लेकिन अधिकारियों की मनमानी और ठेकेदारों पर मेहरबानी करते हुए प्रोजेक्ट अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2020 कर दी। यह अवधि अधिकतम थी। इसी बीच 25 मार्च को लॉक डाउन लग लगा तो अधिकारियों को बहाने बनाने का अवसर मिल गया। चूंकि लॉकडाउन प्रोजेक्ट खत्म होने के केवल 5 दिन पहले लगा था, इसलिए ज्यादा असर नहीं होना था। किन्तु अधिकारियों ने इसमें अवसर तलाशा और 5 दिन के काम के लिए 365 दिन की मोहलत देकर ठेकेदारों को उपकृत कर दिया। यह अवधि भी 31 मार्च 2021 को निकल गई, फिर भी पानी की सभी 43 टंकियां शुरू नहीं हो सकीं और न ही सभी जगह पानी की लाइनों का मिलान हो सका। इसलिए निगम को किराये पर टैंकर लेना पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में इस कार्य पर खर्च होने वाले 1 करोड़ रुपए आखिर किसके वसूले जाएं, यह गंभीर सवाल है।
लापरवाही पर सब इंजीनियर सस्पेंड
क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या और इंजीनियरों की लापरवाही से जनता आक्रोशित होती जा रही है। कार्य में लापरवाही के चलते निगमायुक्त शिवम वर्मा ने वार्ड 18 व 19 के पीएचई के सब इंजीनियर अजय वर्मा को निलंबित कर दिया। इऩ दोनों वार्डों का काम पीएचई के ही सब इंजीनियर व क्षेत्राधिकारी अजय शर्मा को सौंपा है।
यह है पेयजल आपूर्ति के साधन
निगम के टैंकरः 35
निगम की बोरिंगः 2282
सूख चुकी बोरिंगः 20
बोरिंग का जलस्तर घटाः 120
सूखने के कगार परः 47

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