कुंभ राशि में बृहस्पति ने किया प्रवेश, लोगों में बढ़ेगी संक्रमण से लडऩे की क्षमता

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भोपाल । 12 साल बाद देव गुरु बृहस्पति 5 अप्रैल रात 11 बजकर 10 मिनट पर अपनी राशि मकर को छोड़कर शनि की राशि कुंभ में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि में बृहस्पति 13 सितंबर तक रहेंगे। इसी बीच में गुरु ग्रह 20 जून को वक्री यानी टेढ़ी चाल से चलेंगे। फिर ऐसे ही चलते हुए 14 सितंबर को वापस मकर राशि में आ जाएंगे। इसके बाद 18 अक्टूबर को सीधी चाल में चलेंगे और 20 नवंबर को फिर से कुंभ राशि में गुरु ग्रह आएंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार देव गुरु बृहस्पति के राशि परिवर्तन से लोगों में कुशलता और राजनेताओं में कोमलता बढ़ेगी, यानी देश के बड़े राजनेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार जनता के प्रति अच्छा रहेगा। गुरु ग्रह के बदलने से फसलों का उत्पादन श्रेष्ठ रहेगा। साथ ही जातकों में संक्रमित बीमारियों से लडऩे की ताकत भी बढ़ेगी।
गुरु का राशि परिवर्तन इनके लिए शुभ
मेष, मिथुन, सिंह, तुला, मकर राशियों के लिए शुभ और वृषभ, कन्या और धनु राशि वालों के लिए सामान्य फल रहेगा। वहीं कर्क, वृश्चिक, कुंभ, मीन राशियों के लिए गुरु ग्रह का राशि परिवर्तन अशुभ रहेगा।
बुध के राशि बदलने से मीन में बना बुधादित्य योग
एक अप्रैल को बुध ग्रह ने मीन राशि में प्रवेश किया है। इनके प्रवेश के साथ ही मीन राशि में पहले से ही उपलब्ध सूर्य देव के होने से बुधादित्य योग का निर्माण हुआ है। 16 अप्रैल तक बुध ग्रह इसी राशि में रहेगा, इसके चलते 13 अप्रैल तक मीन राशि में बुधादित्य योग रहेगा। बुध ग्रह के राशि परिवर्तन से निवेश और लेनदेन पर असर पड़ता है, जिससे कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तो कुछ को नुकसान। शेयर बाजार से जुड़े लोग ज्यादा प्रभावित होंगे। साथ ही गले तथा स्कीन से जुड़ी बीमारियां भी बुध ग्रह की वजह से होंगी। पत्रकारिता, शिक्षा, लेखन, वकालत से जुड़े लोगों के कामकाज में भी बदलाव देखने को मिलेंगे।

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