टमाटर के भाव जमीन पर,‎ किसानों के ‎निकल रहे आंसू

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-लागत नहीं निकलने से ‎किसान खेतों में ही फेंक रहे टमाटर
भोपाल। बीते साल लॉकडाउन के दौरान 80 से 90 रुपए प्रति ‎किलो ‎बिकने वाले टमाटर के भाव अब जमीन पर आ गए हैं। फसल की लागत भी नहीं ‎निकलने से ‎किसान अब टमाटर खेतों में ही फेंकने को मजबूर हैं। अपने खून पसीने की कमाई को ऐसे बरबाद होते हुए देखकर ‎किसानों के आंसू ‎निकल रहे हैं। राजधानी के आसपास के ग्रामीण अंचलों खजूरीकलां, इस्मालनगर, श्यामपुर, मिसरोद समेत दो दर्जन से अधिक गांवों में यह स्थिति बनी हुई है।

किसानों का कहना है कि मंडी में भाव कम मिल रहे हैं, जबकि मंडी में बिचौलियों को कमीशन, भाड़ा व मजदूरी भी देना पड़ रही है। इससे लागत मूल्य भी नहीं निकल पा रहा है। इन दिनों करोंद मंडी में टमाटर की आवक प्रतिदिन 250 क्विंटल तक है, जबकि हबीबगंज, बैरागढ़, कोलार, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड स्थित सब्जी मंडियों में किसान टमाटर बेचने ले जाते हैं। करोंद मंडी में तो तीन से छह रुपये प्रति किलो तक भाव चल रहे हैं, लेकिन अन्य मंडियों में भाव डेढ़ से तीन रुपये किलो तक ही मिल रहे हैं। इस कारण किसान परेशान हैं। जो किसान फुटकर मंडियों में टमाटर लेकर पहुंच जाते हैं उन्हें औने-पौने दाम पर ही टमाटर बेचना पड़ रहा है। ताकि वे भाड़ा, मजदूरी व कमीशन दे सके। हर रोज यही स्थिति बन रही है।

उन्नतशील ‎किसान मिश्रीलाल राजपूत, हाफिज खां व लोकनायक चौहान ने बताया कि वर्तमान में टमाटर की पैदावार में बीज, बांस, मजदूरी, कीटनाशक आदि की लागत, मंडी में आड़तियों का कमीशन, भाड़ा आदि मिलाकर खर्च अधिक होता है, जबकि भाव इससे कम। इस कारण टमाटर मंडी में न ले जाते हुए खेतों में ही फेंक रहे हैं। भाव बेहतर होने पर मंडी में बेचने ले जाएंगे। ग्राम खजूरीकलां में करीब 30 एकड़ क्षेत्र में टमाटर की पैदावार हो रहा है। यहां 10-15 क्विंटल तक टमाटर किसान रोज फेंक देते हैं। प्रगतिशील कृषक मिश्रीलाल राजपूत ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में टमाटर बोया है। चूंकि, औसत डेढ़ रुपये किलो तक भाव मिल रहे हैं। इसलिए फेंकना मजबूरी हो गई है। जितनी लागत लग गई है, उससे कम कीमत मिल रही है। दरअसल, पैदावार के दौरान बीज, बांस, मजदूरी, कीटनाशक आदि पर रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

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