युवराज पर औपचारिक मुकदमा दर्ज न करने के मामले में जांच के आदेश

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नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के खिलाफ शिकायत के बाद भी मुकदम दर्ज न करने के कारण हरियाणा पुलिस के तीन अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिये गये हैं। युवराज पर गत वर्ष दलित समाज के लिए अभद्र व अपमानजनक टिप्पणी के आरोप लगे थे पर इसके बाद भी उनके खिलाफ औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इस अब इस मामले में हरियाणा पुलिस के तीन वरिष्‍ठ अधिकारियों के खिलाफ ही अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत जांच करने के आदेश दिए गए हैं। एक विशेष अदालत ने यह आदेश दिया है।
दरअसल, नेशनल अलायंस और दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कलसन ने बीते 11 जनवरी को अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि बीते वर्ष 2 जून को उन्होंने युवराज के खिलाफ हांसी पुलिस को एक शिकायत दी थी, जिसमें उन्‍होंने मुकदमा दर्ज कर युवराज सिंह को गिरफ्तार करने की मांग की थी। युवराज पर आरोप है कि उन्‍होंने बीते साल 1 जून को एक लाइव चैट के दौरान अपने साथी क्रिकेटर रोहित शर्मा के साथ वीडियो कॉलिंग पर क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के प्रति अभद्र व अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया था, जोकि वीडियो वायरल हो गया था तथा इसके बाद उपजे विवाद के चलते युवराज को माफी भी मांगनी पड़ी थी।
कलसन के अनुसार, हाल में ही एससी/ एसटी एक्ट में हुए संशोधन के अनुसार पुलिस को ऐसे मामले में एक्ट की धारा 18 ए के तहत पहले मुकदमा दर्ज करना होता है उसके बाद जांच शुरू की जाती है, लेकिन हांसी पुलिस ने इस मामले में उनकी शिकायत पर कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और बिना मुकदमा दर्ज किए ही प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई।

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