शीत लहर के कारण यूपी में 50 फीसदी बढ़ी शराब की बिक्री

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-मनोवैज्ञानिक और डॉक्टरों ने कहा- क्षणिक राहत, लेकिन लंबा नुकसान
लखनऊ। इन दिनों शीतलहर के चलते शराब की बिक्री यूपी में जमकर बढ़ गई है। इस बारे में आबकारी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय भुसरेड्डी ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल शराब का राजस्व पचास फीसदी ज्यादा आया है। जहां 100 बोतलें बिकती थीं, वहीं अब 150 बिकने लगी हैं। भ्रम है कि शराब सर्दी भगाती है।

मामले में मनोवैज्ञानिक और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के मानसिक रोग विभाग के हेड रह चुके डॉ एससी तिवारी ने कहा कि शराब दिमाग को सुस्त कर देती है। इससे दो चीजें होती हैं। पहली ये कि उसका वो व्यवहार सामने आ जाता है जो अक्सर दबा रहता है, क्योंकि दिमाग ये निर्णय करने में नाकाम हो जाता है कि क्या सही है और क्या गलत। दूसरा ब्रेन एक्टिविटी कम होने से परिस्थितियों का एहसास कम होने लगता है। चाहे दर्द हो, सर्दी हो या फिर गर्मी हो, इन सभी चीजों का एहसास कम हो जाता है। वक्ती तौर पर तो राहत मिल जाती है लेकिन दिमाग के एक्टिव होने के साथ ही सब गायब हो जाता है।

नुकसान ये है कि शराब ब्रेन की सेल्स को मारती है। ऐसे में क्षणिक राहत के लिए इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाया जाना चाहिए। लखनऊ के ही फिजिशियन डॉ आलोक संगम ने तो कहा कि मौसम चाहे कोई हो, शराब का उतना ही नुकसान होता है। शराब के शरीर में पहुंचने के साथ ही शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट, पल्स और सबसे अहम कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है, लेकिन इसका नुकसान उतना ही होता है जितना आम दिनों में होता है। चाहे जैसी शराब हो, कच्ची या विदेशी, अल्कोहल शरीर को डेंट जरूर मारता है।

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