ग्वालियर नगर निगम …शर्म से कहो हम गुंडे है!

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– सीएम ने निगम का एक और विकेट गिराया,सहायक आयुक्त गुर्जर को किया सस्पेंड
– नगर निगम ग्वालियर में घूसघोरी और अराजकता चरम पर, लुटने को वेबश शहर की जनता , सरकार को बदनाम करने की कोशिश
ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
शर्म से कहो हम गुंडे है!…शायद ग्वालियर नगर निगम पर यह बात हू-ब-हू फिट हो रही है,पिछले कुछ वर्षों में ग्वालियर नगर निगम बोले तो नरक निगम की तरह होकर रह गया है .कई सालों से या दशकों से अपनी सीटों से चिपके कुछ अधिकारियों ने जिसमे क्लर्क से लेकर कमिशनर तक शामिल है ,जिन्होंने ग्वालियर नगर निगम की साख को बट्टा लगा दिया है.रिश्वतखोरी ,भ्रष्टाचार ,हड़ताल जैसे कारनामों ने ग्वालियर नगर निगम का माथा पूरे देश में झुका दिया है.आए दिन वीडियो ,ऑडियो का वायरल होना जैसे यहाँ का फैशन बन गया है,वीडियो ,ऑडियो भी ऐसे कि उन्हें सार्वजनिक सुनना भी शर्म में डूब जाना , और उस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करना यहाँ के अधिकारियों का ढीढपन…यही वजह है कि अब सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर नगर निगम का एक और विकेट गिरा दिया। शुक्रवार को कलेक्टर- कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नगर निगम के सहायक आयुक्त नागेंद्र सिंह गुर्जर को सस्पेंड करने के निर्देश दिए। गुर्जर का एक ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें से ₹10000 हर रोज मांगने की बात कह रहे थे। यह ऑडियो वरिष्ठ अफसरों तक पहुंचा।अधकारियों ने इसे निगम की भ्रष्टाचारी और अराजक व्यवस्था का एक और मुद्दा माना और मुख्यमंत्री ने गुर्जर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के निर्देश दे दिए।उधर संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना ने इस मामले में उपायुक्त प्रदीप श्रीवास्तव को निर्देश दिए हैं कि वह गुर्जर के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराएं।
चरम पर घूसखोरी
नगर निगम में घूसघोरी चरम पर है, यह एक-एक कर सामने आने लगा है। सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा जब से 5 लाख की घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए हैं तब से कई मामलों का खुलासा होने लगा है। ताजा मामला सहायक आयुक्त नागेन्द्र सिंह गुर्जर के ऑडियो वायरल होने का आया था। आडियो में सहायक आयुक्त गुर्जर अपने कंप्यूटर आपरेटर करन वर्मा से मोबाइल पर बात कर रहे हैं, जिसमें वह बोल रहे हैं कि मुझे तो प्रतिदिन दस हजार स्पये मिल जाएं, बाकी के सारे पैसे तुम्हारे हैं। तुम लोग आपस में बांट लेना। मेरी एक ही बेटी है उसकी शादी करनी है। उपायुक्त(प्रदीप श्रीवास्तव) अधिक परेशान करता है तो उसके पैरों को हॉकियों से तोड़ दो। गुरुवार को यह नया आडियो वायरल होने के बाद नगर निगम में खलबली तो मची लेकिन वरिष्ठ अधिकारी उसे बचाने में जुटे रहे। लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे गंभीर मामला माना और सस्पेंड करा दिया।
माकिन ने शहर को लूटने की दी खुली छूट
SANDEEP MAAKINनगर निगम आयुक्त संदीप माकिन को उनकी करनी के अनुसार बेइज्जती से पद से हटाकर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने सही समय पर सही फैसला लिया। मुख्यमंत्री के इस फैसले से न केवल नगर निगम बल्कि शहर के व्यापारियों में प्रसन्नता झलक रही है। न केवल भाजपाई बल्कि कांग्रेसी भी सीएम के इस फैसले की मुक्तकंठ से प्रशंसा कर रहे हैं। धीरे-धीरे ऐसे मामले सामने आने लगे हैं जिससे लगने लगा है कि मुख्यमंत्री यदि यह फैसला नहीं लेते तो सरकार को बदनाम होना पड़ता। क्योंकि निगम के कुछ अधिकारी जनता की गाड़ी कमाई और सरकार के खजाने को जमकर लूटते रहे। यह खेल आयुक्त की कुर्सी संभालने के बाद संदीप माकिन की देख रेख में ही चला।
हालात इतने वेकाबू होते चले गए कि पूर्व संभागायुक्त व प्रशासक एमबी ओझा ने 7 करोड़ के शौचालय निर्माण, पूर्व विधानसभा में 2 करोड़ की सीसी रोड घोटाला, कार्यशाला में वाहन किराए से लेने की 5 करोड़ की फाइल में अनियमितताएं पकड़ीं। कुछ घोटालों एफआईआर तो कुछ में विभागीय जांच के निर्देश तक दिए, लेकिन उनके जाते ही मामले दबा दिए गए। निगमायुक्त संदीप माकिन ने न केवल भाजपा के संस्थापक सदस्य परिवार के सांसद व पूर्व महापौर विवेक शेजलकर बल्कि अन्य भाजपाईयों को भी ठेंगा दिखाना शुरू कर दिया था। निगमायुक्त केवल माधव नगर में हाजिरी लगाते रहे।
भ्रष्टाचार का इतिहास ही रच दिया
भवन शाखा में भ्रष्टाचार ने तो एक इतिहास ही रच दिया। सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा को केवल एक मामले में ही 5 लाख की घूस लेते रंगे हाथों पकड़े जाने से यह खुलासा भी हो गया। अब स्वच्छता अभियान, निर्माण कार्य, शौचालय निर्माण, किराए पर वाहन लेना, सीसी रोड, संपत्तिकर वसूली जैसे मामलों के दस्तावेज देखें तो कुछ अधिकारियों ने खूब बारे के न्यारे किए हैं। अमृत और स्मार्ट सिटी की फाइलें तो अभी बाहर ही नहीं आ सकी हैं। लूटमार में कौन-कौन से अधिकारी शामिल रहे, सबूतों के साथ इसका खुलासा भी जल्द होगा।

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