एंटी माफिया अभियान…कांग्रेस नेता केदार कंसाना के करोड़ों के कॉम्प्लेक्स पर चला प्रशासन का बुलडोजर

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-15 दुकानें की गई जमींदोज
ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने कांग्रेस नेता केदार कंसाना के करोड़ों के कॉम्प्लेक्स पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। जिसमें करीब 15 दुकानों को जिला प्रशासन ने जमींदोज कर दिया। कलेक्ट्रेट और हाईकोर्ट के बीच प्राइम लोकेशन पर बना ये कॉम्प्लेक्स सरकारी जमीन पर बना हुआ था। एंटी माफिया मुहिम के तहत की गई इस कार्रवाई के लिए व्यापक तैयारियां की गई थी। भारी पुलिस बल के साथ इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
खास बात यह है कि इस जमीन पर कांग्रेस नेता केदार सिंह कंसाना और कल्याण कंसाना का आधिपत्य था। जिला प्रशासन के मुताबिक इस जमीन के सिलसिले में करीब 8 महीने पहले बेदखली के आदेश हुए थे और कंसाना बंधुओं को इसकी कॉपी भी भेजी गई थी। इसके अलावा दुकानदारों को भी नोटिस दिया गया था। करीब 15 दुकानों वाले इस कॉम्प्लेक्स में जनरल स्टोर, मेडिकल, एटीएम सहित विभिन्न दुकानें थी। करीब पांच हजार वर्ग फुट में दो हिस्सों में बनी इस मार्केट में ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर दुकानें बनाई गई थी।
सालों से यहां लोगों को किराए पर दुकान देकर उनसे वसूली की जा रही थी। चर्चा के मुताबिक कंसाना बंधु का पर्स मार्केट से डेढ़ लाख से ऊपर का किराया हर महीने आता था। कंसाना बंधुओं का कहना है कि सरकार के इशारे पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह जमीन उनके पूर्वजों की है। जिसकी उनके पास रजिस्ट्री भी है। दुकानों का कमर्शियल टैक्स और हाउस टैक्स भी वो नगर निगम में जमा करते थे, लेकिन प्रशासन ने बिना नोटिस पर कार्रवाई कर रहा है और उनकी एक भी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।
तत्काल खाली कराई दुकानें
अलका पुरी तिराहा पर दो मंजिला भवन के निचले हिस्से में एक दर्जन दुकानें बनी थीं। इस क्षेत्र में यह सबसे पुरानी दुकानें थीं। गुरुवार की सुबह अचानक जिला प्रशासन की टीम पहुंची। नगर निगम की मदाखलत टीम को बुलावा भेजा लेकिन काफी देर तक तोड़ू दस्ता नहीं पहुंचा। हालांकि बाद में अमला तो पहुंच गया लेकिन उससे पहले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने दुकानदार को समय देकर सामान खाली करा लिया।
देखते रहे नेताजी, नहीं किया विरोध
कांग्रेस नेताओं का पास में ही निवास है। केदार कंषाना तत्काल मौके पर पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि उनके पास 1990 की रजिस्ट्री है। नजूल की एनओसी तथा नगर निगम से नामांतरण भी है। लेकिन अधिकारियों ने कह दिया कि उनके पुराने रिकार्ड में यह जमीन सरकारी है। इसलिए अधिकारियों ने केदार के दस्तावेज नहीं देखे और थोड़ी ही देर में सभी दुकानें ढहा दी। कार्रवाई देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पुलिस ने उन्हें हटा दिया।
कांग्रेस की सरकार में हुई थी तुड़ाई
अलकापुरी में ही कांग्रेस नेता व जिला पंचायत के सदस्य साहब सिंह गुर्जर का मकान है। कांग्रेस की पूर्व कमलनाथ सरकार बनने से पहले साहब सिंह भी कांग्रेस में थे, लेकिन पार्टी ने जब टिकट नहीं दिया तो वे बहुजन समाज पार्टी से टिकट ले आए। ग्वालियर ग्रमीण सीट से वे तो नहीं जीते लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार मदन कुशवाह भी नहीं जीत सके। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मदन कुशवाह को जिताने ताकत लगाई थी। कमलनाथ सरकार बनते ही एंटी माफिया अभियान चला जिसमें साहब सिंह के परिवार के मकान निशाने पर आ गए थे। बाद में सियासी उठापटक में मदन कुशवाह तो सिंधिया के साथ भाजपा में चले गए लेकिन साहब सिंह कांग्रेस के पास पहुंच गए। केदार और कल्याण कंषाना कांग्रेस में ही बने रहे। इसलिए चर्चा चल निकली है कि एंटी माफिया अभियान में चुनिंदा लोग निशाने पर आ रहे हैं।

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