मेरे सिग्नेचर फर्जी है, मेरा प्यारे मिया से कोई संबध नही:रजा मुराद

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फिल्म एक्टर रजा मुराद ने राजधानी आकर दर्ज कराये ब्यान
नाबालिगो से दुष्कर्म के आरोपी प्यॉरे मियॉ द्वारा धोखाधडी के मामले मे पुलिस ने किया था तलब
भोपाल। प्यारे मियां द्वारा अंसल अपार्टमेंट में लगाए गए मोबाइल टावर को लेकर बनाई गई कमेटी में जो मेरे सिग्नेचर किए गए हैं, वह पूरी तरह फर्जी है, मैं प्यारे मियां द्वारा बनाई गई सोसाइटी का मेंबर नहीं हूं, और ना ही मेरा उनसे कोई लेना देना है। यह बात राजधानी पहुंचे मशहूर फिल्म कलाकार रजा मुराद ने मीडिया से बातचीत में कही। गौरतलब है, कि श्यामला हिल्स पुलिस ने नाबालिगो से यौन शोषण के मामले मे फंसे प्यारे मियां के खिलाफ अंसल अपार्टमेंट में फर्जी सोसाइटी बनाकर मोबाइल टावर लगाने के मामले में धोखाधडी का मामला दर्ज किया है।

प्यारे मियां द्वारा बनाई गई सोसाइटी में आठ सदस्य थे, जिसमे फिल्म स्टार रजा मुराद को भी उसने सोसाइटी का सदस्य बताया था। टावर कंपनी द्वारा प्यारे मियां की सोसायटी को 80 हजार रुपये महीना किराया दिया जाता था। इस मामले में पुलिस ने फिल्म कलाकार रजा मुराद का सरकारी गवाह बनाया है। जिसके लिए रजा मुराद बुधवाकर को राजधानी के श्यामला हिल्स थाने अपने बयान दर्ज कराने पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि सोसाइटी मेंबर के रुप मे उनके साइन उर्दू में किए गए हैं, जबकि वो इंग्लिश मे सिग्नेचर करते है, और उनके साईन मे खाली रजा लिखा है, जबकि साइन करने वाला अपना पूरा नाम लिखता है। रजा मुराद ने आगे कहा कि मैं कभी प्यारे मियां से नहीं मिला, ना ही उनके घर गया हुं, और ना ही उनकी कोई पार्टी अटेंड की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्यारे मियां ने उनके साथ कभी कोई फोटो खिंचवाई हो तो इसका उन्हें ध्यान नहीं, क्योंकि उनके साथ कई लोग रोज फोटो खिंचवाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मैं इस बात को सिरे से खारिज करता हूं, कि मैं प्यारे मेरे सोसाइटी का सदस्य हूं।
बल्कि उन्होंने कहा कि उनका भोपाल के अंसल अपार्टमेंट में एक फ्लैट है। इसमें वह कभी भी नहीं रहे, लेकिन यहां फ्लैट होने के कारण वो अपार्टमेंट की मुख्य सोसाइटी के सदस्य हैं।और हर साल सब्सक्रिप्शन देते है। उनका साफ कहना है, कि उनके साइन पूरी तरह से फर्जी हैं, और इस बात की जांच होना चाहिए कि मोबाईल टॉवर कपनी द्वारा हजारों रुपये महीना किस के अकाउंट में भेजा जा रहा था, और इस रकम को कौन निकालता था, और यह पैसा सोसायटी के नाम पर लेकर कहां खर्च किया जा रहा था। वही मामले को लेकर पुलिस अधिकारियो ने बताया कि आरोपी प्यारे मियां ने अंसल अपार्टमेंट के ई-ब्लॉक में अपनी पत्नियों और बेटे के नाम से तीन फ्लैट लिए थे। इसी ब्लॉक में भारती एयरटेल कंपनी का भी एक फ्लैट था। बिल्डिंग की छत पर कंपनी का एक मोबाइल टावर भी लगा हुआ था, जिसका संचालन एयरटेल कंपनी कर रही थी। करीब 10 साल पहले प्यारे मियां ने वकील के माध्यम से कंपनी को नोटिस भेजकर टावर हटाने की बात कही। इसके साथ ही वह कंपनी के कर्मचारियों को कई तरीकों से परेशान करने लगा। कंपनी ने जब प्यारे मियां से बातचीत की तो उसने टावर के किराये का पैसा मांगा। इस तरह कंपनी से करीब सवा करोड़ रुपए उसने ऐंठ लिए, बाद में पुलिस में इसकी शिकायत की गयी। जॉच के दौरान सामने आया कि टॉवर कंपनी की तरफ से प्यारे मियॉ को कहा गया था कि वो किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि सोसायटी से अनुबंध करते हैं। इस पर प्यारे मियां ने ई-ब्लॉक में रहने वाले आठ लोगों के नाम से फर्जी सोसायटी बना ली।

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