पितृपक्ष …तर्पण व श्राद्ध का सिलसिला जारी,जीव-आत्मा को श्राद्ध कर्म से मिलती है शांति

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ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
पितर पक्ष में पितरों का तर्पण का सिलसिला जारी है। पूरे पितर पक्ष में अलग-अलग तिथियों में अलग-अलग तरह से स्वर्ग सिधारने वालों का विशेष श्राद्ध किया जाता है। चर्तुदर्शी तिथि को महिलाओं का विशेष रुप से श्राद्ध किया जाता है। जिससे मातृऋण से मुक्ति मिलती है। इसी तरह दसवीं तिथि पर वैष्णवों और द्वादशी तिथि में संत-महात्माओं का श्राद्ध करने का विधान है। इन विशेष तिथियों में श्राद्ध कर्म करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
एकादशी और द्वादशी का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित सेवाराम शर्मा के मुताबिक शास्त्रों में एकादशी को वैष्णवों और द्वादशी को संत-महात्माओं और सन्यासियों का तर्पण करने का विधान बताया गया है। इन विशेष तिथियों में किये गये पिंडदान और तर्पण व श्राद्ध कर्म से जीव आत्मा को शांति मिलती है। श्राद्ध पक्ष में नवमीं एकादशी और द्वादशी के साथ-साथ चतुर्दर्शी का भी महत्व है। इस तिथि में आग से जलने, पानी में डूबने, पेड़ से गिरने जैसे अकाल मृत्यु को प्राप्त हुये लोगों का श्राद्ध करने से उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है।
अमावस्या को होगी विदाई
पंडित सेवाराम शर्मा ने बताया कि अगामी १७ सितंबर अमावस्या को पितरों की विदाई की जायेगी। इस दिन पितृमोक्ष अमावस्या में पितरों के निमित्त अंतिम पूजा होगी। उनसे सुख-समृद्धि की और आर्शीवाद की कामना करते हुये उन्हें विदा किया जायेगा।

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