उपचुनाव/ किस कन्फ्यूज़न में फंसे हैं कमलनाथ ?,क्या सिंधियाई गढ़ में सेंधमारी कर पाएंगे कांग्रेस के आयतित प्रत्याशी ?

0
25

-टिकट वितरण को लेकर पार्टी में विरोध के स्वर मुखरित, जनाधार वाले नेताओं की पूछपरख घटी
ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर गुटबाजी और जमीनी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों के बीच विरोध के स्वर मुखरित होने लगे हैं। इसकी अहम् वजह यह है कि ग्वालियर-चम्बल में कांग्रेस के जिन वरिष्ठ नेताओं को वजनदार माना जाता रहा है, उन्हें आज हांसिए पर ला कर खड़ा कर दिया गया है। विधानसभा उप चुनाव की तैयारियों एवं प्रत्याशी चयन पर स्थानीय कांग्रेस नेताओं से चर्चा करने के लिए भोपाल से ऐसे पूर्व मंत्रियों का यहां भेजा जा रहा है कि जिनका इस क्षेत्र की राजनीति और स्थानीय कार्यकर्ताओं से दूर दूर तक कोई सरोकार नहीं रहा।

चूंकि ग्वालियर क्षेत्र पूर्व कांग्रेसी एवं अब भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ रहा है, ऐसे में कांग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह और टिकट वितरण पर उत्पन्न असंतोष के कारण कांग्रेस अब वेंटीलेटर की ओर बढ़ रही है। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के खास दूत बन कर ग्वालियर आए पूर्व मंत्री पीसी शर्मा एवं सज्जन वर्मा यहां प्राय: सुस्त हो चुके कांग्रेसियों को चुस्त करने में सफल नहीं हो पाए। इसकी अहम् वजह यह है कि अभी तक ग्वालियर में सिंधिया एवं दिग्विजय सिंह गुट का ही जलबा रहा है। इनके अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे दिवंगत सुभाष यादव के पुत्र अरुण यादव, अजय सिंह राहुल भैया का असर फिर भी दिखता रहा है लेकिन पीसी शर्मा और सज्जन वर्मा के आगमन को जिला कांग्रेस सहित सभी संभावित दावेदारों एवं स्थानीय कार्यकर्ताओं ने किसी भी तरह की अहमियत नहीं दी।
बताना मुनासिब होगा कि मध्यप्रदेश में जिन 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें ग्वालियर चंबल संभाग सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी खास वजह यह है कि उपचुनाव की सबसे ज्यादा सीटें ग्वालियर चंबल संभाग से ही हैं। एक यह बात भी सामने आई है कि ग्वालियर चम्बल प्रदेश की कमलनाथ सरकार को घोड़ा पछाड़ देेने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ है, फलत: अब यहां भाजपा को कम कर के आंकना शायद कांग्रेस की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। क्योंकि आज कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जिन लोगों को टिकट दे रहा है, कभी वह भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेहद करीबी हुआ करते थे। यह तथ्य जुदा है कि वह सिंधिया के साथ भारतीय जनता पार्टी में नहीं गए लेकिन व्यक्तिगत सम्बंधो की भी किसी तरह से अनदेखी नहीं की जा सकती है।
टिकिट वितरण में वरिष्ठों को किया दरकिनार
एक तरफ जहां बीजेपी विधानसभा उपचुनाव से पहले वृहद स्तर पर सदस्यता अभियान चला रही है तो वहीं इस अंचल में कांग्रेसी टिकट वितरण में दिग्विजय सिंह, अजय सिंह, अरुण यादव जैसे नेताओं से रायशुमारी न करना शायद वरिष्ठ नेतृत्व को महंगा पड़ सकता है। हम यह नहीं कह रहे कि दिग्विजय सिंह या अन्य नेताओं से पूछ कर ही टिकट दिए जाएं लेकिन मौजूदा समय में जिस तरह से टिकट वितरण की कार्यवाही को अमली जामा पहिनाया जा रहा है वह कांग्रेस पर ही भारी पड़ सकती है। कुछ दिनों पहिले जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर खास बहस हुई थी कि दीगर दलों से कांग्रेस में नए आने वाले लोगों को टिकट न दिया जाए। इस बात को लेकर काफी हंगामा भी हुआ था और जिला अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई थी। इसके बावजूद नए लोगों को टिकट के लिए प्राथमिकता देना, कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
बीजेपी एकजुट तो कांग्रेस अन्तरकलह से जूझती
राजनीतिक हलकों में चर्चा इस बात की भी है कि एक तरफ जहां भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं ग्वालियर चम्बल के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी को मजबूत करने और अंचल की सभी सीटें हथियाने के लिए दिन रात एक कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस अब अन्तरकलह से जूझती हुई संघर्ष कर रही है। खबर तो यहां तक है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं उनके कुछ खास सिपहसालारों के द्वारा ही टिकट वितरण किया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेसी टिकट के प्रति आशान्वित प्रबल दावेदार जिन वरिष्ठ और निष्ठावान नेताओं को किनारे किया जा रहा है, वे यदि पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे तो कम से कम नए आने वाले लोगों का ह्रदय से समर्थन तो नहीं कर पाएंगे। लाजिमी होगा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ग्वालियर-चम्बल अंचल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थतियों, हालातों और भाजपा के निरंतर बड़ते जनाधार को देखते हुए ही प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को अमली जामा पहिनाएं अन्यथा इस अंचल में किसी भी तरह के अनिष्ठ के आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

LEAVE A REPLY