यूं ही नहीं था बीएल संतोष का भोपाल दौरा

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– उपचुनावों को लेकर संघ और खुफिया सर्वे ने बढ़ाई भाजपा की चिंता
-कांग्रेसियों के भाजपा में शामिल होने से उपजा असंतोष, उपचुनावों को करेगा प्रभावित
भोपाल। दो दिन के दौरे पर भोपाल आए भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने जिस अंदाज से मंत्रियों, विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को टारगेट किया। उससे संकेत मिल रहे हैं कि उपचुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा की स्थिति खराब है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में भी इस बात की चिंता है, कि बीएल संतोष यूं ही भोपाल नहीं आए थे। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री कभी भी उपचुनावों के दौरान नहीं आते हैं।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने कांग्रेस के 22 विधायकों को तोड़कर सरकार तो बना लिया है, लेकिन उपचुनाव से पूर्व ही प्रत्याशियों के विरोध, पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के असंतोष ने आलाकमान को चिंता में डाल दिया है।
राष्ट्रीय नेतृत्व की बढ़ी चिंता
मप्र में सितम्बर के आखिरी सप्ताह में विधानसभा उपचुनावों की घोषणा हो सकती हैं। भाजपा ऊपर से कह तो रही है वह सभी 27 सीटों पर जीत हासिल करेगी, लेकिन हालही में संघ के सर्वे के जो नतीजे सामने आए हैं, वह उसके पक्ष में कतई नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले दिनों सांसदों और विधायकों की बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीखे लहजे में खुलेआम कहा था कि ज्यादा हवा में ना रहे, नामधारी और माला पहनने से कुछ नहीं होगा और जब तक हमारी प्रदेश में सत्ता है तभी तक हमारा जलवा और रुतबा है नहीं तो सब सड़क पर आजाओगे। संघ के सर्वे के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व को आगे आना पड़ा और आलाकमान ने राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष को भोपाल भेजकर रिपोर्ट मांगा।
संघ के सर्वे में 6 तो इंटेलिजेंस के सर्वे में 4 सीटें भाजपा के पाले में
राजगढ़ जिले के ब्यावरा से कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी के निधन के बाद प्रदेश में अब 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होगा। 27 सीटों को लेकर संघ और इंटेलिजेंस ने अपनी-अपनी सर्वे रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट ने रणनीतिकारों की नींद उड़ाकर रख दी है। संघ के सर्वे के अनुसार भाजपा को 27 विधानसभा सीटों में से 21 सीटों पर हार का सामना करना पड़ सकता है। वहीं इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा मात्र 4 सीटें जीतने की स्थिति में है।
सिंधिया और भावी प्रत्याशियों का विरोध
संघ के सूत्रों का कहना है कि सर्वे में यह तथ्य सामने आया है कि सांसद ज्योतिरादित्य और उनके समर्थक प्रत्याशियों का उनके विधानसभा क्षेत्र में जबरदस्त विरोध है। स्थानीय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ रही है। भाजपा के सूत्रों के अनुसार सर्वे में यह बात तो बिल्कुल साफ हो गई है कि, सिंधिया को लेकर मतदाताओं में अब वो आकर्षण नहीं रह गया है, जो आकर्षण 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले मतदाताओं में नजर आता था। भाजपा आलाकमान को सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में जिस चमत्कार की उम्मीद थी, पार्टी को लगता है अब वह इतना प्रभावीं नही रहीं। ग्वालियर-चंबल संभाग में भाजपा की हालत 2018 से भी ज्यादा कमजोर दिखाई दे रही है।
लगातार गिर रही है साख
सर्वे में यह बात सामने आई है कि भाजपा की साख लगातार गिर रही है। संघ के पहले सर्वे पार्टी जहां 8 सीटें जीतने की स्थिति में थी, वहीं दूसरे सर्वे में उसकी साख गिरी है, और वह अब 6 सीटें जीतने की स्थिति में है। सर्वे रिपोर्ट ने पार्टी नेतृत्व को चिंता में डालने के साथ उसकी नींद उड़ाकर रख दी है। दूसरे सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मालवा-निमाड़ की जिन 7 सीटों पर उपचुनाव होना हैं, वहां भी स्थितियां भाजपा के अनुकूल नहीं है। यहां की 4 सीटों पर सिंधिया समर्थकों को लेकर मतदाताओं में नाराजगी और भाजपा नेताओं में विरोधी स्वर मुखर दिखाई दे रहे हैं। जिससे यहां भी भाजपा बड़े नुकसान की संभावना नजर आ रही है।
क्या कम हो रहा शिवराज का जादू?
भाजपा के एक पदाधिकारी कहते हैं कि सर्वे में जिस तरह जनता द्वारा भाजपा के प्रति असंतोष दर्शाया गया है, उससे पार्टी में इस बात की चर्चा है, कि क्या मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जादू कम हो गया है। वह कहते हैं कि सिंधिया और उनके समर्थक पूर्व विधायकों के कारण शिवराज की साख खत्म हुई है। सर्वे में यह सुझाव भी दिया गया है कि जहां-जहां सिंधिया समर्थकों का बहुत ज्यादा विरोध है, और पार्टी को हार साफ नजर आ रही है, वहां-वहां सिंधिया समर्थकों के टिकट काटकर भाजपा के जिताऊ एवं प्रभावशाली नेताओं को बतौर उम्मीदवार उपचुनाव के मैदान में उतारा जाए।
कई सिंधिया समर्थकों का कट सकता है टिकट
भाजपा सूत्रों का कहना है कि सर्वे आने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष का भोपाल आना किसी गंभीर निर्णय का संकेत भी है। कर्नाटक में संघ के हार्डलाइनर प्रचारक की छवि रखने वाले संतोष चुनावों के दौरान वार रूम के कुशल संचालन के लिए जाने जाते हैं। रहते लो प्रोफाइल हैं, लेकिन परदे के पीछे रणनीतियां बनाने में माहिर माने जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि संतोष ने आलाकमान को सुझाव दिया है कि उपचुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए सिंधिया समर्थक कुछ पूर्व विधायकों की जगह भाजपा नेताओं को टिकट दिया जाए। ऐसे में संभावना जताई जा रही है, कि सिंधिया समर्थक कई पूर्व विधायकों की मंशा पर पानी फिर सकता है।
-हितानंद की नियुक्ति बड़े बदलाव का संकेत
भाजपा ने डेढ़ साल से रिक्त भाजपा के प्रदेश सह संगठन मंत्री पद पर हितानंद को नियुक्त किया है। यह पद अतुल राय को 22 फरवरी 2019 को सह संगठन मंत्री हटाए जाने के बाद से खाली था। अब हितानंद प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ काम करेंगे। प्रदेश में 27 विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के ठीक पहले भाजपा ने नए सह संगठन मंत्री की नियुक्ति के कई राजनीतिक मायने हैं। हाल ही में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के दौरे से भी उनकी नियुक्ति को जोड़कर देखा जा रहा है। जिला अध्यक्षों की घोषणा को लेकर सुहास भगत चर्चा में आए थे, उसके बाद से ही यह सुगबुगाहट शुरू हो गई थी कि प्रदेश भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव हो सकता है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में संगठन में बड़ा फेरदबल किया जा सकता है।

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