तो क्या अगले साल होंगे उपचुनाव ?

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भोपाल । प्रदेश की 27 सीटों पर उपचुनाव कब होंगे, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने हालांकि, तैयारियां शुरू कर दी हैं, मगर समीकरण जिस तरह के बन रहे हैं, उसमें तो चुनाव तय समय सितंबर में हो पाना करीब-करीब असंभव सा है। कोरोना जिस तरह से रूप-रंग दिखा रहा है। उसके बाद चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराना भी जटिल दिख रहा है, तो क्या माना जाए कि अब चुनाव अगले साल ही हो पाएगा।

‎बिहार राज्य के साथ म.प्र. के उप चुनाव नवम्बर माह में होने की संभावना थी। ‎पिछले कुछ ‎दिनों में ‎बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, लोजपा के ‎चिराग पासवान तथा राजद के तेजस्वी यादव ने कोरोना और बाढ़ के कारण चुनाव बढ़ाने की मांग की है। इससे लगता है म.प्र. के उपचुनाव भी कोरोना के कारण नए साल तक के ‎लिए टल जाएंगे।
अधिकतर सीटों पर भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं है। कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को लेकर क्षेत्र में नाराजगी है। यही वजह है कि भाजपा यहां डैमेज कंट्रोल होने तक चुनाव में नहीं जाना चाहती है। लिहाजा चुनाव टालने के पूरे आसार बन रहे हैं। एक बड़ी वजह यह भी है कि भाजपा की योजना कांग्रेसी खेमे में और सेंधमारी की है। नेता दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस के 8 विधायक संपर्क में हैं। ऐसे में भाजपा को लगता है कि इन 8 को साथ लेकर 27 नहीं 35 सीटों पर चुनाव कराया जाए। सूत्रों का कहना है कि सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों का प्रभाव कम करने के लिए पार्टी कांग्रेस के कम से कम 8 और विधायकों को अपने पाले में लाने की पूरी तैयारी कर चुकी है। बताया जाता है कि भाजपा के रणनीतिकार 35 सीटों पर उपचुनाव के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं।
सिंधिया के औरा से बाहर होने की भी कोशिश
वहीं संघ के एक सूत्र का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर विभागों के बंटवारे तक में जिस तरह ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों ने भाजपा पर दबाव बनाया है, उससे पार्टी आलाकमान खुश नहीं है, मगर अभी मजबूरी है, इसलिए वह अपनी नाराजगी को जाहिर भी नहीं कर सकती। इसलिए पार्टी के रणनीतिकार इस कोशिश में लगे हैं कि कम से कम 10 कांग्रेसी विधायकों को किसी तरह भाजपा में शामिल किया जाए। इसके लिए विधायकों के साथ लगातार सौदेबाजी हो रही है। प्रद्युमन सिंह लोधी का भाजपा में आना भी इसी रणनीति का एक हिस्सा था। इसी तरह से निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को भी खनिज निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने अभी भाजपा की सदस्यता नहीं ली है।
सीएम भी बना चुके हैं रणनीति
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कोशिश है की उपचुनाव की घोषणा होने के पहले कम से कम 10 विधायकों को कांग्रेस से तोड़कर उन्हें पद देकर भाजपा की सदस्यता दिला दिला दी जाए। फिर उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया जाए। सूत्रों का कहना है कि विभागों के बंटवारे के समय पार्टी कार्यालय में बैठकों के दौरान सीएम भी इस बावत रणनीति बना चुके हैं।
7 से बात पूरी होने का दावा
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी जिन 10 विधायकों को भाजपा में लाने की तैयारी कर रही है, उनमें से 7 विधायक पहले से ही संपर्क में हैं। ये विधायक मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे का इंतजार कर रहे थे। इन विधायकों से पूरी बात हो चुकी है। अब सिर्फ सदस्यता लेना ही बचा है। सूत्रों का कहना है कि यह भी एक वजह है कि कांग्रेस छोड़कर आए 14 पूर्व विधायकों को मंत्री बनाया गया है और कई को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

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