कांग्रेस में युवा बनाम बुजुर्ग की खेमेबंदी बढ़ी, फिर उठी राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग

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नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी में राहुल गांधी समर्थकों और विरोधियों के बीच खेमेबंदी इन दिनों साफ दिखाई देने लगी है। पार्टी के युवा नेता चाहते हैं कि राहुल गांधी को पार्टी में मुख्य भूमिका दी जानी चाहिए। इस दौरान कई नेताओं ने उन्हें फिर से पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने की मांग की है। कांग्रेस संगठन में बुजुर्ग बनाम युवा की खेमेबंदी इन दिनों साफ दिखाई देने लगी है। संगठन में पैदा हुआ पीढ़ियों का यह द्वंद अचानक इतना बढ़ गया है, इससे संगठन के कामकाज में असहजता पैदा हो गई है।
दरअसल, पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को राज्यसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी। बैठक में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने आत्मनिरीक्षण करने की सलाह क्या दी राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले एक युवा सदस्य ने उनका जोरदार विरोध किया। बैठक में शामिल एक नेता ने कहा राहुल गांधी के पूरी ताकत झोंकने के बाद भी यह हो रहा है।
पूर्व मंत्री चिदंबरम ने कहा कि पार्टी का जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठन बेहद कमजोर हो गया है। कपिल सिब्बल ने शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक के नेताओं को आत्मनिरीक्षण करने की सलाह दे डाली। उन्होंने कहा हमें पता करना चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। सिब्बल के इस बयान के बाद राज्यसभा सांसद और राहुल के करीबी राजीव सातव ने यह कहते हुए विरोध किया कि कोई भी आत्मनिरीक्षण तब से होना चाहिए जब हम सत्ता में थे।
उन्होंने कहा कि 2009 से 2014 तक की अवधि को केंद्र में रखते हुए आत्मनिरीक्षण किया जाना चाहिए। यही नहीं उन्होंने यूपीए सरकार में मंत्री रहे सिब्बल पर निशाना साधते हुए कहा उनके प्रदर्शन की भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा अगर यूपीए-2 में समय पर आत्मनिरीक्षण को महत्व दिया गया होता तो 2014 में कांग्रेस को 44 सीटें नहीं मिलती। कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने दावा किया कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने हालांकि यूपीए शासनकाल की बातों के दौरान दखल भी दिया।
राहुल के करीबी नेता ने कहा कि पार्टी यूपीए-2 कार्यकाल से ही मुसीबतें झेल रही है और 2009 से आत्मनिरीक्षण किया जाना चाहिए। बैठक में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, पी चिदंबरम, आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। जैसे ही बैठक आगे बढ़ी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने रणनीति और संगठन की कमजोरियों को दुरुस्त करने की बात कही। सांसद पीएल पुनिया, रिपुन बोरा और छाय वर्मा ने मांग की कि राहुल गांधी को फिर से पार्टी का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार कोरोना महामारी, चीन की आक्रमकता और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बुरी तरह फेल रही है। इसके बाद भी कांग्रेस की बात लोग गंभीरता से नहीं सुन रहे हैं। पार्टी के युवा और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले नेताओं में इस बात का भी अफसोस दिखाई दिया कि उन्हें एक-एक कर ठिकाने लगाया जा रहा है।
चाहे राजस्थान में सचिन पायलट हों या फिर मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया-ये दोनों नेता पार्टी के एक वर्ग द्वारा प्रताड़ित किए जाने की वजह से विद्रोही बने हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग द्वारा राहुल और उनके समर्थकों को एक-एक कर ठिकाने लगाया जा रहा है। इससे पार्टी संगठन बुरी तरह बिखराव का शिकार हो रहा है।

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