रोज कोरोना के रेकॉर्ड, क्या हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ़ा भारत?

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नई दिल्ली।दिल्ली और मुंबई में सीरो सर्वे के बाद उम्मीद जगी थी कि भारत में जारी कोरोना के कहर से शायद जल्द ही हर्ड इम्युनिटी की वजह से निजात मिल जाए। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि हर्ड इम्यूनिटी जैसी स्थिति आई भी तो वह छोटे-छोटे पॉकेट्स यानी कुछ खास इलाकों तक ही सीमित रहेगी, राष्ट्रीय स्तर पर नहीं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी यही बात कही है। मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने गुरुवार को कोरोना पर हुई ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि महामारी को शिकस्त देने के लिए भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में हर्ड इम्युनिटी कतई रणनीति नहीं हो सकती और देश में कम्यूनिटी स्प्रेड की स्थिति भी नहीं है।
कम्यूनिटी स्प्रेड की आशंकाओं में कोई दम नहीं: सरकार
सबसे पहले बात करते हैं स्वास्थ्य मंत्रालय ने हर्ड इम्युनिटी और कम्यूनिटी स्प्रेड पर क्या कहा है। उसके बाद देश के जाने-माने वैज्ञानिकों की क्या राय है, उस पर बात करेंगे। भारत में जिस तरह से हर दिन कोरोना के नए मामले नए-नए रेकॉर्ड बना रहे हैं, उसे लेकर कम्यूनिटी स्प्रेड की आशंका गहरा रही है। तो क्या देश में कम्यूनिटी स्प्रेड की स्थिति है? स्वास्थ्य मंत्रालय की माने तो बिल्कुल नहीं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया, क्या होता है कम्यूनिटी स्प्रेड
स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब भारत में कम्यूनिटी स्प्रेड के बारे में सवाल किया गया तो अधिकारी ने तथ्यों के साथ इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने बताया, ‘इससे पहले कि हम ये बहस करें कि कम्यूनिटी स्प्रेड हो चुका है या कम्यूनिटी स्प्रेड नहीं हुआ है, उससे पहले हमें जानना चाहिए कि यह होता क्या है। उसके बाद ही कोई सार्थक बहस हो सकती है। डब्लूएचओ ने कम्यूनिटी स्प्रेड की कोई परिभाषा नहीं दी है। वह अपने सदस्य देशों को कहता है कि आप अपने देश की परिस्थिति के हिसाब से बीमारी के स्प्रेड को कटैगराइज करें। इस व्यवस्था के तहत भारत ने भी इस बीमारी को कटैगराइज किया है। एपिडिमोलॉजी की किताबों के मुताबिक कम्यूनिटी स्प्रेड एक ऐसी स्थिति है जिसमें आप संक्रमण की कड़ी को तय नहीं कर पा रहे हैं। यानी किसने किसको संक्रमण दिया, यह तय करना असंभव हो जाए तो यह कम्यूनिटी स्प्रेड है।’
सिर्फ 50 जिलों में 80 प्रतिशत कोरोना केस
देश में कम्यूनिटी स्प्रेड की स्थिति नहीं है, इसे समझाते हुए अधिकारी ने बताया, ‘जहां तक भारत की बात है तो भारत में क्लस्टर ऑफ केसेज हैं और पॉकेट्स ऑफ लोकलाइज्ड ट्रांसमिशन (यानी स्थानीय स्तर पर संक्रमण, सामुदायिक स्तर पर नहीं) है। अगर आप भारत में कुल जिलों की संख्या देखें तो 2011 की जनगणना के मुताबिक 640 जिले थे। आज 739 जिले हैं। 50 जिले ऐसे हैं जहां कुल कोरोना केसों के 80 प्रतिशत मामले हैं। इसका मतलब है कि अन्य जिलों में केस बहुत कम हैं, बिखरे हुए हैं। इतने बड़े देश में जहां 138 करोड़ आबादी हो, 740 जिले हो और केवल 50 जिले 80 प्रतिशत केस के जिम्मेदार हों तो इसे कैसे कम्यूनिटी स्प्रेड कहा जा सकता है। 80 प्रतिशत केसों में आप 72 घंटे के भीतर आप न केवल संक्रमण का स्रोत ढूंढ पाते हैं बल्कि उनके क्लोज कॉन्टैक्ट्स को ढूंढ पा रहे हैं। अगर ऐसा हो रहा है तो आप कैसे कह सकते हैं कि कम्यूनिटी ट्रांसमिशन है?’
भारत में हर्ड इम्युनिटी पर क्या कह रहे हैं वैज्ञानिक
सीरो सर्वे के नतीजों के आधार पर पूरे देश में कोविड-19 के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, वैज्ञानिकों की तो यही राय है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर भारत में हर्ड इम्युनिटी विकसित हुई भी तो यह सिर्फ कुछ पॉकेट्स तक ही सीमित रहेगी। दरअसल हर्ड इम्युनिटी तब होती है जब बड़ी तादाद में लोग किसी संक्रामक बीमारी के प्रति इम्यून हो जाएं यानी उनमें संबंधित संक्रमण के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए। आम तौर पर 70 से 90 प्रतिशत आबादी के इम्यून हो जाने पर हर्ड इम्युनिटी की स्थिति होती है और संबंधित महामारी खत्म हो जाती है।
‘अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग समय पर आ सकती है हर्ड इम्युनिटी’
जाने-माने वायरोलॉजिस्ट और वेलकम ट्रस्ट के सीईओ शाहीद जमील बताते हैं, ‘नोवेल कोरोना वायरस की जहां तक बात है तो ऐसी कोई स्पष्ट संख्या नहीं है जिसके अधार पर हम कह सकें कि कितनी प्रतिशत आबादी के संक्रमित होने से हम हर्ड इम्युनिटी को हासिल कर लेंगे। कई एपिडेमोलॉजिस्ट्स का मानना है कि कोविड के मामले में यह 60 प्रतिशत के करीब होगी।’ उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग समय पर हर्ड इम्युनिटी के करीब पहुंचेंगे।
कैसे विकसित हुई हर्ड इम्युनिटी होगी जांच
बीएमसी ने बताया कि यह परिणाम हर्ड इम्युनिटी के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने में महत्वपूर्ण है। बीएमसी ने कहा कि इस संबंध में दूसरा सर्वे होगा जो कि वायरस के प्रसार और हर्ड इम्युनिटी विकसित हुई या नहीं इस पर जांच करेगा। यह सीरो सर्वे नीति आयोग, बीएमसी और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ने संयुक्त रूप से किया है।
हर्ड इम्‍युनिटी हासिल करना क्‍यों है मुश्किल?
जब कोरोना वायरस महामारी चीन से निकलकर दुनिया के बाकी हिस्‍सों में फैलना शुरू हुई तो यूनाइटेड किंगडम हर्ड इम्‍यूनिटी डेवलप करने के पक्ष में था। एक रणनीति यह थी कि 60 फीसदी आबादी को कोरोना होने दिया जाए ताकि हर्ड इम्‍युनिटी हासिल की जा सके। हालांकि बाद में इसे खारिज कर दिया गया। अब स्‍पेन का डेटा साफ दिखाता है कि कम्‍युनिटी ट्रांसमिशन वाले देश में केवल 5% आबादी ही ऐंटीबॉडीज डेवलप कर पाई है। यानी हर्ड इम्‍युनिटी की संभावना दूर-दूर तक नहीं है। जर्मन साइंटिस्‍ट्स ने दो बातें कही हैं। पहली ये कि वायरस से पूरी इम्‍युनिटी अभी नहीं मिल रही। कुछ महीनों से लेकर कुछ साल की इम्‍युनिटी डिवेलप हो रही है। दूसरा ये कि ये मरीज बाकी इम्‍यून फंक्‍शंस से प्रोटेक्‍टेड हैं या नहीं।
बिना लक्षण वाला कोरोना मुंबई में ज्यादा
निकाय अधिकारियों का दावा है कि सीरो सर्वे का यह परिणाम इस ओर इशारा करता है कि बिना लक्षण वाले संक्रमण की दर अन्य सभी प्रकार के संक्रमण से अनुपात में ज्यादा है। बीएमसी ने कहा कि हालांकि जनसंख्या में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में संक्रमण दर आंशिक रूप से ज्यादा है।
मुंबई के स्लम में इसलिए कोरोना केस ज्यादा
बीएमसी ने दावा किया कि झुग्गी क्षेत्रों में ज्यादा संक्रमण के पीछे यहां जनसंख्या घनत्व अधिक होना एक वजह हो सकती है क्योंकि लोगों को टॉइलट शेयर करने पड़ते हैं। नगर निकाय ने कहा कि सीरो सर्वे में पता चलता है कि संक्रमण से होने वाली मृत्यु दर काफी कम है और 0.5-0.10 फीसदी की रेंज में है।
क्या है हर्ड इम्युनिटी?
हर्ड इम्युनिटी एक प्रक्रिया है। इसमें लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। वह चाहे वायरस के संपर्क में आने से हो या फिर वैक्सीन से। अगर कुल जनसंख्या के 75 प्रतिशत लोगों में यह प्रतिरक्षक क्षमता विकसित हो जाती है तो हर्ड इम्युनिटी माना जाता है। फिर चार में से तीन लोग संक्रमित शख्स से मिलेंगे तो उन्हें न ये बीमारी लगेगी और न वे इसे फैलाएंगे। एक्सपर्ट मानते हैं कोविड-19 के केस में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने के लिए 60 प्रतिशत में रोग प्रतिरोधक क्षमता होनी चाहिए।
‘हर्ड इम्युनिटी आएगी भी सिर्फ कुछ पॉकेट्स में, पूरे देश में नहीं’
दिल्ली के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इम्युनोलॉडी में इम्युनोलॉजिस्ट सत्यजीत रथ भी जमील की बातों से सहमत हैं कि अभी नहीं पता कि कितनी प्रतिशत आबादी कोरोना से सक्रमित होगी तो हर्ड इम्युनिटी की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने कहा, ‘भारत में इतने सारे सामाजिक-आर्थिक समूह हैं कि हर्ड इम्युनिटी सिर्फ कुछ पॉकेट्स में विकसित होगी न कि पूरे देशभर में और यह कम समय के लिए होगी। इसलिए स्वाभाविक तौर पर पैदा होने वाली हर्ड इम्युनिटी का आईडिया भारत के लिए व्यावहारिक नीति नहीं हो सकती।’

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