प्रदेश में सामान्य से 11 फीसद कम बरसात ;17 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश

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भोपाल। मध्यप्रदेश में अभी तक सामान्य से 11 फीसद कम बरसात हुई है। 17 जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आने का सिलसिला शुरू हो गया है। इससे बुधवार से प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में रुक-रुक कर तेज बौछारें पड़ने का सिलसिला शुरू होने की संभावना है।
मौसम विज्ञान केंद्र से प्राप्त जानकारी के मुताबिक मंगलवार सुबह 8.30 बजे तक प्रदेश में सीजन की कुल 357.6 मिमी. बरसात हुई है जो सामान्य (399.8 मिमी.) से 11 फीसद कम है। प्रदेश के आलीराजपुर, धार, मंदसौर, श्योपुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, सागर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद और बालाघाट में सामान्य से कम वर्षा हुई है। हवा का रुख दक्षिणी होने से मिल रही नमी वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में दक्षिणी हवा चल रही है। इस वजह से प्रदेश में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नमी मिलने लगी है। साथ ही प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान बढ़ा हुआ है। इस वजह से ग्वालियर, चंबल, शहडोल, रीवा, भोपाल, जबलपुर संभाग के जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना बढ़ गई है।रुक-रुक कर बरसात का यह सिलसिला 31 जुलाई तक बना रह सकता है। उधर बंगाल की खाड़ी में बनने जा रहे एक चक्रवात से 3-4 अगस्त से अच्छी बरसात की उम्मीद की जा रही है।जुलाई माह में बरसात का क्रम थमा रहने से खरीफ की फसलों के तबाह होने की आशंका बढ़ गई है। विशेषकर धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। सोयाबीन की फसल का भी उत्पादन घटने का खतरा मंडराने लगा है। राजधानी के खजूरीकलां निवासी किसान मिश्रीलाल राजपूत ने बताया कि बरसात नहीं होने से धान की फसल सूखने लगी है। सोयाबीन में अभी फूल लगने लगे हैं, पानी नहीं मिलने के कारण कम फली लगने की संभावना है। यदि 3-4 दिन में बरसात नहीं हुई, तो फसल तबाह हो सकती है।

कृषि विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त कृषि संचालक डॉ. जीएस कौशल ने बताया कि बरसात नहीं होने पर सरकार को चाहिए कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति लगातार बनाए रखे। इससे जिन किसानों के पास सिंचाई का साधन है, वह अपनी फसल बचा सकें।उन्होंने बताया कि जहां फसल खराब हो रही है, वहां मक्का की बोवनी कर सकते हैं, ताकि नुकसान की कुछ भरपाई की जा सके। उन्होंने कहा कि वर्षा नहीं होने से किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। किसान खेत में कुलपा चलाएं, निंदाई करके कुछ नमी बढ़ा सकते हैं। वर्तमान में किसान सोयाबीन की दोबारा बोवनी करने की गलती नहीं करें।

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