उपचुनाव में ग्वालियर बनेगा पॉवर सेंटर,दोनों दल बनाएंगे वार रूम, कांग्रेस ने तैयार किया

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ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर प्रमुख दल कांग्रेस एवं भाजपा के नेता सियासी गोटियां फिट करने में लगे हुए हैं। उपचुनाव में इस बार ग्वालियर पॉवर सेंटर बरकर उभरेगा। चुनाव प्रचार से लेकर चुनावी रणनीति बनाने के लिए नेता भोपाल-दिल्ली की अपेक्षा ग्वालियर में डेरा डालेंगे। दोनों दलों ने अपना-अपना वार रूम बनाने का फैसला कर लिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने वार रूम से अनौपचारिक तौर पर काम भी शुरू कर दिया है।
उपचुनाव में प्रचार के लिए भाजपा एवं कांग्रेस के बड़े नेता उतरेंगे। चूंकि दोनों दलों का फोकस ग्वालियर-चंबल संभाग की 16 सीटों पर है। प्रचार के लिए मप्र सरकार के सभी मंत्री, भाजपा विधायक एवं सांसद उतरेंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही मप्र भाजपा की ओर से चुनाव में उनकी ड्यूटी लगा दी जाएगी। ग्वालियर में डेरा डालकर नेता इन क्षेत्रों में आसानी से प्रचार कर सकेंगे और पार्टी नेता एवं आम लोगों से भी मुलाकात कर सकेंगे। यही वजह है कि अब बड़े नेता उपचुनाव के दौरान कुछ दिन ग्वालियर में ठहरेंगे।
ग्वालियर में रहेगी हेलिकॉप्टर की व्यवस्था
उपचुनाव में जमकर पैसा खर्च होने वाला है। दोनों दल प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। चूंकि लॉकडाउन की वजह से अभी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजनीतिक कार्यक्रमों को छूट नही दी है। इसलिए राजनीतिक दल वर्चुअल रैलियों के माध्यम से काम चला रहे हैं। जैसे ही राजीनीतिक कार्यक्रमों को लॉकडाउन से छूट मिल जाएगी। उपचुनाव वाले क्षेत्रों में राजनीतिक घमाचौकड़ी शुरू हो जाएगी। चुनाव प्रचार के लिए कांगे्रस, भाजपा एवं बसपा के नेता दिल्ली, भोपाल एवं अन्य शहरों से आएंगे। उनके लिए ग्वालियर से ही विधानसभा क्षेत्रों में जाने के लिए हेलिकॉप्टर की व्यवस्था रहेगी।
——————————- कांग्रेस की बड़ी तैयारी ———————————————–

ग्वालियर में होगा प्रदेश कांग्रेस कार्यालय

ग्वालियर।24 विधानसभाओं में होने वाले उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। जहां एक ओर भाजपा ने वर्चुअल रैलियों के माध्यम से शुरू कर दी है तो कांग्रेस अगले हफ्ते तक एक्शन मोड में आ जायेगी। फिलहाल कांग्रेस ने मंथन का दौर कर दिया है। इसकी वजह भी है 22 विधानसभा क्षेत्रों में उसे नये तरीके से पार्टी खड़ी करनाी है। यह वही विधानसभा क्षेत्र हैं। जिनके कांग्रेस विधायक इस्तीफा देने के बाद भाजपा में शामिल हो गये हैं और प्रदेश में कमलनाथ सरकार के पतन के बाद भाजपा सरकार बन गयी। 24 विधानसभा चुनाव में से 22 विधानसभाओं में कांग्रेस विधायकों द्वारा इस्तीफ देने से खाली हुई है। 2 सीटे विधायकों के निधन की वजह से खाली हुई।
भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रभाव वाली ग्वालियर-चंबल अंचल की 16 सीटों पर कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा चरमरा गया है, जिसे नए सिरे से खड़ा करना पार्टी के लिए चुनौती बन गया है। इसे देखते हुए फैसला लिया गया है कि उपचुनाव होने तक पार्टी का चुनाव मुख्यालय भोपाल के बजाए ग्वालियर में रखा जाए, ताकि हर एक सीट की राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी रखी जा सके।
कमलनाथ के लिए आलीशान बंगले की तलाश

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए ग्वालियर में एक आलीशान बंगले की तलाश की जा रही है। 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के बाद कमलनाथ ग्वालियर में ही रहेंगे। इसकी वजह भी है, ग्वालियर-चंबल संभाग में ही सबसे ज्यादा 17 सीटों पर उपचुनाव होना है। (16 सिंधिया समर्थक और एक विधायक के निधन से रिक्त विधानसभा क्षेत्र) कमलनाथ का फोकस भी इन्हीं विधानसभा क्षेत्रों पर रहेगा।

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