निगमायुक्त संदीप माकिन का बड़ा कारनामा …. परिषद का अंकुश हटते ही भ्रष्टाचार की झड़ी , 14 करोड़ का घोटाला

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– गार्बेज टैक्स के नाम पर चौतरफा घिरे निगमायुक्त संदीप माकिन
-निगमायुक्त की कार्यशैली से नगर निगम में हडकंप
ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
निगमायुक्त संदीप माकिन के काले कारनामों को लेकर शहर के राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों भूचाल सा आया हुआ है। नगर निगम परिषद का कार्यकाल पूरा होने के बाद से निगम में पसरे भीषण भ्रष्टाचार एवं चौतरफा लूटखसोट से जुड़े तमाम मामलों के अब परत दर परत होते खुलासों से हड़कंप का माहौल है। इनमें से कई मामले अब निगम प्रशासक से लेकर लोकायुक्त तक पहुंच चुके है। वहीं कई मामले जल्द उजागर होने वाले है जिनको लेकर निगमायुक्त पर शिकंजा कसने के आसार बन सकते है। उधर शहर की जनता पर गार्बेज टैक्स के नाम पर भारी भरकम बोझ डालने के मामले में भी निगमायुक्त चौतरफा घिर चुके है।
जानकारी के अनुसार संदीप माकिन ने अपने भ्रष्ट मंसूबों को साकार किए जाने की शातिर योजना पर उस समय तेजी से काम शुरू कर दिया जब सांसद बनने के बाद तत्कालीन महापौर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया इसके बाद विगत 10 जनवरी को निगम परिषद का कार्यकाल पूरा होते ही पूरी तरफ बेलगाम निगमायुक्त ने चौतरफा लूटखसोट मचा दी। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान के बजट का बंदरबांट करने के लिए सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण में 7 करोड़ 54 लाख रुपए के टेंडरों को मनमाने तरीके से ठिकाने लगाने में अपनी पूरी गैंग को लगा दिया। यह गंभीर मामला अब लोकायुक्त तक पहुंच चुका है साथ ही इस तरह की हिमाकत को लेकर सरकार भी जल्द कड़ी कार्रवाई कर सकती है। इसी तरह अब किराए पर वाहन लेने के नाम पर भी 6.5 करोड़ रुपए से ज्यादा का सनसनीखेज घोटाला सामने आया है।
गायब कराया रिकॉर्ड
नगर निगम में वाहन किराए के नाम पर भारी भरकम घोटाले का खुलासा हाल में उस समय हुआ जब इसके भुगतान को लेकर निगम प्रशासक से मंजूरी लेने की कोशिश की गई। खास बात ये है कि 6.5 करोड़ से ज्यादा के बिलों के भुगतान के लिए फाइल चलकर निगम प्रशासक तक पहुंच गई और पीछे से इससे जुड़ा सारा रिकॉर्ड गायब करा दिया। इस घोटाले का पर्दाफाश होने के डर से रिकॉर्ड गायब हुए 3 महीन से अधिक समय हो चुका है लेकिन इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बचाते रहे निगमायुक्त अब पूरी तरह लीपापोती में लग गए है। इस पूरे मामले में कार्यशाला प्रभारी श्रीकांत कांटे के खिलाफ कोई एक्शन लेने के बजाय उल्टे दस्तावेजों को गायब कराने के नाम पर निगमायुक्त द्वारा खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
सबसे बड़ा कारनामा सार्वजनिक शौचालय घोटाला
निगमायुक्त माकिन के भ्रष्टाचार की ताजा कडि़यों में सबसे बड़ा कारनामा सार्वजनिक शौचालय घोटाले के रूप् में सामने आया है। गंभीर बात ये है कि अति आवश्यक कार्य बताकर किए गए 7 करोड़ 54 लाख रुपए के टेंडर को हुए 9 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन अब तक शहर भर में इनमें से एक भी शौचालय तैयार नहीं हुआ। ऐसे में सवाल ये उठता है कि निगमायुक्त ने जब यह कहते हुए टेंडर लगाया था कि शौचालय निर्माण बहुत ही जरूरी है तो फिर बजट का बंदरबांट करने के बाद इस ओर अब तक कोई ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
घोटाले को दबाने- वर्कशॉप प्रभारी श्रीकांत ने कहा फाइल गुम हो गई
वर्कशॉप के जरिए 6.5 करोड़ के वाहन मशीनरी के भुगतान की फाइल जब निगम प्रशासक के पास पहुंची तो उन्होंने निगम अधिकारियों से यह जानकारी मांगी कि जिस दर पर वाहन लिए गए है उससे जुड़ी पुराने टेंडर की फाइल लेकर प्रस्तुत की जाए। इसको लेकर वर्कशॉप से जुड़े अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। निगमायुक्त की निगरानी में किए गए इस घोटाले को दबाने के लिए वर्कशॉप प्रभारी श्रीकांत कांटे ने कहा कि वो फाइल गुम हो चुकी है। इस बीच खुद को फंसता देख निगमायुक्त अब पूरे मामले को रफादफा करने की गोटियां सेट करने में जुट गए है।

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