मप्र में 24 सीटों के उपचुनाव के लिए सज गया रण;जमीनी तैयारी में भाजपा से पिछड़ी कांग्रेस

0
16

भोपाल। मप्र में 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए रण सज गया है। भाजपा और कांग्रेस के नेता चुनाव वाले क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। जहां तक अभी तक की स्थिति की बात है तो भाजपा जमीनी तैयारी में कांग्रेस से आगे है। ये उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए काफी अहमियत वाले हैं, क्योंकि भाजपा अधिक से अधिक सीटें जीतकर अपनी सरकार को मजबूती प्रदान करेगी, वहीं कांग्रेस सत्ता में आने की कोशिश करेगी।
मध्यप्रदेश में होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा जहां पूरी तरह चुनावी मोड में है, पार्टी जनसंवाद के नाम से कर रही वर्चुुअल रैली के जरिए लोगों तक मोदी सरकार के कामकाज को पहुंचा रही है तो मार्च में पार्टी में शामिल होने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी भाजपा के मंच पर अपनी एंट्री कर दी है। वहीं कांग्रेस में उतनी सक्रियता नहीं दिख रही है।
-कांग्रेस संगठन के मोर्चे पर जूझ रही
उपचुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस अब भी संगठन के मोर्चे पर जूझ रही है। सूत्र बताते हैं कि उपचुनाव में उम्मीदवारों को लेकर कमलनाथ ने अपने स्तर पर जो सर्वे कराया था उसमें अब तक पार्टी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने की रिपोर्ट मिली हैं, इसके साथ सर्वे में भाजपा के संभावित उम्मीदवारों के खिलाफ कोई मजबूत नाम भी सामने नहीं आ पाया है।
-सिंधिया बढ़ाने लगे सक्रियता
24 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में 16 सीटें उस ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से आती है जहां पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का खासा दबदबा है और इन सीटों पर कांग्रेस अब तक मजबूत उम्मीदवारों का चयन ही नहीं कर पाई है। इन सभी सीटों पर जहां भाजपा के उम्मीदवार करीब-करीब तय है वहीं कांग्रेस अभी उम्मीदवारों की तलाश में भी जुटी है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी ने चुनाव से पहले जो आंतरिक तौर पर सभी सीटों पर जो सर्वे कराया था उसमें इन विधानसभाओं में संगठन स्तर पर भी पार्टी को जूझना पड़ रहा है। कांग्रेस हाईकमान ने पिछले विधानसभा चुनाव में प्रभारी महासचिव के नेतृत्व में चार राष्ट्रीय सचिवों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्से की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन सचिवों को जगह-जगह बैठकें करके संगठन की क्षमता के साथ जनाधार वाले नेता की खोज की जिम्मेदारी भी थी। ये प्रभारी सचिव सीधे पार्टी हाईकमान से जुड़े हुए थे। कारगर रणनीति के चलते कांग्रेस डेढ़ दशक बाद राज्य में सत्ता में लौटी थी।
कांग्रेस की तैयारी सुस्त
राज्य में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस उपचुनावों की तैयारी में जुटी हुई है। लेकिन उसकी रफ्तार सुस्त है। पार्टी प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा का कहना है कि कांग्रेस उपचुनाव पूरी क्षमता और ताकत से लड़ेगी साथ ही सत्ता में वापसी करेगी, क्योंकि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को पांच साल के लिए जनादेश दिया था। वहीं, दलबदलू को सबक भी सिखाएगी। पार्टी सक्षम और चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों का सर्वे करा रही है। पार्टी में हुई बगावत के बाद जिन 24 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने वाले हैं, वहां पर कांग्रेस की पहली पंक्ति के नेताओं का टोटा है, क्योंकि वे सभी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इन विषम परिस्थितियों में पार्टी ने राष्ट्रीय महासचिव पद पर बदलाव किया है। दीपक बावरिया की जगह मुकुल वासनिक को कमान सौंपी है। दूसरी ओर, प्रभारी सचिवों में दो को बदला है। दो सचिव सुधांशु त्रिपाठी और संजय कपूर पूर्ववत हैं।
जनाधार वाले उम्मीदवार की तलाश
कांग्रेस के लिए उपचुनाव में बड़ी चुनौती ग्वालियर-चंबल से बाहर के इलाकों में है। पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़े, इसके लिए संगठन को और मजबूत करने के साथ जनाधार वाले उम्मीदवार की तलाश भी आवश्यक है। पार्टी ने पूर्व से कार्यरत राष्ट्रीय सचिव सुधांशु त्रिपाठी और संजय कपूर को सात-सात विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं नए प्रभारी सचिवों पीसी मित्तल और कुलदीप इंदौरा को पांच-पांच विधानसभा क्षेत्रों का प्रभार दिया गया है। पार्टी ने जिन सचिवों को विधानसभा क्षेत्रों का प्रभारी बनाय है, उनमें से सुधांशु त्रिपाठी अब तक मुरैना जिले की उपचुनाव वाली सीटों कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुके हैं और भिंड में बैठकों का दौर शुरू हो रहा है। त्रिपाठी संगठन की स्थिति के साथ क्षेत्र के जनाधार वाले नेता की तलाश कर रहे हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो उपचुनाव में कांग्रेस को सबसे बड़ी चुनौती जनाधार वाले उम्मीदवार की है, क्योंकि जिन स्थानों पर उपचुनाव होना है, वहां पार्टी से बड़े और क्षेत्रीय नेता भाजपा में जा चुके है। लिहाजा, कांग्रेस को नए चेहरों पर दाव लगाना होगा, दल-बदल कर कई नेता आएंगे, मगर वे जीत दिला पाएंगे इसमें संदेह रहेगा। यही कारण है कि कांग्रेस ने अभी से जमावट शुरू कर दी है और जमीनी हकीकत को समझा जा सके।

LEAVE A REPLY