साल भर में सब्सिडी वाली रसोई गैस की कीमतें 20 फीसदी बढ़ीं, जबकि कच्चा तेल 40 फीसदी हो गया सस्ता

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नई दिल्ली। पिछले साल में रसोई गैस की कीमतें करीब 20 फीसदी तक बढ़ गई हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमत में करीब 40 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। कुछ ग्राहक अभी भी मामूली सब्सिडी पा रहे हैं, कुछ के लिए अब सब्सिडी भी जीरो हो चुकी है, क्योंकि फाइनल कीमत लोकल ट्रांसपोर्टेशन के बाद निर्धारित होती है। हर महीने सब्सिडी वाले सिलेंडर की बढ़ती कीमत और गिरती ग्लोबल कीमतों से सब्सिडी खत्म हो गई है। मार्च में ही केरोसीन की सब्सिडी खत्म हुई और अब एलपीजी गैस पर सब्सिडी खत्म होने से सरकार को काफी राहत मिली है, क्योंकि सरकार के लिए पैसे जमा कर पाने में दिक्कत हो रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक ट्विटर हैंडल से ये पता चला है कि मई और जून के बाद से कोई सब्सिडी नहीं रहेगी। ट्विटर हैंडल पर ग्राहक की शिकायत पर जवाब देकर कहा गया था कि 1 मई 2020 से एलपीजी गैस की कीमतें काफी कम हुई हैं और वह सब्सिडी वाली गैस की कीमत के बेहद करीब पहुंच चुकी है। मई 2020 में किसी भी ग्राहक को सब्सिडी ट्रांसफर नहीं की जानी है। जब भविष्य में कीमतों में कुछ उतार-चढ़ाव होगा,तब कीमतें खुद ही एडजस्ट कर दी जाएंगी।
इंडस्ट्री के अधिकारी ने कहा कि सब्सिडी सभी ग्राहकों के लिए जीरो नहीं हुई है, कुछ ग्राहकों को 10-12 रुपए की सब्सिडी का भुगतान भी किया गया है। साल भर में एलपीजी का मार्केट प्राइस 737.5 रुपए से घटकर 593 तक आ गया। इसी दौरान सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 96 रुपए बढ़कर 593 रुपए तक पहुंच गई हैं। जिन लोगों ने गैस सिलेंडर उज्ज्वला योजना के तहत लिया है, उनके लिए कीमतें 8 रुपए बढ़ीं, जबकि अन्य लोगों के लिए ये बढ़ोतत्तरी 29 रुपए रही। कुल 28 करोड़ एलपीजी ग्राहकों में से करीब 1.5 करोड़ ग्राहक सब्सिडी नहीं लेते हैं और बाकी लगभग 8 करोड़ उज्जवला योजना के तहत सिलेंडर इस्तेमाल कर रहे हैं। 2019-20 में एलपीजी सब्सिडी 22,635 करोड़ रुपए ररही, जो उससे पिछले साल 31,447 करोड़ रुपये से काफी कम थी।

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