हिज्ब-जैश की पुलवामा-2 दोहराने की साजिश नाकाम, कार IED बनाने वाले आतंकियों की भी हुई पहचान

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने पुलवामा जैसे बड़े आत्मघाती हमले की एक और साजिश को नाकाम किया है। सेना ने पुलवामा के आयन गुंड इलाके से आईईडी से लैस सैंट्रो कार बरामद की। जिसे बाद में बम निष्क्रिय दस्ते ने सुरक्षित तरीके से नष्ट किया। कार में लगाई गई आईईडी का वजन 45 किलो के आसपास था। यह आईईडी से लैस कार आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद के सदस्यों ने तैयार की थी।
प्राथमिक जांच में सुरक्षाबलों ने इसमें शामिल दो आतंकियों की पहचान जाहिर की है। इनमें से एक आदिल है, जो जैश और हिज्ब दोनों के लिए काम करता है। बताया जा रहा है कि यह कार वही चला रहा था। उसके साथ कार में पाकिस्तानी आतंकी फौजी भाई भी था। वह भी जैश के लिए काम करता है। यही नहीं आईईडी तैयार करने वाले आतंकी का भी सुरक्षाबलों ने पता लगा लिया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह आईईडी पाकिस्तानी आतंकी वलीद ने तैयार की थी। ए-श्रेणी का आतंकवादी वलीद उर्फ मूसा उर्फ इदलीस घाटी में वर्ष 2015 से सक्रिय है।
आइजीपी विजय कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि दक्षिण कश्मीर के जिला पुलवामा में सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए ही हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद ने मिलकर यह आईईडी से लैस यह वाहन तैयार किया था। इस वाहन में लगी आईईडी का वजन कम से कम 40 से 45 किलोग्राम के करीब था। सुरक्षाबलों की चौकसी और समय पर उठाए गए कदमों ने बड़ी त्रासदी को टाल दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा एजेंसियों-पुलिस, सेना और सीआरपीएफ को पिछले कई दिनों से संभावित फिदायीन हमले के बारे में इनपुट मिल रहे थे।
उन्होंने बताया कि गत बुधवार को हमें यह पक्की जानकारी मिली कि आतंकी हमले के लिए तैयार वाहन को ठिकाने से बाहर निकाल रहे हैं। सूचना के आधार पर जिला पुलवामा के विभिन्न इलाकों में विशेष नाके स्थापित कर दिए गए। आत्मघाती हमलावर जिस कार में बैठे थे, उसे दो नाकों पर रोका गया, चेतावनी के तौर पर गोलीबारी भी की गई परंतु वहां से फरार हो गए। हालांकि, सुरक्षाबल उनके पीछे थे। पुलवामा के अयानगुंड के राजपोरा इलाके में कल देर रात आतंकी वाहन छोड़ वहां से फरार हो गए।
कार में लगी थी 40 से 45 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री:
आतंकियों की तलाश कर रहे सुरक्षाबलों को वीरान जगह में खड़ी की गई इस कार के बारे में सूचना मिली। जवानों ने इलाके की घेराबंदी करते हुए आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया। इस बीच बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया। वाहन की जांच करने पर दस्ते ने पाया कि कार कम से कम 40 से 45 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री से भरी हुई है। इसमें अमोनियम नाइट्रेट, आरडीएक्स और अन्य सामग्री शामिल थी। कार को दूसरी जगह ले जाना संभव नहीं था, लिहाजा उसे वहीं नष्ट करने का निर्णय लिया गया। दस्ते ने बड़े सुरक्षित ढंग से कार में विस्फोट किया। विस्फोट के दौरान कार के परखचे जमीन से 50 मीटर ऊपर हवा में उड़े।
आतंकी आदिल की हुई पहचान:
आइजीपी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी आदिल की पहचान कर ली है। आदिल हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करता है। बताया जा रहा है कि यह कार वहीं चला रहा था। उसके साथ फौजी भाइ नामक एक दूसरा आतंकी भी मौजूद था, जो पाकिस्तानी है आैर हिज्ब से संबंध रखता है। इसके अलावा आइईडी तैयार में पाकिस्तानी आतंकी वलीद का नाम आ रहा है। ए-श्रेणी का यह आतंकवादी वलीद उर्फ मूसा उर्फ इदलीस घाटी में वर्ष 2015 से सक्रिय है। दरअसल ये वाहन उन्होंने रमजान माह के 17वें दिन यानी जंग-ए-बद्र पर आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया था परंतु सुरक्षाबलों की चौकसी की वजह से वे उस दिन हमले को अंजाम नहीं दे पाए।
सैन्य कानवाई को बनाना था निशाना:
माना जा रहा है कि पुलवामा में 2019 जैसी एक और आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए इस कार का इस्तेमाल किया जाना था, लेकिन सुरक्षाबलों की सतर्कता से इसे टाल दिया गया। सूत्रों की मानें तो आतंकियों को इस बात की सूचना मिली थी कि जम्मू से एक दो दिन के भीतर कोईसैन्य टुकड़ी घाटी आ रही है। सैन्य टुकड़ी में 20 से 25 वाहन शामिल होते हैं और इनमें 400 के करीब जवान भी मौजूद होते हैं। वारदात को अंजाम देने के लिए ही आतंकी वाहन को ठिकाने तक पहुंचाने के लिए निकले थे। परंतु अंजाम तक पहुंचने से पहले ही उन्हें वाहन छोड़कर वहां से फरार होना पड़ा।
नंबर प्लेट पर कठुआ का नंबरः
जिस वाहन में यह आईईडी मिली है, उस पर लगी फर्जी नंबर प्लेट पर कठुआ का नंबर लिखा हुआ है। कार पर जेके-08B 1426 नंबर की प्लेट लगी है, जो कि कठुआ का नंबर है। यह रजिस्टर नंबर Hero Glamour motorcycle का है। हीरानगर पुलिस ने मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया है, जबकि उसके मालिक से पूछताछ भी की जा रही है। जम्मू संभाग के जिला कठुआ का हीरानगर इलाका सीमांत क्षेत्र है और यहां के हीरानगर इलाके को पाकिस्तानी घुसपैठ के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इस कार में विस्फोटकों के मिलने के पीछे किसी पाकिस्तानी साजिश का शक भी जताया जा रहा है।

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