पैकेज्ड पानी बनाने वाली 300 फैक्ट्रियां ठप,दस हजार मजदूर खाली बैठे

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कारोबारियों ने ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड से लाइसेंस फीस माफ करने की मांग
भोपाल । प्रदेश में लॉकडाऊन एवं कफ्र्यू के कारण लोगों के लिए शुद्ध एवं शीतल आरओ का पानी उपलब्ध कराने वाली करीब 300 यूनिट पिछले करीब ढाई माह से ठप पड़ी हुई हैं। इन ओद्यौगिक इकाईयों में काम करने वाले करीब 10 हजार मजदूर भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। प्रतिवर्ष लगभग 250 से 300 करोड़ का कारोबार करने वाले इन उद्योगों को अब भारत सरकार के ब्यूरों ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड को लायसेंस फीस के रूप में एक लाख 2 हजार 300 रू. का भुगतान करना बाकी है जबकि इस वर्ष ग्रीष्म काल में इन इकाईयों में तालाबंदी के कारण एक पैसे का भी कारोबार नहीं हो पाया है।
मध्यप्रदेश पैकेज ड्रिंकिंग वाटर मेन्यूफेक्चरर्स एसो. के अध्यक्ष राम प्रताप सिंह गौतम एवं सचिव हुकमचंद अग्रवाल ने बताया कि इस बार लॉकडाऊन एवं कफ्र्यू के कारण राज्य में विवाह एवं अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम पूरी तरह बंद पड़े हुए हैं। करीब 300 इकाईयां प्रदेश में पैकेज्ड पानी की आपूर्ति करती है। इसके लिए प्रत्येक इकाई में 15 से 20 कर्मचारी सेवारत रहे हैं। इनके अलावा वाहनों से पानी की आपूर्ति करने वाले लगभग 10 कर्मचारी प्रत्येक इकाई में कार्यरत है। चूंकि गत 22 मार्च से राज्य की सभी इकाईयां पूरी तरह बंद पड़ी हैं, इसलिए इस वर्ष पैकेज्ड पानी की एक पैसे की भी बिक्री नहीं हो पाई हैं। जबकि प्रतिवर्ष करीब 250 से 300 करोड़ रू. का कारोबार होता रहा हैं।
तो नहीं मिलेंगे पानी के खरीददार
ग्रीष्मकाल पूरी तरह से गुजरने की स्थिति में आ गया है और अगले माह मानसून भी दस्तक दे देगा, तब यदि ये इकाईयां शुरू भी हो गई तो पानी के खरीददार नहीं मिलेंगे। इस भारी नुकसान के बावजूद भारत सरकार के ब्यूरों ऑफ इंडियन स्टेंडर्ड को प्रतिवर्ष अपना लाइसेंस नवीनीकृत कराने के लिए प्रत्येक यूनिट को एक लाख दो हजार तीन सौ रू. का शुल्क चुकाना होता है। इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से वसूला जाता है। इस वर्ष की दयनीय स्थिति को देखते हुए एसो. ने ब्यूरो के भोपाल स्थित प्रांतीय निर्देशक से मांग की है कि जिस तरह केंद्र सरकार के ही खाद्य संरक्षण(फूडसेफ्टी) से जुड़े एफएसएसएआई ने अपनी वैधता अवधि तीन माह बढा दी है, उसी तरह भारतीय स्टेंडर्ड ब्यूरो को भी राज्य की इन इकाईयों के लायसेंस की अवधि तीन माह बढ़ा देने का निर्णय ले कर राहत प्रदान करना चाहिए। वर्तमान में पैकेज्ड पानी की इकाईया जिस दुर्दशा की शिकार है, उसे देखते हुए केंद्र सरकार को विशेष पैकेज भी लागू करना चाहिए ताकि फेक्ट्री संचालक के साथ काम करने वाले श्रमिकों को भी राहत मिल सके।

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