21 दिनों में तो भुखमरी से मर जाएगा गरीब,कर्फ्यू के बाद लुटने विवश है जनता

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जबलपुर। शहर में अचानक कोरोना के मरीजों के सामने आने के बाद आनन-फानन में जिला प्रशासन द्वारा अचानक लॉक डाउन और बाद में अघोषित कर्फ्यू का निर्देश तो जारी कर दिया गया लेकिन बगैर पूरी तैयारी के जारी निर्देशों पर प्रशासन के आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। लॉकडाउन और कर्फ्यू की मार झेल रही जनता उस समय ठगी सी रह गई जब अचानक समूचे देश को 21 दिनों के लिए लॉकडाउन करने के निर्देश पीएम ने दे दिए। पीएम के बाद सीएम ने इस कोरोना से लडऩे साहसिक कदम तो बताया है लेकिन दोनों के संदेशों में इस बात का कोई उल्लेख नहीं कि आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ रोज कमाने खाने वालों की भूख किस तरह मिटेगी। 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद शहर के बुद्धिजीवी वर्ग से यह आवाज आई कि रोज कमाने खाना वाला आदमी कोरोना से भले ही बच जाए लेकिन इस अवधि में वह भूख से जरूर मर जाएगा।
प्रशासन के निर्बाध आपूर्ति के दावों की खुली पोल
अत्यावश्यक सेवाओ के नाम पर जिला प्रशासन द्वारा बगैर व्यापारियों, सब्जी व्यापारिक संगठनों की बैठक लिए अचानक ही लॉकडाउन और कर्फ्यू के निर्देश जारी कर दिए। अकुशल प्रशासन के इस कदम से व्यापारी वर्ग में रोष है। सीमाएं सील होने की वजह से जहाँ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में दिक्कत जा रही हैं वहीं जब वस्तुएं व्यापारियों तक ही न पहुंचेंगी तो आम आदमी की पहुंच में कैसे आ पाएंगी यह चिंतन का विषय है। किराना के साथ सब्जियों की किल्लत आम आदमियों को रुलाने लगी है, यह समस्या धीरे-धीरे और विकराल रूप ले सकती है। प्रशासन की समय रहते आंख न खुली तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।
जनता को लूटने में कसर नहीं छोड़ रहे कुछ व्यापारी
अत्यावश्यक सेवाओं के नाम पर न सिर्फ कुछ दवा व्यवसायियों ने शहर की जनता को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी बल्कि किराना और सब्जी व्यापारी भी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति न होने के नाम पर मनमानी कीमतों पर सामग्री बेच रहे हैं। सैनीटाइजर और मास्क तो दोगुनी, चौगुनी कीमतों पर बिक ही रहा था अचानक डेटॉल शहर से गायब ही हो गया। शहर में आवश्यक वस्तुओं को जुटाने लॉक डाउन में छूट मिलते ही नागरिक जुट रहे हैं और चीजों को व्यापारी द्वारा निर्धारित मनमाने दामों पर खरीदने विवश हैं। दवा, सब्जी और किराना व्यापारियों की जहॉ मौज है वहीं शहर में रोज कमाने खाने वालों के हालात बद से बद्तर होते जा रहे हैं। होटलों और ढ़ाबों पर पूरी तरह आश्रित लोग इनके बंद रहने की वजह से भोजन से भी वंचित हैं। हालांकि उनका कहना है कि ढ़ाबे खुले भी होते तो खाना खरीद के खाने के लिए उनके पास रुपए नहीं थे। लॉक डाउन की वजह से काम न मिलने से उनके हाथ खाली हैं। एक दो दिनों तक कुछ सामाजिक संस्थाओं ने इनका पेट भरने का प्रयास भी किया लेकिन फिर किराना और सब्जी आदि के अभाव में उन्होंने भी जनहित में निशुल्क भोजन वितरण ज्यादा समय तक नहीं कर पाए।
डॉक्टर स्प्रिट के बाद गायब हुआ डेटॉल
डॉक्टर स्प्रिट तो लगभग गायब थी जबकि सैनिटाईजर के नाम पर भी दवा व्यापारियों ने प्रिंट रेट से अधिक कीमतों पर लाभ कमाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे इसी बीच शहर के दवा मार्केट से अचानक डेटाल गायब हो गया। आलम ये है कि पहले लॉक डाउन और अब कफ्यू की छूट के दौरान बाजार में भगदड़ का सा माहौल निर्मित हो रहा है। मुख्य किराना दुकानदारों के द्वारा सामान न आने की व्यथा भी बताई जा रही है वहीं आपूर्ति के लिए गली मौहल्लों की कुलियों में छुटपुट किराना व्यवसायी मनमानी कीमतों पर सामान बेच रहे हैं। जनता को यह चिंता सता रही थी कि न जाने कितने दिनों तक दुकानें खुलें वे इस लूट का मौन होकर शिकार होते रहे और दवा कारोबारियों, सब्जी कारोबारियों के साथ कुछ व्यवसायियों ने इस घड़ी में भी मुनाफा कमाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
सब्जियों के दोगुने, चौगुने हुए दाम
पहले लॉकडाउन औ बाद में कर्फ्यू की घोषणा के बाद शहर की सब्जी मंडियों में जो भगदड़ और हड़कंप का माहौल निर्मित हुआ वह अब कम देखा जा रहा है क्योंकि हर कोई दोगुनी और चौगुनी कीमतों पर सब्जियां खरीदने सामथ्र्य नहीं जुटा पा रहा है। आम दिनों की अपेक्षा बहुत कम भीड़ हर मंडी में देखी गई। सब्जियों के दाम दुगने से ज्यादा हो गए हैं। मुनाफाखोरी के चलते 5 से 20 रुपए तक सभी सब्जियों के भाव बढ़ गए हैं। धनिया जहॉ 100 रुपए किलो तो टमाटर 50 रुपए किलो कीमत पर बेचा जा रहा है। आलू प्याज में भी 10 से 20 रुपए की बढ़त केवल लॉकडाउन की घोषणा ने कर दी। हालांकि जिला प्रशासन लोगों को बता रहा है की किसी भी परिस्थिति में आवश्यक वस्तुओं जैसे दवा दूध सब्जी आदि को बंद नहीं किया जाएगा आपूर्ति इनकी निर्बाध जारी रहेगी लेकिन इन दावों की पोल बाजार पहुंचते ही खुल जाती है।
आपूर्ति ही नहीं तो क्यों न बढ़ें कीमतें
व्यापारियों का कहना है कि किसान जिलों की सीमाएं सील होने की वजह से मंडी आ ही नहीं पा रहे हैं। आलम ये है कि सीमाओं पर खड़े वाहनों में सब्जियां सड़ रहीं और उन्हें शहर में प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा है लिहाजा सड़ी हुई सब्जियां परिवहन न होने के चलते फेंकी जा रही हैं। यहीं हाल किराना सामग्री का है किराना व्यवसायियों की मानें तो पहले लॉकडाउन और फिर कर्फ्यू की घोषणा के साथ शहर की सीमाओं को सील किए जाने से किराना का दूसरे राज्यों से आने वाला सामान राज्यों के साथ शहर की सीमा पर अटका पड़ा है जिसे परिवहन की अनुमति नहीं दी जा रही है। यही नहीं पहले लॉकडाउन और बाद कफ्र्यू की घोषणा से लोगों के द्वारा जरुरत से ज्यादा सामग्री की खरीदी की वजह से दुकानों में ज्यादा माल नहीं है। जो उपलब्ध है उसकी कीमत नहीं बढ़ाकर बेचेंगे तो लोग आवश्यकता से अधिक ले जाएंगे। यही वजह है कि वे अधिक कीमतों पर माल बेच रहे हैं। सब्जी व्यापारियों का भी यही तर्क है कि लोगों के जरुरत से ज्यादा खरीदी के चलते मांग और आपूर्ति का गणित बिगड़ चुका है आपूर्ति न होने से सब्जियों की कीमत आसमान छू रही है। सब्जी व्यापारियों का कहना है कि वे भी बढ़ी हुई कीमतों पर माल खरीदने विवश हैं।
खूब बिक रही सरकारी निजी कंपनियों की बीमा पॉलिसी
वर्तमान परिदृश्य में लोगों को पहली बार ऐसा लग रहा है कि वे कल हों न हों, लिहाजा मौके का फायदा उठाकर निजी और सरकारी बीमा कंपनियों के विज्ञापन भी धड़ल्ले से आ रहे हैं। बीमा अदायगी में डिफॉल्टर से डिफॉल्टर कंपनियां भी तत्काल भुगतान का दंभ भर रहीं हैं। सक्षम व्यक्तियों द्वारा मरता क्या न करता की तर्ज पर बीमा पॉलिसियां अंधाधुंध ली जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि सब कुछ इतना सुनियोजित तरीके से चल रहा है जैसे कोई षणयंत्र रच कर लोगों को पॉलिसी लेने विवश किया जा रहा हो।

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