लॉकडाउन / ग्वालियर में जनता का कर्फ्यू, पूरा शहर लाक

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ग्वालियर।अजयभारत न्यूज
कोरोना वायरस के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रविवार को जनता कर्फ्यू का ग्वालियर में पूरा समर्थन मिल रहा है। सुबह 7 बजे से ही पूरा शहर लाकडाउन है। इमरजेसी सुविधायें हालांकि बहाल है। पुलिस भी जगह जगह तैनात है जो भी बाहर निकल रहा है उससे पुलिसकर्मी जाने का कारण भी पूछ रहे है।
कोरोना वायरस अब विश्व के सामने एक बड़ा संकट है। चीन, यूरोप, अमेरिका इससे बुरी तरह प्रभावित है। इसका असर अब भारत में भी देखने को मिल रहा है। तीन सौ से उपर इससे संक्रमित मरीजों का आंकड़ा सामने आया है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता से खुद पर कर्फ्यू लगाने की मांग रविवार को की थी। उसी के तहत व्यापारियों ने प्रधानमंत्री का जहां समर्थन करते हुये अपने प्रतिष्ठान 23 और 24 मार्च को भी बंद रखने का निर्णय लिया है। वहीं रविवार को सुबह से ही पूरा शहर कफ्र्य की चपेट में रहा। सभी लोग इस संक्रमण से बचने के लिए घरों में कैद है। इक्का दुक्का जो भी बाहर निकल रहा है उससे पुलिस कर्मी जाने का कारण पूछ रहे है। हाईवे पर भारी वाहनों का आवागमन भी पूरी तरह नदारत दिख रहा है।
पूरे शहर में छाया सन्नाटा
रविवार की दोपहर में पीएम नरेन्द्र मोदी की अपील जनता कर्फ्यू के दौरान जनता का समर्थन देखने को मिला है। सिटींसेंटर चौराहा, रेलवे स्टेशन चौराहा, पड़ाव चौराहा, फूलबाग चौराहा, गुरूद्वारा चौराहा, जयेन्द्र गंज चौराहा, दालबाजार, नयाबाजार, कंपू, जिंसी नाला रोड, हुजरात कोतवाली, दौलतगंज मार्ग, महाराज बाड़ा, सराफाबाजार, गस्त का ताजिया, राममंदिर चौराहा, छप्परवाला पुल, शिन्दे की छावनी, फूलबाग चौरहा से होते हुए किला गेट, हजीरा चौराहा, गोला का मंदिर, मुरार बारादरी, ठाठीपुर चौराहा, गोविंद पुरी चौराहा पुलिस के जवान तैनात थे और इसके साथ ही जिला प्रशासन की ओर एसडीएम अपने क्षेत्र में कानून व्यवस्था देखते नजर आये।
रेलवे स्टेशन रहा खाली
ग्वालियर। कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच सरकार ने लोगों से घरों में रहने की अपील की है। वहीं जो लोग ग्वालियर से बाहर जा रहे हैं, या ग्वालियर आ रहे हैं उन्हें स्टेशन पर कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं मिल रहा है।
कोरोना वायरस के चलते जो भी लोग आ रहे हैं या जा रहे हैं उन्हें वाहन नहीं मिल रहा है।जनता कर्फ्यू के कारण अधिकांश ट्रेने रद्द रहीं, दोपहर में छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर दो पर आकर रुकी तो उसमें चुनिंदा यात्री ही स्टेशन पर उतरे। जो लोग बाहर से आए थे उन्हें अपने घरों तक जाने के लिए साधन नहीं मिला। सभी ऑटो रिक्शा बंद रहें। जिसके चलते लोग इधर उधर भटकते दिखें।वहीं कुछ लोगों को अपने परिजनों को बुलाना पड़ा। जिसके बाद वो घर जा पाए। इससे पहले कर्फ्यू में ऐसी स्थिति कभी देखने को नहीं मिली जो कोरोना के कारण जनता कर्फ्यू में देखने को मिली। सभी ने इस कर्फ्यू का समर्थन किया और अपने अपने घरों में ही दिखे।
23 और 24 को शासकीय एवं अशासकीय संस्थायें बंद रहेंगी
ग्वालियर। नोबल कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुये कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कोशलेंन्द्र विक्रम सिंह ने दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144(2) के तहत आवश्यक वस्तुयें जैसे दवा, दूघ, फल, राशन, सब्जी,स्वस्थ्य सेवायें, विद्युत, पेयजल, साफ सफाई इत्यादि सेवाओं को छोड़कर शासकीय एवं अशासकीय संस्थायें 24 मार्च तक पूर्णत: बंद रखने के आदेश जारी किये गये हैं । उक्त आदेश का उल्लंघन करने पर धारा 188 एवं अन्य दंडात्मक प्रावधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की जावेगी ।
प्रशासन एवं पुलिस दल ने किया मुस्तैदी से कार्य
ग्वालियर। संपूर्ण देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर जनता कर्फ्यू के दौरान ग्वालियर जिले में शत प्रतिशत दुकानें बंद रही । जिले के नागरिकों ने भी अपने घर पर ही रहकर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने में अपना योगदान दिया । शाम पांच बजे नागरिकों ने अपने घरों पर थालियां , तालिया एवं घंटियां और शंख ध्वनि के साथ कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये किये जा रहे प्रयासों को संबल प्रदान किया । जिला प्रशासन प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग का अमला भी पूरे जिले में भ्रमण कर लोगों को घर पर ही रहने की समझाइश देता रहा । नागरिकों ने कोरोना वायरस के संक्रमण रोकने के लिये एक जुटता का परिचय देकर जनता कर्फ्यू को सफल बनाया।
सबकुछ रहा बंद, पत्रकारों का काम रहा जारी
ग्वालियर। जनता कफ्र्यू के दौरान सबकुछ बंद रहा और शहर की सडक़ों पर सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन समाज का तबका पत्रकार और पुलिस लोगों के बीच बिना रूके कार्य करता रहा। खासकर पत्रकार क्षेत्र में सभी के बीच जा रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों का हाल जान रहे हैं, सर्दी खासी बुखार के मरीजों के पास जाने में भी कोई संकोच नही कर रहे हैं, लेकिन विडंबना है कि इतनें जोखिम में काम कर रहे पत्रकार को शासन की तरफ से कोई सुविधा नही मुहैया नही कराई जा रही है।

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