महाशिवरात्रि विशेष; खजुराहो के मतंगेश्वर मंदिर पर महाशिवरात्रि के विशाल पर्व पर उमड़ा जनसैलाब

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खजुराहो । खजुराहो के मंदिर वेसे तो दुनिया भर में काम कला के मंदिरों के रूप में विख्यात है किन्तु श्री श्री 1008 भगवान शिव को समर्पित मतंगेश्?वर मंदिर हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। खजुराहो के प्रसिद्ध मतंगेश्वर महादेव मंदिर में किवदंती अनुसार यही एक मात्र ऐसा मंदिर है जहाँ आदि काल से निरंतर पूजा होती चली आ रही है। चंदेल राजाओं द्वारा नवीं सदी में बनाए गए इस मंदिर के शिवलिंग के नीचे एक ऐसी मणि है जो हर मनोकामना पूरी करती है। कहा जाता है कि कभी यहाँ भगवान राम ने भी पूजा की थी। आज शिवरात्रि के दिन यहाँ शिव भक्तों का तांता लगा रहता है। खजुराहो के सभी मंदिरों में सबसे ऊँची जगती पर बने इस मंदिर में जो भी आता है वो भक्ति में डूब जाता है, फिर चाहे वो हिंदुस्तानी हो या विदेशी। कहते है कि यह शिवलिंग किसी ने बनवाया नहीं बल्कि स्वयंभू शिवलिंग है। 18 फुट की मूर्ति जितनी ऊपर है उतनी ही नीचे भी है। ये मूर्ति प्रति वर्ष तिल के बराबर बढती भी है।
मतंग ऋषि करते थे पूजा
मान्?यता है कि मतंग ऋषि इस शिवलिंग की पूजा करते थे। इसलिए स्वयं भगवान श्री राम ने मतंग ऋषि के नाम पर इसका नाम मतंगेश्?वर रखा था।
मरकट मणि
यंहां के चंदेल राजाओं को मरकट मणि चंद्रवंशी होने के कारण विरासत में मिली थी। चंदेल राजाओं ने इस मणि की सुरक्षा और नियमित पूजा अर्चना के लिए इसे शिवलिंग के नीचे रखवा दिया था।लोक मान्यता है कि जो भी आदमी मरकट मणि की पूजा करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। इंद्र ने मरकत मणि युधिष्ठिर को दी थी। आगे जाकर यह यशोवर्मन, चंद्रवर्मन के पास रही। उन्होंने उसकी सुरक्षा व पूजा अर्चना के लिए लिए इसे शिवलिंग के नीचे स्थापित करा दिया था।लोगों की आस्थाएं है तभी तो यहां हर शिवरात्रि व अमावस्?या पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुड़ते है।यहाँ आकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते है। लोग उल्टे हाथे लगाकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते है। मनोकामना पूर्ण होने के बाद सीधे हाथे लगाते है। तो आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।

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