महाशिव रात्रि आज : 117 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग

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ग्वालियर।अजयभारत न्यूज

शास्त्रों में तीन रात्रियों का विशेष उल्लेख मिलता हैं। कालरात्रि जो नवरात्र के अष्ट भी तिथि में पड़ती है। दूसरी रात्रि जन्माष्टमी जिसे आनंद रात्रि कहा जाता है। तीसरी रात्रि का नाम शिवरात्रि है जिसे तीनों रात्रियों में जागरण का निर्देश हैं। महाशिवरात्रि भगवान शिव का विवाह उत्सव हैं। देवाधिदेव महादेव भोलेशंकर का महापर्व शिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आज शुक्रवार २१ फरवरी को नगर में धार्मिक आस्था और श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस मौके पर नगर के शिव मंदिरों, देवालयों में विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।

जगमग रोशनी से सजे शिवालय

आकर्षक विद्युत साज सज्जा से नहाए शिवमंदिरों में शिवरात्रि पर्व पर सुबह से लेकर देर रात तक भक्तजनों का जनसैलाब उमड़ेगा।  अचलेश्वर मंदिर में अभिषेक, पूजन के साथ भजन, कीर्तन का भी दौर चलेगा। कोटेश्वर स्थित महादेव मंदिर में स्थापित भगवान शिव की भव्य एवं विशालकाय प्रतिमा के समक्ष आज श्रद्धालुओं की अच्छी खासी भीड़ जुटेगी।गोविन्द पुरी स्थित  शिव पार्वती मंदिर  में आज शिवरात्रि पर दिन भर भक्तों की भीड़ जुटेगी। घरों में श्रद्धालुजन दिन भर का व्रत रखकर भोलेनाथ का पूजन, अभिषेक करेंगे।

117 साल बाद दुर्लभ संयोग

इस बार शिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. सुरेश  शास्त्री के अनुसार इस साल शिवरात्रि पर शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेंगे। यह एक दुर्लभ योग है जब ये दोनों बड़े ग्रह शिवरात्रि पर इस स्थिति में रहेंगे। २०२० से पहले २५ फरवरी १९०३ को ठीक ऐसा ही योग बना था और शिवरात्रि मनाई गई थी। इस साल गुरू भी अपनी स्वराशि धनु में स्थित है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरू, शुक्र के दोषों से भी मुक्ति मिलती है।

इस बार की महाशिवरात्रि बेहद खास

पं. शास्त्री ने बताया कि २१ फरवरी शिवरात्रि पर बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे, इस वजह से बुध आदित्य योग बनेगा। इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे इस वजह से सूर्य योग भी बनेगा। साथ ही पूरे दिन र्स्वार्थ सिद्धि योग भी उपस्थित रहेगा। इस योग को सभी कार्यों की सफलता के लिए बहुत ही शुभ माना गया है। इसलिए इस बार महाशिवरात्रि पर्व का महत्व कई गुना बढ़ गया है। महाशिवरात्रि के दिन शाम ५.२१ बजे त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। वास्तव में त्रयोदशी और चतुर्दशी का मेल होने पर महाशिवरात्रि का पुण्यकाल योग के कारण इस बार की महाशिवरात्रि बेहद खास होगी और शिव भक्तों के लिए शुभ फलकारी होगी।

शिव पूजन के अनेक रूप

ज्योतिषाचार्य पं. शास्त्री के अनुसार शास्त्रों में शिव पूजन के अनेक रूपों की व्यवस्था की गई है। अलग-अलग कामनाओं के आधार पर इनका पूजन विधान भी वर्णित किया गया है परंतु पार्थिव शिवलिंग पूजन का अपना अलग महत्व है। हाथ की लकीरें बदलती हैं शिवलिंग निर्माण में। इस कारण अनेक भक्त मिट्टी के शंकरजी स्वयं बनाते हैं। माना जाता है कि शिवलिंग बनाने में हाथ की दुर्भाग्य रेखायें सौभाग्य रेखा में बदलती हैं।

ऐसे करें पूजन

ज्योतिषाचार्य पं.शास्त्री  के अनुसार इस व्रत में रात्रि जागरण व पूजन का बड़ा ही महत्व है, इसलिए सायंकाल स्नानादि से निवृत होकर वैदिक मंत्रों द्वारा प्रत्येक पहर में पूर्व या उत्तराभिमुख होकर रूद्रभिषेक करना चाहिए। इसके बाद सुगंधित पुष्प, गंध, चंदन, विल्व पत्र, धतूरा, धूपदीप, भांग, नैवेद्य द्वारा रात्रि के चारों पहर में पूजा करनी चाहिए। घर, शिवालयों में भी पहर में करते हुए ओम् नम: शिवाय का जप करना चाहिए।

आज निकलेगी शिव जी की बारात

शिवरात्रि के पावन पर्व पर प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष पर गुप्तेश्वर महादेव मंदिर से २१ फरवरी की सुबह ११ बजे शिव बारात गाजे बाजे के साथ निकाली जाएगी। बारात में भूत – पिशाच बाराती बनकर चलेगे। विभिन्न्न् मार्गो से होती हुई शिव बारात अचलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेगी। शिव बारात का जगह जगह भव्य स्वागत किया जाएगा। वहीं नगर के प्रमुख शिवालयों पर श्रद्धालुओ ंकी भारी भीछ रहेगी  और फलहारी प्रसादी का वितरण किया जाएगा।

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