मप्र से प्रचार करने गए भाजपाइयों ने लौटने पर खोली पोल;कार्यकर्ता नाराज…इसलिए दिल्ली के दिल से दूर रही भाजपा

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भोपाल । दिल्ली चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की हार को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कांग्रेस तो यूं भी खाली हाथ रही, लेकिन भाजपा ने जितना दम चुनाव में लगाया था उतनी सीटें वह प्राप्त नहीं कर सकीं। मप्र से दिल्ली चुनाव में प्रचार करने गए भाजपाइयों का कहना है कि वहां संगठन से भाजपा कार्यकर्ता नाराज थे और सबसे बड़ी नाराजगी कार्यकर्ताओं को तवज्जो मिलने से नहीं थी। इसलिए माना जा रहा है कि दिल्ली वालों के दिल से भाजपा दूर रही।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह राष्ट्रवादी तथा देशभक्ति के मुद्दे पर भी दिल्लीवासियों को प्रभावित नहीं कर सके। इसके उलट सीएम अरविन्द केजरीवाल ने स्थानीय मुद्दों और विकास को लेकर चुनाव लड़ा और वे फिर से सरकार बनाने में कामयाब हो गए। यह भाजपा के कार्यकर्ताओं का ही कहना है। नाम न छापने की शर्त पर कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से संगठन के बड़़े नेताओं द्वारा कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं दी जाती है, वही स्थिति दिल्ली में भी हुई। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने काम नहीं किया और बाहर से गए नेता और कार्यकर्ता भी दिल्ली का मिजाज नहीं भांप पाए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि दिल्ली में भाजपा 20 साल से सत्ता में बाहर है और उसके बावजूद पिछले चुनाव में किरण बेदी तो इस चुनाव में मनोज तिवारी को आगे कर चुनाव लड़ती रहीं और पुराने नेताओं को तवज्जो नहीं दी गई।
मप्र के नेताओं का काम नहीं आया प्रयास
दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 सीटों पर जीत के लिए मप्र के नेताओं ने भी चुनाव प्रचार-प्रसार में पूरी ताकत झोंकी थी। मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, आधा दर्जन पूर्व मंत्री और सभी 28 सांसदों को दिल्ली में चुनाव प्रबंधन और प्रचार में पार्टी ने लगाया गया था। दिल्ली चुनाव में मप्र के कई नेताओं की ड्यूटी अलग-अलग विधानसभा सीट पर लगाई गई थी। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, उमाशंकर गुप्ता, विधायक अरविंद भदौरिया, रामेश्वर शर्मा, मोहन यादव, कृष्णा गौर, पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह, सांसद वीडी शर्मा, सांसद सुधीर गुप्ता सहित कई नेताओं को जनवरी के आखिरी सप्ताह में ही दिल्ली भेज दिया गया था। इन नेताओं ने जमकर प्रचार किया। लेकिन इनकी मेहनत काम नहीं है। वहीं मप्र कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी चुनाव प्रचार किया था। व्यस्त होने के कारण सीएम कमलनाथ नहीं पहुंचे थे। लेकिन पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और उच्च शिक्षा एवं खेल मंत्री जीतू पटवारी, विधायक कुणाल चौधरी दिल्ली के रण में स्टार प्रचारक थे।
दिल्ली के परिणाम से सब खुश
पिछले एक दशक के दौरान देश में हुए चुनावों में से 2020 का दिल्ली विधानसभा चुनाव एकमात्र ऐसा चुनाव रहा है, जिसमें सब खुश हैं। आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता दिल्ली में लगातार दूसरी बार बम्पर जीत हासिल करने पर खुश हैं। वहीं दिल्ली की जनता इस बात से खुश है कि उसे एक बार फिर ढेर सारी मुफ्त की सेवाएं मिलेंगी। वहीं भाजपाई इस बात से खुश हैं कि दिल्ली में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाया। जबकि कांग्रेसी इस बात से खुश हैं कि भाजपा की लाख कोशिश के बाद भी वह जीत नहीं पाई है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा लगभग साफ होने और भाजपा की सीटों का आंकड़ा बहुत ज्यादा नहीं बढऩे से मप्र के नेता भी खुश हैं। कांग्रेस यह कह कर खुश है कि दिल्ली की जनता ने भाजपा को पूरी तरह से नकार दिया है। वहीं, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि भाजपा का वोट शेयर दिल्ली में बढ़ा है। कांग्रेस का तो दिल्ली में सूपड़ा साफ हो चुका है।
दिल्ली ने नफरत को नामंज़ूर किया!
राजधानी भोपाल से दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बड़ी जिम्मेदारी लेकर गए एक भाजपा नेता कहते हैं कि दिल्ली चुनाव में जीते तो केजरीवाल हैं, लेकिन हारा कौन? निश्चित तौर पर भाजपा। लेकिन भ्ज्ञाजपा में भी कौन? वही जिसके नाम पर पूरा चुनाव लड़ा गया और वह एक नाम है अमित शाह। वह कहते हैं कि आप इस गलतफहमी में मत रहना कि इस चुनाव में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी या राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की हार हुई है। या फिर किसी और उम्मीदवार की हार हुई है। वह कहते हैं कि दिल्ली का पूरा चुनाव भाजपा ने व्यक्ति के तौर पर अमित शाह के नाम पर लड़ा और राजनीति के तौर पर नफरत की राजनीति के सहारे लड़ा लेकिन इन दोनों की ही इस चुनाव में हार हुई है।
‘जय श्रीराम’ जवाब ‘जय हनुमान’
दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम के साथ ही अरविंद केजरीवाल की हनुमान भक्ति ने भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है। दिल्ली चुनाव में भारी जीत का श्रेय भी केजरीवाल ने हनुमानजी को दिया। मप्र के आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि खुद को ‘कट्टर हनुमान भक्त’ के तौर पर पेश करने का निर्णय केजरीवाल ने अनायास नहीं लिया है। दशकों से ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाकर खुद को हिंदुत्व का पैरोकार बताने वाली भाजपा को अब आप ‘जय बजरंग बली’ या ‘जय हनुमान’ के नारे से जवाब दे सकती है। केजरीवाल के एक सहयोगी ने बताया कि पार्टी हनुमान जी के शुभंकर को उसी तरह अपनाने के बारे में गंभीरता से विचार कर रही है जैसे भाजपा पिछले तीन दशकों से भगवान श्रीराम का इस्तेमाल करती रही है। भाजपा आप को हिंदू विरोधी या राष्ट्र विदेशी नहीं बता सकेगी अगर हमारे नेता खुद को हनुमान जी के भक्त के रूप में बताते हैं क्योंकि हनुमान जी ही भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं जिनके इर्द-गिर्द भाजपा अपनी राजनीति चलाती है।

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