JU एक बार फिर विवादों के घेरे में… मल्टी आर्ट कॉम्प्लेक्स को लेकर ईसी मेंबर ने उठाये सवाल

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ग्वालियर।मध्य प्रदेश के ग्वालियर संभाग की “ए” ग्रेड यूनिवर्सिटी एक बार विवादों में है। विवाद मल्टी आर्ट कॉम्प्लेक्स को लेकर जिसकी कॉस्ट बड़ा दी गयी है। तो वहीं ईसी मेंबर ने कॉम्प्लेक्स की क्वालिटी को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। साथ ही स्पष्ट रूप से कुलपति को कह दिया है। यूनिवर्सिटी ठेकेदार से कॉम्प्लेक्स का हैंडओवर नहीं लेगीं। इस बीच कुलपति परेशान है कि मध्य प्रदेश के सबसे मल्टी आर्ट कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन कैसा होगा क्योंकि वो राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से दिसंबर के फर्स्ट वीक में दो डेट मांग चुकी हैं।
ईसी मेंबरों ने उठाये सवाल
ग्वालियर के जीवाजी यूनिवर्सिटी के मल्टी आर्ट कॉम्प्लेक्स का हैंडओवर लेने से यूनिवर्सिटी की ईसी मेंबर ने इंकार कर दिया है। ईसी मेंबरों ने कॉम्प्लेक्स के निर्माण पर सवाल खड़े खड़े किए है। साथ ही क्वालिटी के साथ-साथ आर्थिक अनिमित्ताओं और ठेकेदार को फायदा पहुंचने के आरोप लगाएं है। ईसी मेंबर का कहना है कि दिसंबर 2014 में मल्टी आर्ट के निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी। इसके निर्माण के लिए 14 करोड़ 80 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। लेकिन कॉम्प्लेक्स की कॉस्ट 23 करोड़ 92 लाख 58 हजार रूपए पहुंच गयी है।
2 साल के अंदर होना था निर्माण
मल्टी आर्ट कॉम्प्लेकस का निर्माण 2 साल में होना था। साथ ही जीवाजी यूनिवर्सिटी ने शर्त रखी थी। अगर 2 साल में ठेकेदार निर्माण को पूरा नहीं करता है, तो टोटल कॉस्ट पर 6 फ़ीसदी ठेकेदार से वसूल की जाएगी। इस हिसाब से 2017 में मल्टी आर्ट कॉम्प्लेक्स को बनकर तैयार हो जाना था। लेकिन ऐसा नही हो सका। साथ ही ठेकेदार 6 फ़ीसदी पैनल्टी वसूली नही गयी। लेकिन अब क्वालिटी को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे। तो ठेकेदार इन सब विवादों के बीच उसे हैंडओवर करने की जुगत में लग गया है।
डेकेरोशन में लगेगा 3 महीने का समय
ईसी मेंबरों के आरोपों की बात करें तो यूनिवर्सिटी की कुलपति संगीता शुक्ला आनन-फानन में उसका उद्घाटन राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के हाथों करना चाहती है। जिसके लिए उन्होनें दिसंबर के फर्स्ट वीक में दो डेट डिसाइट की है। लेकिन सवाल कॉम्प्लेक्स अभी हैंडओवर लेने की स्थिति में नही है। क्योंकि उसमें सिविल काम बचा हआ है तो वही डेकेरोशन में भी कम से कम 3 महीने से ज्यादा का वक्त लगेगा।
किस तरह से मल्टीआर्ट कॉम्प्लेक्स में हुई गड़बड़ी…
• दिसंबर 2014 में मल्टी आर्ट के निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी। इसके निर्माण के लिए 14 करोड़ 80 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। लेकिन कॉम्प्लेक्स की कॉस्ट 23 करोड़ 92 लाख 58 हजार रूपए पहुंच गयी है।
• अनुबंध के अनुसार मार्च 2017 तक पूरा काम हो जाना था, लेकिन 2019 में भी 80 फीसदी काम होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
• मल्टी आर्ट कॉम्प्लेकस का निर्माण 2 साल में होना था। साथ ही जीवाजी यूनिवर्सिटी ने शर्त रखी थी। अगर 2 साल में ठेकेदार निर्माण को पूरा नहीं करता है, तो टोटल कॉस्ट पर 6 फ़ीसदी ठेकेदार से वसूल की जाएगी। लेकिन नही वसूली…
• 30 एमएम के ग्रेनाइट के स्थान पर 19 एमएम के ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया है।
• कई ऐसे काम इस मल्टी आर्ट कॉम्पलेक्स में किए गए है जो स्वीकृति ड्राइंग डिजाइन के विपरीत हैं।
• मसलन ग्रिड प्लास्टर के स्थान पर सामान्य प्लास्टर किया जा रहा है।
• पार्किंग में सीसी फ्लोरिंग के स्थान पर कोटा स्टोन लगाया गया है।

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