चंद्रयान-2: ओ विक्रम! सुन ले जरा… ISRO भेज रहा है सिग्नल, समझिए कैसे

0
19

चेन्नै।इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर (इसरो) ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि एजेंसी चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। चंद्रयान के ऑर्बिटर ने इसकी सटीक लोकेशन का पता भी लगा लिया है। इसरो के चेयरमैन के सिवन ने भी रविवार को कहा था कि ऑर्बिटर ने विक्रम की लोकेशन का पता लगा लिया है। इसरो का कहना है कि उनकी टीम लगातार सिग्नल भेजकर लैंडर से सम्पर्क की कोशिश कर रही है। ऐसे में विक्रम से सम्पर्क स्थापित करने को लेकर कई ऐसे सवाल हैं, जो हर किसी के दिमाग में घूम रहे होंगे, जैसे विक्रम से कैसे संपर्क किया जा रहा है, इस कोशिश के लिए इसरो के पास कितना समय है, संपर्क स्थापित हुआ तो विक्रम कैसे जवाब देगा… हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया ने कई वैज्ञानिकों से बात कर इन सब सवालों के जवाब खोजने की कोशिश की।
इसरो को वह फ्रिक्वेंसी पता है, जिसमें विक्रम के साथ कम्युनिकेट किया जाना है। ऐसे में उनकी टीम लगातार इस उम्मीद के साथ अलग-अलग कमांड भेज रही है कि विक्रम किसी कमांड पर जवाब दे। हालांकि अभी तक कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है।
इसरो सम्पर्क के लिए कर्नाटक के एक गांव बयालालु में लगाए गए 32 मीटर ऐंटेना का इस्तेमाल कर रहा है। इसका स्पेस नेटवर्क सेंटर बेंगलुरू में है। इसरो एक और रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है। इसरो की कोशिश है कि ऑर्बिटर के जरिए विक्रम से सम्पर्क स्थापित हो सके, लेकिन इसमें भी अभी तक सफलता नहीं मिली है।
कैसे जवाब दे सकता है विक्रम?
विक्रम तीन ट्रांसपोंडर्स और एक तरफ आरे ऐंटेना से इक्विप्ड है। इसके ऊपर एक गुम्बद के जैसा यंत्र लगा है। विक्रम इन्हीं इक्विपमेंट का इस्तेमाल करके पृथ्वी या इसके ऑर्बिटर से सिग्नल लेगा और फिर उनका जवाब देगा। लेकिन ग्राउंड स्टेशन से सम्पर्क टूट जाने के बाद से 72 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी विक्रम ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि अभी तक इसरो ने अधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी नहीं दी है कि विक्रम के ये इक्विपमेंट सही सलामत हैं या उन्हें क्षति पहुंची है। इन सिस्टम को काम करने के लिए पावर की जरूरत भी होगी।
क्या विक्रम के पावर/ऊर्जा है?
विक्रम की बाहरी बॉडी पर सोलर पैनल लगा है। यदि विक्रम ने तय योजना के मुताबिक लैंडिंग की होगी तो यह सूरज से ऊर्जा लेकर पावर जनरेट कर लेगा। इसके अलावा, विक्रम में बैटरी सिस्टम भी है। लेकिन यह साफ नहीं है कि लैंडर पावर जनरेट कर रहा है या नहीं। इसरो ने अभी तक इसकी भी जानकारी नहीं दी है। हो सकता है कि हार्ड लैंडिंग के कारण इसके कुछ इक्विपमेंट टूट गए हों, लेकिन जैसा कि इसरो के चेयरमैन ने कहा कि वे अभी भी उसके डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं।

LEAVE A REPLY