नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी

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– भोपाल में लगातार तीन दिनों से रुक-रुककर गिर रहा पानी
भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की मेहरबानी के चलते लगातार बारिश हो रही है। बुधवार को पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश हुई। 132 मिली मीटर बारिश के साथ विदिशा जिला में सर्वाधिक पानी गिरा।
नरसिंहपुर में 87 मिमी, सिवनी में 77 सीहोर में 70, बालाघाट में 52, मंडला में 48, होशंगाबाद में 46 मिमी, रायसेन में 42 मिमी बारिश दर्ज हुई। वहीं, राजधानी भोपाल में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश बुधवार को भी जारी रही। दोपहर बार यहां तेज बारिश से सडक़ें सूनी हो गईं, लोग जहां थे, वहीं ठिठक कर रह गए। तेज बारिश की वजह से सडक़ों में थोड़ी देर के लिए अंधेरा छा गया। गुना जिले के रुठियाई में चौपेट नदी के रपटे को पार करते समय युवक पानी में बह गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार बंगाल की खाड़ी में कम दवाब का क्षेत्र बना हुआ है, इसके अलावा अन्य मौसमी गतिविधियों के चलते राज्य में बादल छाए हुए हैं और सामान्य से भारी बारिश के आसार बने हैं।

इन जिलों में होगी भारी बारिश
आगामी चौबीस घंटों के दौरान मप्र के सभी जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, होशंबाद, बैतूल, हरदा, खंडवा, खरगौन, बुरहानपुर, बड़वानी, देवास, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, अनूपपूर, डिंडौरी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

राजधानी पर मेहरबानी
28 जून को मानसून आने के बाद से भोपाल में भारी बारिश का सिलसिला एक महीने से जारी है। 25 जुलाई से अब तक 41 दिनों में 11 मानसूनी सिस्टम बने। मतलब यह कि हर चौथे दिन बने सिस्टम की वजह से बारिश होते रही है। अगर यह सिस्टम इसी तरह बनते रहे तो सितंबर में भी बारिश जारी रहेगी।

हरसूद में आधा दर्जन गांवों में बाढ़
खंडवा के हरसूद में बुधवार सुबह से हो रही बारिश आफत बन गई है। छह घंटे में करीब पांच इंच बारिश के बाद नर्मदा नदी की कई सहायक नदियां उफान पर आ गईं। इंदिरा सागर बांध के बैक वाटर से यहां बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं। बोरी सराय गांव में पांच से छह फीट पानी भरने से 80 से ज्यादा मकान जलमग्र हो गए। अग्नी नदी के उफान पर आने से आशापुर गांव के डूबने का खतरा बढ़ गया है। बारिश के कारण इंदिरा सागर बांध का वाटर लेवल 262.13 क्षमता से ज्यादा हो गया। बैक वाटर के चलते काली माचल, पाताल, रूपारेल, घोड़ा पछाड़ और अग्नी नदी में उफन गईं।

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