हरियाणा: हुड्डा के सामने झुका कांग्रेस आलाकमान, चुनाव कमेटी और विधायक दल की कमान दी, शैलजा बनीं अध्यक्ष

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रोहतक: कांग्रेस के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने वाले हरियाणा के पूर्व सीएम और दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने पार्टी झुक गई है. हुड्डा की मांग को मानते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अशोक तवंर को राज्य अध्यक्ष से पद से हटा दिया है. भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल के नेता के साथ चुनाव प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. हालांकि राज्य में अध्यक्ष पद की कमान पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के हाथ में दी गई है.
हरियाणा में लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य पार्टी अध्यक्ष अशोक तवंर के खिलाफ मोर्चा खोलकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. कुछ दिन पहले हुड्डा ने रोहतक में एक रैली करते हुए पार्टी में बने रहने और छोड़ने को लेकर एक कमेटी बनाई थी. हुड्डा ने इस रैली में पार्टी के कश्मीर पर लिए गए स्टैंड का भी विरोध किया था.
कुमारी शैलजा बनी अध्यक्ष
अशोक तवंर को हटाकर पार्टी ने चार बार सांसद रही कुमारी शैलजा को राज्य में पार्टी की कमान दी है. शैलजा दो बार सिरसा से और दो बार अंबाला से सांसद रही हैं. शैलजा मनमोहन की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी थीं और वर्तमान में शैलजा राज्यसभा सांसद हैं और राज्य में बड़े दलित चेहरे के तौर पर पहचान रखती हैं. शैलजा को सोनिया गांधी का करीबी भी माना जाता है. शैलजा चार पर सिरसा से सांसद रहे दलबीर सिंह की बेटी हैं. अशोक तवंर भी राज्य में दलित नेता हैं तो शैलजा को कामन देकर पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश भी की है.
पुरानी थी लड़ाई
हुड्डा और अशोक तवंर के बीच पिछले काफी वक्त से लड़ाई चल रही थी. अशोक तवंर को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है और हुड्डा समर्थक लगातार अपनी अनदेखी होने का आरोप लगा रहे थे. अशोक तवंर को 2014 लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में पार्टी की कमान दी गई थी, लेकिन उसके बाद वह एक भी चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में कामयाब नहीं हो पाए.दो महीने बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में अशोक तवंर को पद से हटाया जाना हुड्डा के लिए पार्टी के भीतर किसी बड़ी जीत से कम नहीं है. चुनावी प्रबंधन समिति की कमान मिलने से भी साफ है कि विधानसभा चुनाव को लेकर हुड्डा की भूमिका काफी अहम होने वाली है. विधायक दल के नेता के तौर पर हुड्डा किरण चौधरी की जगह लेंगे.
मुश्किल दौर से गुजर रही है कांग्रेस
इस फैसले के बाद भी राज्य में कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं है. हरियाणा में विधानसभा की 90 सीटें हैं और कांग्रेस के पास सिर्फ 17 विधायक हैं. इसके अलावा भी पार्टी के अंदर की गुटबाजी समय-समय पर दिखाई देती रहती है. हुड्डा खेमा राज्य में सबसे मजबूत नज़र आता है और जब उन्होंने बगावती तेवर अख्तियार किए उस वक्त 13 विधायक और कई पूर्व मंत्री उनके साथ थे. हुड्डा के अलावा राज्य में शैलजा, रणदीप सुरजेवाला, कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी, अशोक तवंर बड़े चेहरे हैं. ये सभी चेहरे एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं. लोकसभा चुनाव में पार्टी को सभी 10 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें हुड्डा और शैलजा भी शामिल थे.

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