अफवाहों पर रोक के लिए जम्मू में फिर से मोबाइल इंटरनेट बंद, कश्मीर घाटी में भी लगाई गईं पाबंदियां

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नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. हिंसा की कुछ घटनाओं के बाद जम्मू, रियासी, सांबा, कठुआ और उधमपुर जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है. सरकार ने यह कदम अफवाहों के फैलने से रोकने के लिए एतिहात के तौर पर उठाया है. शुक्रवार देर रात ही इन जिलों में इंटरनेट सेवा बहाल की गई थी. वहीं दूसरी तरफ श्रीनगर में फिर से लौट रौनक रही है. आज सुबह सड़कों पर लोगों की आवाजाही रही. कश्मीर में सोमवार से स्कूल और कॉलेज खुलेंगे. इसके अलावा सोमवार से ही सभी सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी भी काम पर लौटेंगे.
इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि सऊदी अरब से हज तीर्थयात्रियों का पहला बैच कश्मीर लौट आया है. उन्होंने बताया कि रविवार को 14वें दिन घाटी के कई हिस्सों में पाबंदियां जारी हैं. अधिकारियों ने बताया कि उन इलाकों में फिर से पाबंदियां लगा दी गई है जहां शनिवार को हालात बिगड़ गए. शहर में कई स्थानों पर और घाटी में अन्य जगहों पर पाबंदियों में ढील दी गई थी जिसके बाद परेशानी पैदा हो गई थी. उन्होंने बताया कि करीब 12 स्थानों पर प्रदर्शन हुए जिसमें कई प्रदर्शनकारी जख्मी हो गए. बहरहाल, अभी यह पता नहीं चला है कि कितने लोग घायल हुए. अधिकारियों ने बताया कि करीब 300 तीर्थयात्रियों के साथ आ रहे विमान सुबह श्रीनगर हवाईअड्डे पहुंचे.
सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने शनिवार को बताया था कि घाटी में 35 पुलिस थाना इलाकों में प्रतिबंधों में ढील दी गई. हालांकि, कई स्थानों पर युवाओं और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें देखने को मिली जिसके बाद पाबंदियों को फिर से लागू कर दिया गया. शनिवार शाम को कंसल ने कहा कि घाटी में छह स्थानों पर प्रदर्शन हुए जिनमें आठ लोगों को चोटें आयी. उन्होंने बताया कि शहर के सिविल लाइंस इलाकों और घाटी में अन्य जिला मुख्यालयों में कुछ निजी वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं. इन इलाकों में कुछ दुकानें भी खुली हैं.जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि पुलिस आतंकवादियों पर निरंतर दबाव बना कर उन्हें अलग-थलग करने का प्रयास कर रही है ताकि वे आम लोगों को बहका नहीं सकें. उन्होंने कहा, ”पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों और सेना को सम्मिलित कर बनाई गई सुरक्षा टीमों ने शानदार काम किया है, लेकिन हमें राज्य के लोगों की तरफ से दिए गए सहयोग को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.”
जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को पांच अगस्त को केंद्र की ओर से निरस्त किए जाने के बाद राज्य में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ा दी गई थी और कड़ी पाबंदिया लगाई गईं. सिंह ने कहा, ”हमारी आतंकवाद रोधी इकाई इन आतंकवादियों को दूर रखने का दबाव बनाए हुए है और निश्चित तौर पर हम ऐसा कर पाएंगे.”

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