हरिद्वार में गंगा में लीन हुईं अटल की अस्थियां, हजारों लोग रहे मौजूद

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हरिद्वार: भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री जन-नायक अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां रविवार को ‘अटल तुम लौट के आना और भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों के बीच पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोचारण के साथ हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड पर गंगा में विसर्जित कर दी गईं। अस्थि विसर्जन के निमित्त कर्म-कांड उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य, दामाद रंजन भट्टाचार्य, नातिन निहारिका भट्टाचार्य और भांजे भाजपा सांसद अनूप मिश्रा ने किया।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित स्थानीय व बाहर से आए गणमान्य व्यक्तियों के साथ बड़ी संख्या में संतगण प्रमुख रूप से मौजूद थे। इस मौके पर अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए गंगा घाट पर लाखों की संख्या में अटल समर्थकों का जन-सैलाब उमड़ पड़ा। जिस वक्त ब्रह्मकुंड पर वाजपेयी परिवार के तीर्थ पुरोहित पंडित अखिलेश शर्मा ‘शास्त्री’ और श्रीगंगासभा के आचार्य हरिओम जैवाल अस्थि विसर्जन का कर्म-कांड संपन्न करा रहे थे, उस वक्त पाश्र्व में अटल जी के प्रसिद्ध भाषण की ये पंक्तियां गूंज रही थी कि’..और मरने के बाद भी गंगाजल में बहती हुई हमारी अस्थियों को कोई कान लगाकर सुनेगा तो एक ही आवाज आयेगी, भारत माता की जय।’
इससे पहले अटल जी का अस्थि कलश लेकर उनके परिजन, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और अटल जी के सहयोगी शिवकुमार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे जौलीग्रांट हवाई अड्डे से हरिद्वार भल्ला कॉलेज स्टेडियम अस्थाई हैलीपैड पहुंचे। यहां से अस्थि कलश को रथ में तब्दील सेना के ट्रक में रख अस्थि कलश यात्रा हरकी पैड़ी रवाना हुई। इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी को अपने श्रृद्धा सुमन अर्पित करने को जन-सैलाब सड़कों पर उतर आया, क्या बच्चे और क्या बूढ़े।
विदेशियों ने भी उन्हें श्रृद्धा सुमन अर्पित किए। पूरे रास्ते प्रसिद्ध गीत ‘ए मेरे वतन के लोगों की पंक्तियां’ खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफर करते हैं’ गूंज रही थी। जगह-जगह अटल के कट-आउट लगे हुए थे, उनमें उल्लखित थीं, उनके भाषण और कविताओं की पंक्तियां।
डेढ़ घंटे का सफर पूरा कर अस्थि कलश यात्रा तकरीबन एक बजे हरकी पैड़ी पहुंची, यहां श्रीगंगा सभा ने श्रृद्धांजलि सभा का आयोजन किया हुआ था। अस्थि कलश को यहां बने मंच पर कुछ देर सभी के दर्शनार्थ रखा गया, यहां मौजूद संतों ने उन्हें अपने श्रृद्धा सुमन अर्पित किए और अटल जी के साथ अपने संस्मरणों को साझा किया। यहां से अस्थियों को ब्रह्मकुंड अस्थि विसर्जन स्थल ले जाया गया, जहां अटल बिहारी वाजपेयी परिवार के तीर्थ पुरोहित पंडित अखिलेश शर्मा ‘शास्त्री’ और श्रीगंगासभा के आचार्य हरिओम जैवाल ने वैदिक मंत्रोचारण के बीच पिंडदान व तिलांजलि आदि समस्त कर्म-कांड को पूरा कराते हुए अस्थियों को गंगा में उसका विसर्जन करा दिया।
अस्थियों को गंगाजल से कराया स्नान
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को हरकी पैड़ी पर गंगाजल से स्नान कराने के बाद वैदिक मंत्रोचारण के साथ दुग्ध स्नान कराने के बाद अन्य कर्म-कांड पूरा करने के साथ गंगा में विसर्जित किया गया। वाजपेयी परिवार के तीर्थ पुरोहित पंडित अखिलेश शर्मा ‘शास्त्री’ ने बताया कि अस्थियों को सर्व प्रथम गंगाजल से स्नान कराने के बाद ही अन्य कर्म-कांड शुरु किए गए।

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