पहली श्रावण सवारी : पालकी में सवार होकर प्रजा का हाल जानने निकले बाबा महाकाल

0
8

उज्जैन: श्रावण मास की पहली सवारी सोमवार शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से निकली। सवारी के पहले महाकाल मंदिर के सभामंडप में बाबा के मनमहेश स्वरूप का पूजन हुआ। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बाबा पालकी में विराजित होकर प्रजा का हाल जानने निकले। सवारी परंपरागत मार्ग से होकर रामघाट पहुंचेंगी, जहां पूजन के बाद शाम 7 बजे मंदिर पहुंचेगी। पहली सवारी में ही 30 हजार से ज्यादा भक्त सवारी में शामिल हुए हैं।
इस साल छह सवारी निकलेगी :
इस बार श्रावण और भादौ में प्रत्येक सोमवार को कुल छह सवारी निकलेगी। आखिरी शाही सवारी 4 सितंबर को निकाली जाएगी। 15 अगस्त को मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर को आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
सुबह से ही उमड़ा भक्तों का सैलाब :
बाबा महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए रविवार रात से ही उज्जैन में भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। बाबा के दर्शन को देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। महाराष्ट्र से आए सैकड़ों भक्त ने कहा कि हमारी बहुत इच्छा है कि सावन में बाबा के दर्शन करने हैं। इसके बाद हम टीम के साथ बाबा के दर्शन को उज्जैन पहुंचे, बाबा के दर्शन से हमारा जीवन धन्य हो गया। मंदिर परिसर सुबह से ही बाबा महाकाल के नारे से गुंजायमान है।

ऐसा है बाबा महाकाल की सवारी का सफर :
महाकाल की सवारी का स्वरूप हर दशक में बदलता रहा है। सवारी निकलने का सबसे पुराना प्रमाण 2100 साल पुराना शिलालेख है, 300 साल पहले सवारी को शाही स्वरूप मिला।

LEAVE A REPLY